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Una News: बड़वार पंचायत में मुश्तरका भूमि से कटे खैर के 200 पेड़
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बड़वार पंचायत के वराल गांव में खुदरो व मुस्तरका भूमि से काटे गए पेड़।संवाद
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ग्रामीणों बोले- सुनियोजित तरीके से हुई कटाई
विभागीय टीम मौके पर भेजी, पूरे मामले की गहन जांच की जा रही : आरओ
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के तहत बड़वार पंचायत के अंतर्गत आने वाले वराल गांव में खुदरो और मुश्तरका भूमि से लगभग खैर के 200 पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। ये पेड़ एक दिन में नहीं बल्कि कई दिनों से काटे जा रहे हैं। इस घटना से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कटाई सुनियोजित तरीके से की गई और इसके पीछे संबंधित विभागों की मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी कुलवंत सिंह, जगदेव चंद, देव कुमार, तरसेम चंद, केवल किशोर, भाग सिंह, कमल देव सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक भूमि पर लगे खैर के पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया, जिससे सरकारी संपत्ति और पर्यावरण दोनों को भारी क्षति हुई है। ग्रामीणों के अनुसार खैर के पेड़ बहुमूल्य माने जाते हैं और उनकी अवैध कटाई से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले ही वन विभाग और राजस्व विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी अपील की है।
कोट्स
इस संदर्भ में वन विभाग के आरओ संदीप कुमार ने बताया कि वराल गांव में खैर के पेड़ों की कटाई की सूचना विभाग को मिली है। उन्होंने कहा कि विभागीय टीम मौके पर भेज दी गई है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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विभागीय टीम मौके पर भेजी, पूरे मामले की गहन जांच की जा रही : आरओ
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के तहत बड़वार पंचायत के अंतर्गत आने वाले वराल गांव में खुदरो और मुश्तरका भूमि से लगभग खैर के 200 पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। ये पेड़ एक दिन में नहीं बल्कि कई दिनों से काटे जा रहे हैं। इस घटना से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कटाई सुनियोजित तरीके से की गई और इसके पीछे संबंधित विभागों की मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी कुलवंत सिंह, जगदेव चंद, देव कुमार, तरसेम चंद, केवल किशोर, भाग सिंह, कमल देव सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक भूमि पर लगे खैर के पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया, जिससे सरकारी संपत्ति और पर्यावरण दोनों को भारी क्षति हुई है। ग्रामीणों के अनुसार खैर के पेड़ बहुमूल्य माने जाते हैं और उनकी अवैध कटाई से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले ही वन विभाग और राजस्व विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी अपील की है।
कोट्स
इस संदर्भ में वन विभाग के आरओ संदीप कुमार ने बताया कि वराल गांव में खैर के पेड़ों की कटाई की सूचना विभाग को मिली है। उन्होंने कहा कि विभागीय टीम मौके पर भेज दी गई है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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