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Sirmour News: ताले में बंद मेडिकल कॉलेज का रेडियोलॉजी विभाग, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सेवाएं ठप
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-सेवानिवृत्ति, पदोन्नति और इस्तीफे से विभाग में विशेषज्ञ स्टाफ शून्य, चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था
-सरकारी इलाज के भरोसे आए मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही निजी क्लीनिकों की फीस
-सिरमौर जिला के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जरूरी स्वास्थ्य सुविधा हुई बंद
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन का रेडियोलॉजी विभाग सरकार और स्वास्थ्य विभाग की उदासीन कार्यशैली का शिकार हो गया है। विभाग में विशेषज्ञ स्टाफ शून्य हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सेवाएं ठप हैं। हालात ऐसे हैं कि सरकारी सुविधा के भरोसे अस्पताल आने वाले मरीजों को अब निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में महंगों दामों पर लुटना पड़ रहा है।
दरअसल, रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी समेत तीन विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं दे रहे थे। 31 जुलाई को एचओडी सेवानिवृत्त हो गए हैं। इसके अलावा एक चिकित्सक को पदोन्नति के बाद तबादला हो गया है। वहीं, तीसरे ने इस्तीफा कर दिया। ऐसे में विभाग में ताला लग गया है। अब विभाग में केवल एक्सरे सुविधा ही मिल रही है।
शनिवार को अस्पताल में कोई अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन नहीं हो पाया। हालांकि यहां रेडियोग्राफर तैनात हैं, लेकिन रिपोर्ट अवलोकन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सुविधा बंद कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस बारे में समय रहते सरकार और विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। बावजूद इसके कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
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मेडिकल कॉलेज में पहले सामान्य मरीजों का अल्ट्रासाउंड करीब 200 रुपये में उपलब्ध था, जबकि गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा निशुल्क थी। वहीं सीटी स्कैन की जांच 850 से 1300 रुपये के बीच हो जाती थी। अब इन सभी मरीजों को निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का रुख करना पड़ेगा, जहां उन्हें कई गुना अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी है। बाजार में अल्ट्रासाउंड के 500 से 800 तक चार्ज किए जा रहे हैं। इसके अलावा इससे महंगे अल्ट्रासाउंड भी हैं।
मेडिकल कॉलेज सिरमौर जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, जहां प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में गंभीर मरीज और सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को भी यहां लाया जाता है। ऐसे मामलों में अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जांच तत्काल आवश्यक होती हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण इन मरीजों के उपचार में तीमारदारों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लो ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सेवाएं बंद हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार और स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी, जिसके बाद यह सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी।
संवाद-- -- -- -- -- --
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-सरकारी इलाज के भरोसे आए मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही निजी क्लीनिकों की फीस
-सिरमौर जिला के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जरूरी स्वास्थ्य सुविधा हुई बंद
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन का रेडियोलॉजी विभाग सरकार और स्वास्थ्य विभाग की उदासीन कार्यशैली का शिकार हो गया है। विभाग में विशेषज्ञ स्टाफ शून्य हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सेवाएं ठप हैं। हालात ऐसे हैं कि सरकारी सुविधा के भरोसे अस्पताल आने वाले मरीजों को अब निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में महंगों दामों पर लुटना पड़ रहा है।
दरअसल, रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी समेत तीन विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं दे रहे थे। 31 जुलाई को एचओडी सेवानिवृत्त हो गए हैं। इसके अलावा एक चिकित्सक को पदोन्नति के बाद तबादला हो गया है। वहीं, तीसरे ने इस्तीफा कर दिया। ऐसे में विभाग में ताला लग गया है। अब विभाग में केवल एक्सरे सुविधा ही मिल रही है।
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शनिवार को अस्पताल में कोई अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन नहीं हो पाया। हालांकि यहां रेडियोग्राफर तैनात हैं, लेकिन रिपोर्ट अवलोकन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सुविधा बंद कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस बारे में समय रहते सरकार और विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। बावजूद इसके कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
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मेडिकल कॉलेज में पहले सामान्य मरीजों का अल्ट्रासाउंड करीब 200 रुपये में उपलब्ध था, जबकि गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा निशुल्क थी। वहीं सीटी स्कैन की जांच 850 से 1300 रुपये के बीच हो जाती थी। अब इन सभी मरीजों को निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का रुख करना पड़ेगा, जहां उन्हें कई गुना अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी है। बाजार में अल्ट्रासाउंड के 500 से 800 तक चार्ज किए जा रहे हैं। इसके अलावा इससे महंगे अल्ट्रासाउंड भी हैं।
मेडिकल कॉलेज सिरमौर जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, जहां प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में गंभीर मरीज और सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को भी यहां लाया जाता है। ऐसे मामलों में अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जांच तत्काल आवश्यक होती हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण इन मरीजों के उपचार में तीमारदारों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लो ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन सेवाएं बंद हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार और स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी, जिसके बाद यह सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी।
संवाद