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Sirmour News: जिले में 29 से शुरू होगा एचपीवी वैक्सीन अभियान
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14 और 15 वर्ष की आयु की किशोरियों को लगेगा टीका
सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर विभाग ने शुरू की मुहिम
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह अभियान 29 मार्च से शुरू होगा। इसके तहत 14 और 15 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियों को टीका लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के 19 कोल्ड चेन स्थल निर्धारित किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से मेडिकल कॉलेज नाहन, सिविल अस्पताल पांवटा, शिलाई, राजगढ़, ददाहू, सराहां के अलावा पीएचसी और सीएचससी शामिल हैं। अधिकतर स्थलों पर वैक्सीन भिजवा दी गई है। विभाग ने कुल जनसंख्या के लगभग एक फीसदी चयनित आबादी को इस अभियान के तहत कवर करने का लक्ष्य रखा है।
विभाग के अनुसार अब तक करीब 3500 बालिकाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। शुरुआती चरण में चयनित किशोरियों को प्रत्येक रविवार को टीका लगाया जाएगा। खास बात यह है कि बाजार से करीब 11 हजार रुपये में मिलने वाला एचपीवी टीका अब अस्पतालों में निशुल्क लगाया जाएगा। इससे पहले सर्वाइकल कैंसर के लिए सरकारी स्तर पर दवाएं ही दी जाती थीं।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद ने बताया कि अभियान को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी 14-15 वर्ष की बेटियों का टीकाकरण अवश्य करवाएं, ताकि उन्हें भविष्य में होने वाले गंभीर रोगों से बचाया जा सके। टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को एचपीवी वैक्सीन के महत्व और इसके लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
-- -इनसेट-1
क्या है एचपीवी वैक्सीन
एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षित और प्रभावी टीका है, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संक्रमण से बचाता है। यह वायरस महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) का मुख्य कारण माना जाता है। इसके अलावा यह महिलाओं में जननांगों के मस्सों और अन्य कैंसर से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
-- -इनसेट-2
वैक्सीन की खास बातें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह टीका कैंसर पैदा करने वाले एचपीवी वायरस के प्रमुख प्रकारों से करीब 99 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। यह शरीर में एंटीबॉडी बनाकर वायरस को कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकता है। सामान्यत: 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लगाया जाता है। टीका लगने के बाद हल्का दर्द, सूजन, लालिमा या चक्कर आना जैसे मामूली और अस्थायी दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर विभाग ने शुरू की मुहिम
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह अभियान 29 मार्च से शुरू होगा। इसके तहत 14 और 15 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियों को टीका लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के 19 कोल्ड चेन स्थल निर्धारित किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से मेडिकल कॉलेज नाहन, सिविल अस्पताल पांवटा, शिलाई, राजगढ़, ददाहू, सराहां के अलावा पीएचसी और सीएचससी शामिल हैं। अधिकतर स्थलों पर वैक्सीन भिजवा दी गई है। विभाग ने कुल जनसंख्या के लगभग एक फीसदी चयनित आबादी को इस अभियान के तहत कवर करने का लक्ष्य रखा है।
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विभाग के अनुसार अब तक करीब 3500 बालिकाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। शुरुआती चरण में चयनित किशोरियों को प्रत्येक रविवार को टीका लगाया जाएगा। खास बात यह है कि बाजार से करीब 11 हजार रुपये में मिलने वाला एचपीवी टीका अब अस्पतालों में निशुल्क लगाया जाएगा। इससे पहले सर्वाइकल कैंसर के लिए सरकारी स्तर पर दवाएं ही दी जाती थीं।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद ने बताया कि अभियान को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी 14-15 वर्ष की बेटियों का टीकाकरण अवश्य करवाएं, ताकि उन्हें भविष्य में होने वाले गंभीर रोगों से बचाया जा सके। टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को एचपीवी वैक्सीन के महत्व और इसके लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
क्या है एचपीवी वैक्सीन
एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षित और प्रभावी टीका है, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संक्रमण से बचाता है। यह वायरस महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुंह का कैंसर) का मुख्य कारण माना जाता है। इसके अलावा यह महिलाओं में जननांगों के मस्सों और अन्य कैंसर से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
वैक्सीन की खास बातें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह टीका कैंसर पैदा करने वाले एचपीवी वायरस के प्रमुख प्रकारों से करीब 99 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। यह शरीर में एंटीबॉडी बनाकर वायरस को कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकता है। सामान्यत: 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लगाया जाता है। टीका लगने के बाद हल्का दर्द, सूजन, लालिमा या चक्कर आना जैसे मामूली और अस्थायी दुष्प्रभाव हो सकते हैं।