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Solan News: सोलन के सरकारी स्कूलों में छात्र तैयार करेंगे कंपोस्ट खाद
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शिक्षा विभाग के साथ मिलकर एक निजी संस्था बच्चों को देगी प्रशिक्षण
सब्जियों के छिलकों के साथ बचे हुए खाने से तैयार होगी जैविक खाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के सरकारी स्कूलों में अब बच्चे ही कचरे को उपयोगी बना देंगे। स्कूलों में कंपोस्ट खाद तैयार करने की योजना शुरू की गई है। इससे न सिर्फ स्कूल परिसर स्वच्छ रहेगा, बल्कि बच्चों में पर्यावरण और जैविक खाद के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। जानकारी के अनुसार यह पहल जिला शिक्षा विभाग और एक निजी संस्था के सहयोग से की जा रही है। बच्चों को प्रशिक्षण के माध्यम से यह सिखाया जाएगा कि कैसे स्कूल में बिखरे पत्ते, क्यारियों, पैंसिल के अवशेष, ढींगरी मशरूम की खाद और रसोई से निकलने वाले गीले कचरे से कंपोस्ट तैयार किया जा सकता है। स्कूल में एक गड्ढा बनाकर उसमें सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना और अन्य कचरे डालकर जैविक खाद बनाई जाएगी। तैयार कंपोस्ट का उपयोग स्कूल के बगीचों में किया जाएगा। इससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और बगीचे में हरियाली बनी रहेगी। जिला विज्ञान समन्वयक अमरीष शर्मा ने बताया कि इस पहल का मकसद विद्यार्थियों को पर्यावरण प्रेमी बनाना और उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। शिक्षा विभाग और निजी संस्था मिलकर बच्चों को सूखा और गीला कचरा अलग करने और उसका सही निपटान करने की जानकारी दे रही है।
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सब्जियों के छिलकों के साथ बचे हुए खाने से तैयार होगी जैविक खाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के सरकारी स्कूलों में अब बच्चे ही कचरे को उपयोगी बना देंगे। स्कूलों में कंपोस्ट खाद तैयार करने की योजना शुरू की गई है। इससे न सिर्फ स्कूल परिसर स्वच्छ रहेगा, बल्कि बच्चों में पर्यावरण और जैविक खाद के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। जानकारी के अनुसार यह पहल जिला शिक्षा विभाग और एक निजी संस्था के सहयोग से की जा रही है। बच्चों को प्रशिक्षण के माध्यम से यह सिखाया जाएगा कि कैसे स्कूल में बिखरे पत्ते, क्यारियों, पैंसिल के अवशेष, ढींगरी मशरूम की खाद और रसोई से निकलने वाले गीले कचरे से कंपोस्ट तैयार किया जा सकता है। स्कूल में एक गड्ढा बनाकर उसमें सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना और अन्य कचरे डालकर जैविक खाद बनाई जाएगी। तैयार कंपोस्ट का उपयोग स्कूल के बगीचों में किया जाएगा। इससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और बगीचे में हरियाली बनी रहेगी। जिला विज्ञान समन्वयक अमरीष शर्मा ने बताया कि इस पहल का मकसद विद्यार्थियों को पर्यावरण प्रेमी बनाना और उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। शिक्षा विभाग और निजी संस्था मिलकर बच्चों को सूखा और गीला कचरा अलग करने और उसका सही निपटान करने की जानकारी दे रही है।