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Solan News: फायर हाइड्रेंट की अलग पाइपलाइन योजना फाइलों में दबी
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सोलन शहर की पेयजल लाइन के भरोसे है सुरक्षा, चुनावी मुद्दा ही बन कर रह गई नगर निगम की योजना
शहर के वार्डों में स्थापित 21 फायर हाइड्रेंट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय सोलन में अग्नि सुरक्षा के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। शहर को आग की बड़ी घटनाओं से बचाने के लिए स्थापित किए गए फायर हाइड्रेंट के लिए अलग पाइपलाइन बिछाने की योजना पिछले कई वर्षों से केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि आज भी सोलन शहर के विभिन्न वार्डों में स्थापित करीब 21 फायर हाइड्रेंट मुख्य पेयजल लाइन पर निर्भर हैं, जो किसी भी बड़े आपातकाल में जान-माल के भारी नुकसान का सबब बन सकते हैं।
हर नगर निकाय और विधानसभा चुनाव में राजनेताओं की ओर से जनता से वादा किया जाता है कि अग्निशमन विभाग के लिए एक समर्पित वाटर नेटवर्क तैयार किया जाएगा, लेकिन आज तक उस पर काम नहीं हुआ। सोलन नगर परिषद के नगर निगम बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस दिशा में तेजी से काम होगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अलग लाइन न होने के कारण दमकल विभाग को पानी भरने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों और उनकी सप्लाई टाइमिंग का मोहताज रहना पड़ता है। दमकल विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती रिस्पॉन्स टाइम की होती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जब भी शहर में कहीं आग लगती है और दमकल वाहनों को पानी की जरूरत होती है, तो दमकल विभाग पहले नगर निगम को फोन पर सूचित करता है। निगम का कर्मचारी मुख्य स्टोरेज टैंक पर जाकर मैनुअल तरीके से सप्लाई खोलता है। क्योंकि लाइन पेयजल की है, इसलिए पानी सबसे पहले लोगों के घरों के निजी कनेक्शनों में भरता है। लंबी प्रतीक्षा के बाद जब प्रेशर बनता है, तब कहीं जाकर फायर हाइड्रेंट में पानी पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी कीमती समय बर्बाद हो जाता है। आग की स्थिति में एक-एक सेकंड महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यहां पानी मिलने में ही घंटों की देरी होने की संभावना बनी रहती है।
जल संकट और आपदा का खतरा
सोलन शहर पहले ही गर्मियों में जल संकट से जूझता है। यदि शहर में पेयजल की सप्लाई बंद हो जाती है या मुख्य पाइपलाइन में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो ये 21 फायर हाइड्रेंट पूरी तरह शोपीस बनकर रह जाएंगे। ऐसे में यदि कहीं आग लगती है, तो दमकल विभाग के पास शहर के भीतर पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं बचेगा। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि शहर के नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।
अलग लाइन के लिए भेजा है प्रस्ताव
गृह रक्षा 11वीं वाहिनी सोलन के आदेशक संतोष शर्मा ने मामले की गंभीरता की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि विभाग के पास वर्तमान में अपनी कोई स्वतंत्र लाइन नहीं है। दमकल गाड़ियों में पानी भरने के लिए पूरी तरह नगर निगम की पेयजल व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन को फायर हाइड्रेंट के लिए अलग से पाइपलाइन बिछाने का विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है। वर्तमान में कुछ चिह्वित जगहों पर गाड़ियों में पानी भरा जा रहा है।
पेयजल लाइनों को बदलने का चल रहा काम
नगर निगम सोलन के कनिष्ठ अभियंता प्रिंस ठाकुर ने बताया कि शहर में लगी पेयजल लाइनों को बदलने का कार्य किया जा रहा है। इस बीच हाइड्रेंटों को अलग करने का भी प्रस्ताव है। इस पर जल्द कार्य किया जाना है। वर्तमान में पेयजल लाइनों से हाइड्रेंटों को जोड़ा गया है। चिह्नित स्थानों पर लगे हाइड्रेंटों में पानी को डायरेक्ट किया गया है।
