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Sirmour News: जिस स्कूल से पढ़े थे हिमाचल निर्माता, वहां स्टाफ को तरस रहे नौनिहाल
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां का भवन। संवाद
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अभियान: शिक्षा का सच-6
सचित्र--
शिक्षक न होने से बच्चों ने नहीं लिया दाखिला, वर्तमान सरकार ने बंद कर दी कक्षाएं
देवराज शर्मा
सराहां (सिरमौर)। सरकारें बदलती हैं, नारे बदलते हैं, लेकिन हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार के अपने गृह जिले सिरमौर के स्कूलों की तकदीर नहीं बदलती। पच्छाद विधानसभा क्षेत्र का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां इसका सबसे जीता-जागता और दर्दनाक उदाहरण है।
जिस ऐतिहासिक स्कूल से डॉ. परमार ने अक्षरों का ज्ञान लेकर आधुनिक हिमाचल की नींव रखी थी, आज वही स्कूल खुद अपने वजूद के लिए गिड़गिड़ा रहा है। स्कूल में शिक्षकों और स्टाफ के 10 पद खाली पड़े हैं, जिसने यहां की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से वेंटिलेटर पर ला दिया है।
इस स्कूल के साथ राजनीति और प्रशासनिक नाकामी का खेल भी निराला रहा। पूर्व भाजपा सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए यहां नॉन-मेडिकल की कक्षाएं तो घोषित कर दीं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं भेजे। नतीजा यह हुआ कि बच्चों ने दाखिला नहीं लिया। अब वर्तमान सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने व्यवस्था सुधारने या स्टाफ भेजने के बजाय, सीधे नॉन-मेडिकल संकाय को ही बंद कर दिया।
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यानी न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। स्कूल में इस समय रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले पद खाली हैं। इनमें प्रधानाचार्य, टीजीटी मेडिकल, नॉन-मेडिकल, हिंदी, राजनीति शास्त्र, आईपी/कंप्यूटर साइंस, वरिष्ठ सहायक, जेओए और पीटीआई शामिल हैं।
पीटीए प्रधान हरिंद्र सिंह सहित ग्रामीणों रमेश दत्त, दिनेश, दीपक, राजेंद्र, शमशेर का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने कहा कि लाना बांका, डिंगर किन्नर और नेहर स्वार जैसी दूर-दराज पंचायतों के गरीब बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। स्टाफ न होने से त्रस्त होकर अब बच्चे 10 से 12 किलोमीटर दूर दूसरे स्कूलों में जाने को मजबूर हैं। हालत यह है कि अब सिर्फ 11वीं और 12वीं के आर्ट्स संकाय में महज 18-18 बच्चे ही बचे हैं।
-- -बॉक्स
छात्रा कृतिका ठाकुर ने कहा कि शिक्षक न होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्टाफ पूरा हो तो सभी विषयों की पढ़ाई अच्छे ढंग से हो सकती है।
12वीं के छात्र विशाल चौहान ने कहा कि इस बार बोर्ड की परीक्षा है, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में अच्छे अंक लाने को लेकर चिंता सता रही है।
-- -- बॉक्स
व्यवस्था संभालने का पूरा प्रयास किया जा रहा
कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुरेश शर्मा ने बताया कि 10 पद खाली होने के बावजूद व्यवस्था संभालने की पूरी कोशिश हो रही है। खाली पदों की फेहरिस्त कई बार उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।संवाद-- -- -- -- -- -- -- -
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शिक्षक न होने से बच्चों ने नहीं लिया दाखिला, वर्तमान सरकार ने बंद कर दी कक्षाएं
देवराज शर्मा
सराहां (सिरमौर)। सरकारें बदलती हैं, नारे बदलते हैं, लेकिन हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार के अपने गृह जिले सिरमौर के स्कूलों की तकदीर नहीं बदलती। पच्छाद विधानसभा क्षेत्र का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां इसका सबसे जीता-जागता और दर्दनाक उदाहरण है।
जिस ऐतिहासिक स्कूल से डॉ. परमार ने अक्षरों का ज्ञान लेकर आधुनिक हिमाचल की नींव रखी थी, आज वही स्कूल खुद अपने वजूद के लिए गिड़गिड़ा रहा है। स्कूल में शिक्षकों और स्टाफ के 10 पद खाली पड़े हैं, जिसने यहां की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से वेंटिलेटर पर ला दिया है।
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इस स्कूल के साथ राजनीति और प्रशासनिक नाकामी का खेल भी निराला रहा। पूर्व भाजपा सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए यहां नॉन-मेडिकल की कक्षाएं तो घोषित कर दीं, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं भेजे। नतीजा यह हुआ कि बच्चों ने दाखिला नहीं लिया। अब वर्तमान सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने व्यवस्था सुधारने या स्टाफ भेजने के बजाय, सीधे नॉन-मेडिकल संकाय को ही बंद कर दिया।
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यानी न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। स्कूल में इस समय रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले पद खाली हैं। इनमें प्रधानाचार्य, टीजीटी मेडिकल, नॉन-मेडिकल, हिंदी, राजनीति शास्त्र, आईपी/कंप्यूटर साइंस, वरिष्ठ सहायक, जेओए और पीटीआई शामिल हैं।
पीटीए प्रधान हरिंद्र सिंह सहित ग्रामीणों रमेश दत्त, दिनेश, दीपक, राजेंद्र, शमशेर का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने कहा कि लाना बांका, डिंगर किन्नर और नेहर स्वार जैसी दूर-दराज पंचायतों के गरीब बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। स्टाफ न होने से त्रस्त होकर अब बच्चे 10 से 12 किलोमीटर दूर दूसरे स्कूलों में जाने को मजबूर हैं। हालत यह है कि अब सिर्फ 11वीं और 12वीं के आर्ट्स संकाय में महज 18-18 बच्चे ही बचे हैं।
छात्रा कृतिका ठाकुर ने कहा कि शिक्षक न होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्टाफ पूरा हो तो सभी विषयों की पढ़ाई अच्छे ढंग से हो सकती है।
12वीं के छात्र विशाल चौहान ने कहा कि इस बार बोर्ड की परीक्षा है, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में अच्छे अंक लाने को लेकर चिंता सता रही है।
व्यवस्था संभालने का पूरा प्रयास किया जा रहा
कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुरेश शर्मा ने बताया कि 10 पद खाली होने के बावजूद व्यवस्था संभालने की पूरी कोशिश हो रही है। खाली पदों की फेहरिस्त कई बार उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।संवाद

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां का भवन। संवाद

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां का भवन। संवाद

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां का भवन। संवाद

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाहां का भवन। संवाद