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सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की परीक्षा लेने का निर्णय गलत : संघ
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 24 Feb 2026 06:53 AM IST
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ऊना। हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ ऊना ने सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य परीक्षा लेने के निर्णय को गलत बताया है।
संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार के इस फैसले से वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। संघ के प्रधान रमेश कुमार मेहरा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया गया है, जिससे शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सीबीएसई स्कूलों में नियुक्ति के लिए परीक्षा लेना व्यावहारिक नहीं है। जिला एवं खंड स्तर पर कार्यरत अध्यापकों की वरिष्ठता का क्या होगा, इस बारे में भी अधिसूचना में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया है।
संघ पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि यदि अलग से परीक्षा कराई जाती है तो इसका संचालन किस प्रकार किया जाएगा, वर्तमान में कार्यरत अध्यापकों की स्थिति क्या रहेगी तथा परीक्षा में असफल रहने वाले शिक्षकों के भविष्य को लेकर क्या व्यवस्था होगी, इस संबंध में भी कोई जानकारी स्पष्ट नहीं की गई है।
संघ ने यह भी कहा कि अधिसूचना के अनुसार परीक्षा के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है लेकिन परीक्षा केंद्र कहां होंगे, इसकी भी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे और पर्याप्त अनुभव रखने वाले शिक्षकों के लिए इस प्रकार की अनिवार्यता तर्कसंगत नहीं। संघ ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा पहले से कार्यरत शिक्षकों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
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संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार के इस फैसले से वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। संघ के प्रधान रमेश कुमार मेहरा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया गया है, जिससे शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सीबीएसई स्कूलों में नियुक्ति के लिए परीक्षा लेना व्यावहारिक नहीं है। जिला एवं खंड स्तर पर कार्यरत अध्यापकों की वरिष्ठता का क्या होगा, इस बारे में भी अधिसूचना में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया है।
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संघ पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि यदि अलग से परीक्षा कराई जाती है तो इसका संचालन किस प्रकार किया जाएगा, वर्तमान में कार्यरत अध्यापकों की स्थिति क्या रहेगी तथा परीक्षा में असफल रहने वाले शिक्षकों के भविष्य को लेकर क्या व्यवस्था होगी, इस संबंध में भी कोई जानकारी स्पष्ट नहीं की गई है।
संघ ने यह भी कहा कि अधिसूचना के अनुसार परीक्षा के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है लेकिन परीक्षा केंद्र कहां होंगे, इसकी भी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे और पर्याप्त अनुभव रखने वाले शिक्षकों के लिए इस प्रकार की अनिवार्यता तर्कसंगत नहीं। संघ ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा पहले से कार्यरत शिक्षकों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।