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शहर के वार्डों में स्थापित 21 फायर हाइड्रेंट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय सोलन में अग्नि सुरक्षा के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। शहर को आग की बड़ी घटनाओं से बचाने के लिए स्थापित किए गए फायर हाइड्रेंट के लिए अलग पाइपलाइन बिछाने की योजना पिछले कई वर्षों से केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि आज भी सोलन शहर के विभिन्न वार्डों में स्थापित करीब 21 फायर हाइड्रेंट मुख्य पेयजल लाइन पर निर्भर हैं, जो किसी भी बड़े आपातकाल में जान-माल के भारी नुकसान का सबब बन सकते हैं।
हर नगर निकाय और विधानसभा चुनाव में राजनेताओं की ओर से जनता से वादा किया जाता है कि अग्निशमन विभाग के लिए एक समर्पित वाटर नेटवर्क तैयार किया जाएगा, लेकिन आज तक उस पर काम नहीं हुआ। सोलन नगर परिषद के नगर निगम बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस दिशा में तेजी से काम होगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अलग लाइन न होने के कारण दमकल विभाग को पानी भरने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों और उनकी सप्लाई टाइमिंग का मोहताज रहना पड़ता है। दमकल विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती रिस्पॉन्स टाइम की होती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जब भी शहर में कहीं आग लगती है और दमकल वाहनों को पानी की जरूरत होती है, तो दमकल विभाग पहले नगर निगम को फोन पर सूचित करता है। निगम का कर्मचारी मुख्य स्टोरेज टैंक पर जाकर मैनुअल तरीके से सप्लाई खोलता है। क्योंकि लाइन पेयजल की है, इसलिए पानी सबसे पहले लोगों के घरों के निजी कनेक्शनों में भरता है। लंबी प्रतीक्षा के बाद जब प्रेशर बनता है, तब कहीं जाकर फायर हाइड्रेंट में पानी पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी कीमती समय बर्बाद हो जाता है। आग की स्थिति में एक-एक सेकंड महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यहां पानी मिलने में ही घंटों की देरी होने की संभावना बनी रहती है।
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जल संकट और आपदा का खतरा
सोलन शहर पहले ही गर्मियों में जल संकट से जूझता है। यदि शहर में पेयजल की सप्लाई बंद हो जाती है या मुख्य पाइपलाइन में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो ये 21 फायर हाइड्रेंट पूरी तरह शोपीस बनकर रह जाएंगे। ऐसे में यदि कहीं आग लगती है, तो दमकल विभाग के पास शहर के भीतर पानी का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं बचेगा। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि शहर के नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।
अलग लाइन के लिए भेजा है प्रस्ताव
गृह रक्षा 11वीं वाहिनी सोलन के आदेशक संतोष शर्मा ने मामले की गंभीरता की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि विभाग के पास वर्तमान में अपनी कोई स्वतंत्र लाइन नहीं है। दमकल गाड़ियों में पानी भरने के लिए पूरी तरह नगर निगम की पेयजल व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन को फायर हाइड्रेंट के लिए अलग से पाइपलाइन बिछाने का विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है। वर्तमान में कुछ चिह्वित जगहों पर गाड़ियों में पानी भरा जा रहा है।
पेयजल लाइनों को बदलने का चल रहा काम
नगर निगम सोलन के कनिष्ठ अभियंता प्रिंस ठाकुर ने बताया कि शहर में लगी पेयजल लाइनों को बदलने का कार्य किया जा रहा है। इस बीच हाइड्रेंटों को अलग करने का भी प्रस्ताव है। इस पर जल्द कार्य किया जाना है। वर्तमान में पेयजल लाइनों से हाइड्रेंटों को जोड़ा गया है। चिह्नित स्थानों पर लगे हाइड्रेंटों में पानी को डायरेक्ट किया गया है।
