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Solan News: जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में अब पंचकर्म के लिए नहीं रहेगी लंबी वेटिंग
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आयुष विभाग पंचकर्म थेरेपी के लिए 32 प्रशिक्षुओं को देगा ट्रेनिंग
अभी मात्र दो विशेषज्ञ होने से दी जा रही है लंबी डेट
पंचकर्म की है डिमांड, हर माह 250 से ज्यादा थेरेपी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में पंचकर्म थेरेपी की बढ़ती मांग को देखते हुए आयुष विभाग ने सोलन और नालागढ़ के आयुर्वेदिक अस्पतालों में 32 नए प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशिक्षुओं की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे पंचकर्म विशेषज्ञों की देखरेख में मरीजों की थेरेपी में सहयोग करेंगे। इससे एक ओर पंचकर्म के लिए चल रही तीन से चार दिन की वेटिंग कम होने की उम्मीद है, वहीं युवाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
जिले में सोलन और नालागढ़ में दो आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचकर्म थेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। इन अस्पतालों में हर माह करीब 250 से अधिक मरीज पंचकर्म थेरेपी के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें थेरेपी के लिए तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
एक मरीज की पंचकर्म थेरेपी में करीब 30 से 45 मिनट का समय लगता है। वर्तमान में सोलन आयुर्वेदिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 12 मरीजों को ही थेरेपी दी जा रही है। प्रशिक्षुओं के विशेषज्ञों के साथ जुड़ने के बाद थेरेपी में सहायता के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध होगा। इससे एक समय में अधिक मरीजों को सुविधा देने में मदद मिलेगी।
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क्या है पंचकर्म थेरेपी
पंचकर्म आयुर्वेद की एक उपचार पद्धति है, जिसमें शरीर की शोधन प्रक्रियाओं पर जोर दिया जाता है। इसमें मरीज को उपचार के लिए तैयार करने के दौरान स्नेहपान, बाह्य स्नेह और स्वेदन जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। इसके बाद वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी पांच प्रमुख शोधन क्रियाओं का उल्लेख आयुर्वेद में किया गया है। इन प्रक्रियाओं का प्रयोग विशेषज्ञों की देखरेख में मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
एक साल चलेगी प्रशिक्षुओं की ट्रेनिंग
आयुष विभाग की ओर से जिले के लिए 32 प्रशिक्षुओं की पोस्ट तय की गई हैं। इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। इसके बाद प्रशिक्षुओं की एक साल की ट्रेनिंग होगी। इस दौरान उन्हें पंचकर्म थेरेपी का प्रशिक्षण दिया जाएगा और वे विशेषज्ञों के साथ रहकर मरीजों को थेरेपी देने की प्रक्रिया सीखेंगे।
- डॉ. निशा वर्मा पंवर, जिला आयुष अधिकारी, आयुष विभाग सोलन
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अभी मात्र दो विशेषज्ञ होने से दी जा रही है लंबी डेट
पंचकर्म की है डिमांड, हर माह 250 से ज्यादा थेरेपी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में पंचकर्म थेरेपी की बढ़ती मांग को देखते हुए आयुष विभाग ने सोलन और नालागढ़ के आयुर्वेदिक अस्पतालों में 32 नए प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशिक्षुओं की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे पंचकर्म विशेषज्ञों की देखरेख में मरीजों की थेरेपी में सहयोग करेंगे। इससे एक ओर पंचकर्म के लिए चल रही तीन से चार दिन की वेटिंग कम होने की उम्मीद है, वहीं युवाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
जिले में सोलन और नालागढ़ में दो आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचकर्म थेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। इन अस्पतालों में हर माह करीब 250 से अधिक मरीज पंचकर्म थेरेपी के लिए पहुंच रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें थेरेपी के लिए तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
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एक मरीज की पंचकर्म थेरेपी में करीब 30 से 45 मिनट का समय लगता है। वर्तमान में सोलन आयुर्वेदिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 12 मरीजों को ही थेरेपी दी जा रही है। प्रशिक्षुओं के विशेषज्ञों के साथ जुड़ने के बाद थेरेपी में सहायता के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध होगा। इससे एक समय में अधिक मरीजों को सुविधा देने में मदद मिलेगी।
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क्या है पंचकर्म थेरेपी
पंचकर्म आयुर्वेद की एक उपचार पद्धति है, जिसमें शरीर की शोधन प्रक्रियाओं पर जोर दिया जाता है। इसमें मरीज को उपचार के लिए तैयार करने के दौरान स्नेहपान, बाह्य स्नेह और स्वेदन जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। इसके बाद वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी पांच प्रमुख शोधन क्रियाओं का उल्लेख आयुर्वेद में किया गया है। इन प्रक्रियाओं का प्रयोग विशेषज्ञों की देखरेख में मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
एक साल चलेगी प्रशिक्षुओं की ट्रेनिंग
आयुष विभाग की ओर से जिले के लिए 32 प्रशिक्षुओं की पोस्ट तय की गई हैं। इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। इसके बाद प्रशिक्षुओं की एक साल की ट्रेनिंग होगी। इस दौरान उन्हें पंचकर्म थेरेपी का प्रशिक्षण दिया जाएगा और वे विशेषज्ञों के साथ रहकर मरीजों को थेरेपी देने की प्रक्रिया सीखेंगे।
- डॉ. निशा वर्मा पंवर, जिला आयुष अधिकारी, आयुष विभाग सोलन