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Solan News: परीक्षित मोक्ष और सुदामा का सुनाया प्रसंग
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चायल के काली टिब्बा मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन मौजूद श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
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काली टिब्बा मंदिर में पूर्णाहूति के साथ श्रीमद्भागवत कथा को विराम
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल(सोलन)। काली टिब्बा स्थित महाकाली मंदिर में श्रीमद्भागवत सप्ताह को हवन व पूर्णाहूति के साथ विराम दिया गया। अंतिम दिन कथावाचक आचार्य चंद्र शेखर ने परीक्षित मोक्ष और सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सुदामा जैसा मित्र विरले ही होता है। दरिद्रता के बावजूद उन्होंने श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। उनकी पत्नी के आग्रह पर जब वे श्रीकृष्ण से मिलने गए, तब भी उन्होंने कुछ नहीं मांगा, जबकि श्रीकृष्ण ने बिना मांगे ही उन्हें महल, धन और वैभव दे दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता सभी के लिए प्रेरणादायक है।
आचार्य ने बताया कि श्रृंगी ऋषि के श्राप के अनुसार तक्षक नाग फूलों की माला में कीड़े के रूप में छिप गया। जैसे ही राजा परीक्षित ने माला धारण की, नाग ने उन्हें डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर श्रीश्री 1008 शंभू भारती विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ काली टिब्बा के श्री 108 जगमोहन भारती, वरिष्ठ नागरिक रूप सिंह ठाकुर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चायल(सोलन)। काली टिब्बा स्थित महाकाली मंदिर में श्रीमद्भागवत सप्ताह को हवन व पूर्णाहूति के साथ विराम दिया गया। अंतिम दिन कथावाचक आचार्य चंद्र शेखर ने परीक्षित मोक्ष और सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि सुदामा जैसा मित्र विरले ही होता है। दरिद्रता के बावजूद उन्होंने श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। उनकी पत्नी के आग्रह पर जब वे श्रीकृष्ण से मिलने गए, तब भी उन्होंने कुछ नहीं मांगा, जबकि श्रीकृष्ण ने बिना मांगे ही उन्हें महल, धन और वैभव दे दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता सभी के लिए प्रेरणादायक है।
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आचार्य ने बताया कि श्रृंगी ऋषि के श्राप के अनुसार तक्षक नाग फूलों की माला में कीड़े के रूप में छिप गया। जैसे ही राजा परीक्षित ने माला धारण की, नाग ने उन्हें डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर श्रीश्री 1008 शंभू भारती विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ काली टिब्बा के श्री 108 जगमोहन भारती, वरिष्ठ नागरिक रूप सिंह ठाकुर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।