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Solan News: प्राकृतिक खेती से तैयार होंगे बगीचे, 12 से मिलेगी प्रशिक्षण
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सोलन केवीके ने तैयार किए है सेब, कीवी, आड़ू और प्लम के चार प्राकृतिक प्रदर्शन बगीचे
रसायनों के बिना फल उगाने के सिखाए जाएंगे गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश के किसान-बागवान अब रसायनों को छोड़ प्राकृतिक खेती के जरिये मुनाफे की फसल तैयार करेंगे। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सोलन में आगामी 12 जनवरी से पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में सोलन और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं व बागवानों को प्राकृतिक खेती से बाग तैयार करने की बारिकियां सिखाई जाएंगी। केवीके सोलन ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अपने परिसर में सेब, कीवी, आड़ू और प्लम के चार शानदार प्रदर्शन बगीचे तैयार किए हैं। पिछले चार वर्षों से इन बगीचों पर लगातार अनुसंधान किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान बागवानों को इन बगीचों का भ्रमण करवाया जाएगा और प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) रूप से खेती के तरीके समझाए जाएंगे। केंद्र में तैयार किए गए इन बगीचों में घास का आच्छादन (मल्चिंग) किया गया है, जो पौधों के आसपास नमी बनाए रखने के साथ-साथ मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है। इसके अलावा, सिंचाई के लिए पौधों के तनों के पास सीधी नालियां न बनाकर, उनसे थोड़ी दूरी पर नालियां बनाई गई हैं, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है।
खाली जगह में उगा रहे नकदी फसलें
बगीचों में पौधों के बीच की खाली जमीन का भी वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया गया है। यहां मटर, धनिया, मेथी और जौ जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। फलीदार फसलों के प्रयोग से पौधों को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन मिल रही है, जिससे अतिरिक्त खाद डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
कोट
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हमने सेब, कीवी और आड़ू के प्रदर्शन बगीचे तैयार किए हैं। इनमें बिना किसी रसायन के सफल खेती की जा रही है। 12 जनवरी से शुरू होने वाले शिविर में बागवानों को इसका प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अपनी आय बढ़ा सकें।
-डॉ. अमित विक्रम, प्रभारी, केवीके,सोलन
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रसायनों के बिना फल उगाने के सिखाए जाएंगे गुर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश के किसान-बागवान अब रसायनों को छोड़ प्राकृतिक खेती के जरिये मुनाफे की फसल तैयार करेंगे। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सोलन में आगामी 12 जनवरी से पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में सोलन और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं व बागवानों को प्राकृतिक खेती से बाग तैयार करने की बारिकियां सिखाई जाएंगी। केवीके सोलन ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अपने परिसर में सेब, कीवी, आड़ू और प्लम के चार शानदार प्रदर्शन बगीचे तैयार किए हैं। पिछले चार वर्षों से इन बगीचों पर लगातार अनुसंधान किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान बागवानों को इन बगीचों का भ्रमण करवाया जाएगा और प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) रूप से खेती के तरीके समझाए जाएंगे। केंद्र में तैयार किए गए इन बगीचों में घास का आच्छादन (मल्चिंग) किया गया है, जो पौधों के आसपास नमी बनाए रखने के साथ-साथ मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है। इसके अलावा, सिंचाई के लिए पौधों के तनों के पास सीधी नालियां न बनाकर, उनसे थोड़ी दूरी पर नालियां बनाई गई हैं, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है।
खाली जगह में उगा रहे नकदी फसलें
बगीचों में पौधों के बीच की खाली जमीन का भी वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया गया है। यहां मटर, धनिया, मेथी और जौ जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। फलीदार फसलों के प्रयोग से पौधों को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन मिल रही है, जिससे अतिरिक्त खाद डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हमने सेब, कीवी और आड़ू के प्रदर्शन बगीचे तैयार किए हैं। इनमें बिना किसी रसायन के सफल खेती की जा रही है। 12 जनवरी से शुरू होने वाले शिविर में बागवानों को इसका प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अपनी आय बढ़ा सकें।
-डॉ. अमित विक्रम, प्रभारी, केवीके,सोलन