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Sirmour News: रोनहाट कॉलेज बंद करने का फैसला सरकार की नाकामी
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-एसएफआई ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने प्रदेश के 10 सरकारी कॉलेजों को बंद करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इस निर्णय को छात्र विरोधी बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी।
मीडिया को जारी बयान में एसएफआई के राज्य सह-सचिव कमल शर्मा ने कहा कि सिरमौर जिले का रोनहाट कॉलेज भी बंद किए जाने वाले संस्थानों में शामिल है, जहां वर्तमान में 70 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के युवाओं को सुलभ और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने में विफल रही है।
कमल शर्मा ने कहा कि रोनहाट कॉलेज लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। कॉलेज में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है और न ही इसकी अपनी स्थायी भवन सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद यहां 70 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाओं में सुधार करने के बजाय कॉलेज को बंद करना सरकार की नकारात्मक सोच को दर्शाता है।
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संगठन ने सरकार से फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने और बंद किए गए कॉलेजों को आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनः संचालित करने की मांग की है। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो संगठन प्रदेशभर में छात्रों को लामबंद कर व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने प्रदेश के 10 सरकारी कॉलेजों को बंद करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इस निर्णय को छात्र विरोधी बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी।
मीडिया को जारी बयान में एसएफआई के राज्य सह-सचिव कमल शर्मा ने कहा कि सिरमौर जिले का रोनहाट कॉलेज भी बंद किए जाने वाले संस्थानों में शामिल है, जहां वर्तमान में 70 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के युवाओं को सुलभ और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने में विफल रही है।
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कमल शर्मा ने कहा कि रोनहाट कॉलेज लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। कॉलेज में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है और न ही इसकी अपनी स्थायी भवन सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद यहां 70 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाओं में सुधार करने के बजाय कॉलेज को बंद करना सरकार की नकारात्मक सोच को दर्शाता है।
संगठन ने सरकार से फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने और बंद किए गए कॉलेजों को आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के साथ पुनः संचालित करने की मांग की है। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो संगठन प्रदेशभर में छात्रों को लामबंद कर व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।