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Solan News: दवा कंपनी पर 3.80 लाख रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की सिफारिश
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झाड़माजरी की एक दवा कंपनी पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र झाड़माजरी की एक दवा कंपनी के खिलाफ प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के मामले में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायत के आधार पर की गई जांच के बाद बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने कंपनी पर 3,80,625 रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की सिफारिश सदस्य सचिव को भेजी है।
चार जुलाई को बोर्ड के अधिकारियों ने कंपनी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं पाई गईं। 6 जुलाई को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने 8 जुलाई को नोटिस का जवाब दिया, लेकिन 13 जुलाई को दोबारा हुए निरीक्षण में पाया गया कि अधिकांश निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। इसके चलते बोर्ड ने 14 जुलाई को दूसरा कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 17 जुलाई को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसके बाद 18 जुलाई को हुई तीसरी जांच में बोर्ड अधिकारियों ने पाया कि कंपनी ने नोटिसों में दिए गए निर्देशों का पालन कर लिया है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कंपनी ने इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट को सही ढंग से संचालित करना शुरू कर दिया है, अवैध बाईपास लाइन हटा दी गई है और कंसेंट टू एस्टैब्लिश (विस्तार) और हैजार्डस वेस्ट ऑथराइजेशन के लिए भी आवेदन कर दिया है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कंपनी 4 से 18 जुलाई तक प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन करती रही। इसलिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों और पॉल्यूटर पे सिद्धांत के तहत कंपनी पर 3,80,625 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की अनुशंसा की गई है। उधर, लोगों का कहना है कि इस कंपनी के खिलाफ केवल जुर्माना नहीं बल्कि इसका बिजली का कनेक्शन भी काटा जाना चाहिए।
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उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता अतुल परमार ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों की ओर से पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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झाड़माजरी की एक दवा कंपनी पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र झाड़माजरी की एक दवा कंपनी के खिलाफ प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के मामले में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायत के आधार पर की गई जांच के बाद बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने कंपनी पर 3,80,625 रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की सिफारिश सदस्य सचिव को भेजी है।
चार जुलाई को बोर्ड के अधिकारियों ने कंपनी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं पाई गईं। 6 जुलाई को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने 8 जुलाई को नोटिस का जवाब दिया, लेकिन 13 जुलाई को दोबारा हुए निरीक्षण में पाया गया कि अधिकांश निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। इसके चलते बोर्ड ने 14 जुलाई को दूसरा कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 17 जुलाई को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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इसके बाद 18 जुलाई को हुई तीसरी जांच में बोर्ड अधिकारियों ने पाया कि कंपनी ने नोटिसों में दिए गए निर्देशों का पालन कर लिया है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कंपनी ने इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट को सही ढंग से संचालित करना शुरू कर दिया है, अवैध बाईपास लाइन हटा दी गई है और कंसेंट टू एस्टैब्लिश (विस्तार) और हैजार्डस वेस्ट ऑथराइजेशन के लिए भी आवेदन कर दिया है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कंपनी 4 से 18 जुलाई तक प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन करती रही। इसलिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों और पॉल्यूटर पे सिद्धांत के तहत कंपनी पर 3,80,625 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की अनुशंसा की गई है। उधर, लोगों का कहना है कि इस कंपनी के खिलाफ केवल जुर्माना नहीं बल्कि इसका बिजली का कनेक्शन भी काटा जाना चाहिए।
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उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता अतुल परमार ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों की ओर से पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।