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युद्ध का दंश: पश्चिम एशिया में युद्ध का हिमाचल के एमएसएमई पर भी असर, कई उद्योग बंद होने के कगार पर

संवाद न्यूज एजेंसी, बरोटीवाला ( सोलन)। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 20 Mar 2026 10:45 AM IST
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सार

ईरान और अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद पश्चिम एशिया में पिछले कई दिनों से भीषण युद्ध जारी है। ऐसे में हिमाचल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों में संकट आना शुरू हो गया है। पढ़ें पूरी खबर...

Conflict in West Asia Impacts Himachal MSMEs Several Industries on the Brink of Closure
केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती जा रही है। ऐसे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों में संकट आना शुरू हो गया है। कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी के कारण और कृत्रिम कमी होने से कई उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। हालात ये हैं कि पैरासिटामोल एपीआई की कीमत 250 रुपये से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इससे दवाओं की कीमतों में भी वृद्धि हो जाएगी। इस स्थिति को देखते हुए अब औद्योगिक मालिकों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को ज्ञापन भी भेजा है। 

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ज्ञापन में गंभीर संकट उद्योगों पर होने की बात कही है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसा ही चलता रहा तो उद्योग मजबूरी में बंद हो जाएंगे। इससे न केवल उद्योगों को हानि होगी बल्कि कार्यरत कर्मी भी बेरोजगार हो जाएंगे। हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि पत्र में कहा है कि कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित 200-300% तक वृद्धि से उद्योग अस्तित्व के संकट में आ गया है। एपीआई, सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में पिछले 15 दिनों में भारी उछाल आया है। एल्यूमिनियम, पीवीसी और ग्लास बोतलों की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं।

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उत्पादन और घरेलू आपूर्ति दोनों प्रभावित 
एचडीएमए का कहना है कि पैकेजिंग लागत बढ़ने से प्रोडक्शन कांट्रैक्ट्स गैर-लाभकारी हो गए हैं। दवाइयों की सप्लाई प्रभावित होने, सरकारी टेंडर डिफॉल्ट और रोजगार पर संकट का खतरा बढ़ रहा है। एचपीजी की कमी से औद्योगिक उत्पादन और घरेलू आपूर्ति दोनों प्रभावित हो रही हैं, जिससे मजदूरों का पलायन भी बढ़ सकता है। मांग की गई है कि  प्रमुख एपीआई, सॉल्वेंट्स, एक्सिपिएंट्स और पैकेजिंग सामग्री पर मूल्य नियंत्रण किया जाए। साथ ही ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती की जाए।
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