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Solan News: सच्चे भाव से सुदामा बनने का दिया संदेश
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मित्तियां में कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालुस्रोत:संवाद
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दुर्गा माता मंदिर मितियां में चल रही भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़/रामशहर(सोलन)। दुर्गा माता मंदिर मितियां में श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी हरिचेतनानंद ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सुदामा होना आसान नहीं है, लेकिन यदि कोई सच्चे भाव से सुदामा बन जाए तो ईश्वर स्वयं उसके चरण धोते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा गरीब थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। भागवत में उन्हें दरिद्र नहीं कहा गया है। उनका जीवन शिक्षा और अध्यापन में व्यतीत हुआ और वे गुरुकुल में हजारों ब्रह्मचारियों को निःशुल्क शिक्षा देते थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन शिक्षा पद्धति में शुल्क लेकर शिक्षा नहीं दी जाती थी, जबकि आज की शिक्षा व्यवस्था चिंताजनक स्थिति में है और सभी को समान शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
स्वामी ने कहा कि राजा परीक्षित ने गंगा तट पर शुकदेव जी से भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन सबसे श्रेष्ठ है, क्योंकि 84 लाख योनियों में केवल मनुष्य को ही बुद्धि और दो हाथ प्राप्त हैं, जिनसे वह सत्कर्म कर सकता है और ईश्वर तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि 26 मार्च को दोपहर 12 बजे श्रीमद्भागवत पूजन के साथ राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके साथ कथा की पूर्णाहुति होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़/रामशहर(सोलन)। दुर्गा माता मंदिर मितियां में श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी हरिचेतनानंद ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सुदामा होना आसान नहीं है, लेकिन यदि कोई सच्चे भाव से सुदामा बन जाए तो ईश्वर स्वयं उसके चरण धोते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा गरीब थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। भागवत में उन्हें दरिद्र नहीं कहा गया है। उनका जीवन शिक्षा और अध्यापन में व्यतीत हुआ और वे गुरुकुल में हजारों ब्रह्मचारियों को निःशुल्क शिक्षा देते थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन शिक्षा पद्धति में शुल्क लेकर शिक्षा नहीं दी जाती थी, जबकि आज की शिक्षा व्यवस्था चिंताजनक स्थिति में है और सभी को समान शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
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स्वामी ने कहा कि राजा परीक्षित ने गंगा तट पर शुकदेव जी से भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन सबसे श्रेष्ठ है, क्योंकि 84 लाख योनियों में केवल मनुष्य को ही बुद्धि और दो हाथ प्राप्त हैं, जिनसे वह सत्कर्म कर सकता है और ईश्वर तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि 26 मार्च को दोपहर 12 बजे श्रीमद्भागवत पूजन के साथ राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके साथ कथा की पूर्णाहुति होगी।