{"_id":"6a6b43761c21e9f527046a14","slug":"social-media-becomes-the-mentor-teachers-reap-a-new-harvest-of-earnings-nahan-news-c-177-1-ssml1028-184814-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: सोशल मीडिया बना गुरु, शिक्षक ने कमाई की उगाई नई फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: सोशल मीडिया बना गुरु, शिक्षक ने कमाई की उगाई नई फसल
विज्ञापन
भूड़ गांव में जेबीटी शिक्षक दलबीर सिंह द्वारा लगाया अमरूद का बगीचा। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भूड़ गांव के जेबीटी शिक्षक दलबीर सिंह का प्रयोग बना प्रेरणा
सहारनपुर से मंगवाए तीन किस्मों के पौधे, चार-पांच बीघा में तैयार किया बगीचा
कई अमरूद का वजन एक किलोग्राम से अधिक, बाजार में मिल रही अच्छी कीमत
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। कहते हैं कि सीखने की उम्र नहीं होती और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। सिरमौर जिले के नाहन विधानसभा क्षेत्र की बनकला पंचायत के भूड़ गांव के जेबीटी शिक्षक दलबीर सिंह ने इसे सच साबित कर दिखाया है। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूट्यूब से बागवानी की तकनीक सीखी। अब वे 250 अमरूद के पौधों का बगीचा तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनका यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गया है।
दलबीर सिंह के पास गांव में पर्याप्त कृषि भूमि है। शिक्षक होने के कारण वे खेती को पूरा समय नहीं दे पाते थे। इसी दौरान उन्होंने यूट्यूब पर अमरूद की उन्नत खेती और उससे होने वाली आय से जुड़े वीडियो देखे। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की एक नर्सरी से तीन किस्मों के 250 अमरूद के पौधे तथा अन्य फल और फूलों के पौधे मंगवाए।
करीब चार से पांच बीघा भूमि पर उन्होंने अमरूद का बगीचा विकसित किया। अब पौधे अच्छी तरह फल देने लगे हैं और बाजार में उनके अमरूद को बेहतर कीमत मिल रही है। कई पौधों पर लगने वाले अमरूद का वजन एक किलोग्राम से भी अधिक पहुंच जाता है। अमरूद के अलावा उन्होंने अन्य फलों, फूलों और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की भी खेती की है।
विज्ञापन
दलबीर ने बताया कि उनके परिवार के सभी सदस्य बागवानी के कार्य में सहयोग करते हैं। शुरुआत में उन्होंने गांव के दो लोगों को भी रोजगार दिया, जिन्होंने लंबे समय तक उनके साथ काम किया। उनका बगीचा अब आसपास के किसानों के लिए सीखने का केंद्र बन गया है। दूर-दूर से लोग बगीचा देखने और उत्पादन की तकनीक जानने पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बगीचा तैयार करने की शुरुआती जानकारी उन्हें यूट्यूब से मिली, जबकि बाद में उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी समय-समय पर मार्गदर्शन किया। आज अमरूद के पौधे भरपूर उत्पादन दे रहे हैं और अब तक वह अमरूद बेचकर करीब डेढ़ लाख रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन के साथ किसान कम भूमि पर भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं।
विज्ञापन
सहारनपुर से मंगवाए तीन किस्मों के पौधे, चार-पांच बीघा में तैयार किया बगीचा
कई अमरूद का वजन एक किलोग्राम से अधिक, बाजार में मिल रही अच्छी कीमत
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। कहते हैं कि सीखने की उम्र नहीं होती और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। सिरमौर जिले के नाहन विधानसभा क्षेत्र की बनकला पंचायत के भूड़ गांव के जेबीटी शिक्षक दलबीर सिंह ने इसे सच साबित कर दिखाया है। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूट्यूब से बागवानी की तकनीक सीखी। अब वे 250 अमरूद के पौधों का बगीचा तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनका यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गया है।
दलबीर सिंह के पास गांव में पर्याप्त कृषि भूमि है। शिक्षक होने के कारण वे खेती को पूरा समय नहीं दे पाते थे। इसी दौरान उन्होंने यूट्यूब पर अमरूद की उन्नत खेती और उससे होने वाली आय से जुड़े वीडियो देखे। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की एक नर्सरी से तीन किस्मों के 250 अमरूद के पौधे तथा अन्य फल और फूलों के पौधे मंगवाए।
विज्ञापन
करीब चार से पांच बीघा भूमि पर उन्होंने अमरूद का बगीचा विकसित किया। अब पौधे अच्छी तरह फल देने लगे हैं और बाजार में उनके अमरूद को बेहतर कीमत मिल रही है। कई पौधों पर लगने वाले अमरूद का वजन एक किलोग्राम से भी अधिक पहुंच जाता है। अमरूद के अलावा उन्होंने अन्य फलों, फूलों और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की भी खेती की है।
विज्ञापन
दलबीर ने बताया कि उनके परिवार के सभी सदस्य बागवानी के कार्य में सहयोग करते हैं। शुरुआत में उन्होंने गांव के दो लोगों को भी रोजगार दिया, जिन्होंने लंबे समय तक उनके साथ काम किया। उनका बगीचा अब आसपास के किसानों के लिए सीखने का केंद्र बन गया है। दूर-दूर से लोग बगीचा देखने और उत्पादन की तकनीक जानने पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बगीचा तैयार करने की शुरुआती जानकारी उन्हें यूट्यूब से मिली, जबकि बाद में उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी समय-समय पर मार्गदर्शन किया। आज अमरूद के पौधे भरपूर उत्पादन दे रहे हैं और अब तक वह अमरूद बेचकर करीब डेढ़ लाख रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन के साथ किसान कम भूमि पर भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं।

भूड़ गांव में जेबीटी शिक्षक दलबीर सिंह द्वारा लगाया अमरूद का बगीचा। संवाद