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Sirmour News: बारिश से निखरा रेणुका झील का रूप, डेढ़ फीट बढ़ा जलस्तर
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रेणुका जी में जलस्तर में इजाफा होने के बाद रेणुका झील। संवाद
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सचित्र--
-झील के प्राकृतिक जलस्रोत फूटे, परशुराम ताल भी हुआ लबालब
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश की एकमात्र मानवाकार प्राकृतिक झील रेणुका इन दिनों अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई दे रही है। लगातार हो रही बारिश के बाद झील पानी से लबालब हो गई है। इससे झील के प्राकृतिक सौंदर्य में निखार आया है और यहां पहुंचने वाले पर्यटक भी मनमोहक नजारे को देखकर रोमांचित हो रहे हैं।
भारी वर्षा के कारण रेणुका झील के अंदरूनी चश्मों और प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी फूटना शुरू हो गया है। इससे झील के जलस्तर में करीब डेढ़ फीट तक की बढ़ोतरी हुई है। झील का पानी स्नान घाट की अंतिम पौड़ी तक पहुंच गया है। इस कारण झील में पलने वाली मछलियां भी अंतिम पौड़ी के आसपास पहुंचकर अठखेलियां करती नजर आ रही हैं।
झील के साथ सटा परशुराम ताल भी पानी से लबालब होकर अपनी अनुपम छटा बिखेर रहा है। वहीं, रेणुका विकास बोर्ड की ओर से स्नान घाटों की दशा सुधारने के लिए किए गए कार्यों से भी झील के सौंदर्य में निखार आया है।
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रेणुका विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भरत सिंह ठाकुर ने बताया कि बारिश के चलते रेणुका झील के जलस्तर में करीब एक से डेढ़ फीट तक इजाफा हुआ है। झील से पानी के निकास वाले सभी मार्ग खुले रखे गए हैं, ताकि जलस्तर नियंत्रित रहे और अत्यधिक जलभराव के कारण किसी तरह का खतरा उत्पन्न न हो।
इनसेट-
सेवा श्रमदान का भी दिखा असर
रेणुकाजी सेवा समिति की ओर से पिछले दो वर्षों से झील की स्वच्छता और प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए किए जा रहे सेवा श्रमदान का असर भी अब साफ दिखाई दे रहा है। समिति की ओर से झील के जिन हिस्सों से गाद, खरपतवार, घास और सरकंडे आदि हटाए गए हैं, वे स्थान बारिश के बाद पानी से पूरी तरह भर गए हैं। समिति के सदस्य लगातार श्रमदान कर झील के विभिन्न हिस्सों से गाद और वनस्पति हटाने में जुटे हैं।
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-झील के प्राकृतिक जलस्रोत फूटे, परशुराम ताल भी हुआ लबालब
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश की एकमात्र मानवाकार प्राकृतिक झील रेणुका इन दिनों अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई दे रही है। लगातार हो रही बारिश के बाद झील पानी से लबालब हो गई है। इससे झील के प्राकृतिक सौंदर्य में निखार आया है और यहां पहुंचने वाले पर्यटक भी मनमोहक नजारे को देखकर रोमांचित हो रहे हैं।
भारी वर्षा के कारण रेणुका झील के अंदरूनी चश्मों और प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी फूटना शुरू हो गया है। इससे झील के जलस्तर में करीब डेढ़ फीट तक की बढ़ोतरी हुई है। झील का पानी स्नान घाट की अंतिम पौड़ी तक पहुंच गया है। इस कारण झील में पलने वाली मछलियां भी अंतिम पौड़ी के आसपास पहुंचकर अठखेलियां करती नजर आ रही हैं।
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झील के साथ सटा परशुराम ताल भी पानी से लबालब होकर अपनी अनुपम छटा बिखेर रहा है। वहीं, रेणुका विकास बोर्ड की ओर से स्नान घाटों की दशा सुधारने के लिए किए गए कार्यों से भी झील के सौंदर्य में निखार आया है।
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रेणुका विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भरत सिंह ठाकुर ने बताया कि बारिश के चलते रेणुका झील के जलस्तर में करीब एक से डेढ़ फीट तक इजाफा हुआ है। झील से पानी के निकास वाले सभी मार्ग खुले रखे गए हैं, ताकि जलस्तर नियंत्रित रहे और अत्यधिक जलभराव के कारण किसी तरह का खतरा उत्पन्न न हो।
इनसेट-
सेवा श्रमदान का भी दिखा असर
रेणुकाजी सेवा समिति की ओर से पिछले दो वर्षों से झील की स्वच्छता और प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए किए जा रहे सेवा श्रमदान का असर भी अब साफ दिखाई दे रहा है। समिति की ओर से झील के जिन हिस्सों से गाद, खरपतवार, घास और सरकंडे आदि हटाए गए हैं, वे स्थान बारिश के बाद पानी से पूरी तरह भर गए हैं। समिति के सदस्य लगातार श्रमदान कर झील के विभिन्न हिस्सों से गाद और वनस्पति हटाने में जुटे हैं।