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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Tindi Killar Road: Danger of death at every turn; the 105 km journey is fraught with risk.

तिंदी-किलाड़ सड़क: हर मोड़ पर मौत का खतरा, 105 किमी का सफर जोखिम से भरा

Sat, 25 Jul 2026 11:09 AM IST
Krishan Singh रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 25 Jul 2026 11:09 AM IST
सार

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा दुर्गम पहाड़ों को काटकर बनाई गई यह सड़क पांगी घाटी को लाहौल और कुल्लू से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। वर्षों बाद भी इसका बड़ा हिस्सा कच्चा और बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।

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Tindi Killar Road: Danger of death at every turn; the 105 km journey is fraught with risk.
उदयपुर-पांगी मार्ग की हालत। यह मार्ग पूरी तरह से टूट चुका है। - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के संसारी-किलाड़-तिंदी-थिरोट सड़क मार्ग पर सफर करना आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा दुर्गम पहाड़ों को काटकर बनाई गई यह सड़क पांगी घाटी को लाहौल और कुल्लू से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। वर्षों बाद भी इसका बड़ा हिस्सा कच्चा और बेहद जोखिम भरा बना हुआ है। खासकर मानसून के दौरान भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा हर समय बना रहता है। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को हर पल जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है। तिंदी से किलाड़ तक इस सड़क की कुल लंबाई करीब 105 किलोमीटर है। इसमें तिंदी से पांगी सीमा तक लगभग 60 किलोमीटर और बंबल ढांक से किलाड़ तक करीब 45 किलोमीटर सड़क अब भी पूरी तरह पक्की नहीं हो पाई है। कच्चे हिस्सों में सफर के दौरान एक ओर दरकते पहाड़ों का खतरा बना रहता है, तो दूसरी ओर गहरी चंद्रभागा नदी हर समय भय पैदा करती है।

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मार्ग पर कई ऐसे संकरे मोड़ हैं, जहां दो वाहनों का एक साथ निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर सामने से वाहन आने पर एक वाहन को लंबा इंतजार करना पड़ता है। जगह-जगह ढीली चट्टानें, टूटती पहाड़ियां और गहरी खाइयां इस सफर को और अधिक खतरनाक बना देती हैं। इन दिनों बीआरओ सड़क चौड़ीकरण का कार्य कर रहा है। इसके लिए कई स्थानों पर लगातार ब्लास्टिंग की जा रही है। 
 

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स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार विस्फोटों से पहाड़ कमजोर हो रहे हैं, जिसके कारण चट्टानें और मलबा गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इलाज, शिक्षा, कारोबार और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए हजारों लोग इसी मार्ग पर निर्भर हैं। सर्दियों में भी लंबे समय तक यही सड़क घाटी का मुख्य संपर्क मार्ग बनी रहती है। शुक्रवार को गोरना के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद लोगों में दहशत और बढ़ गई है। स्थानीय निवासी मान सिंह, देवराज, पवन कुमार, दलीप सिंह, अशोक कुमार और रोहित सिंह ने सरकार, जिला प्रशासन तथा बीआरओ से मांग की है कि संवेदनशील स्थानों पर मजबूत सुरक्षा दीवारें, चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
 

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