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Una News: जातीय भेदभाव की रोकथाम पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 30 Mar 2026 05:39 PM IST
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ऊना। अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने सोमवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम और राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के तहत गठित समितियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने दोनों अधिनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में एडीसी ने जातीय भेदभाव की रोकथाम और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय और राहत प्रदान करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। बताया गया कि 28 फरवरी 2026 तक जिले में कुल 73 मामले दर्ज हैं। इनमें से 57 मामले न्यायालय में लंबित हैं, चार मामलों में फैसला हो चुका है, जबकि सात मामलों में जांच के बाद एक्ट की धाराएं हटा दी गई हैं। वहीं, पांच मामलों में अभी पुलिस जांच जारी है।
एडीसी ने बताया कि इस अधिनियम के तहत पीड़ितों को एक लाख रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की राहत राशि देने का प्रावधान है, जो चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। उन्होंने अधिकारियों को मामलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के तहत आयोजित बैठक में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के विधिक संरक्षण की समीक्षा की गई।
एडीसी ने बताया कि 18 वर्ष की आयु के बाद पात्र व्यक्तियों के लिए स्थायी या सीमित अवधि के विधिक संरक्षक नियुक्त किए जाते हैं। जिले में अब तक 113 स्थायी और 6 सीमित संरक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।
एडीसी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि दोनों अधिनियमों के प्रावधानों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए और पीड़ितों व दिव्यांगजनों को समय पर राहत व कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जाए। बैठक में डीएसपी अजय ठाकुर और जिला कल्याण अधिकारी आवास पंडित सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में एडीसी ने जातीय भेदभाव की रोकथाम और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय और राहत प्रदान करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। बताया गया कि 28 फरवरी 2026 तक जिले में कुल 73 मामले दर्ज हैं। इनमें से 57 मामले न्यायालय में लंबित हैं, चार मामलों में फैसला हो चुका है, जबकि सात मामलों में जांच के बाद एक्ट की धाराएं हटा दी गई हैं। वहीं, पांच मामलों में अभी पुलिस जांच जारी है।
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एडीसी ने बताया कि इस अधिनियम के तहत पीड़ितों को एक लाख रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की राहत राशि देने का प्रावधान है, जो चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। उन्होंने अधिकारियों को मामलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के तहत आयोजित बैठक में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के विधिक संरक्षण की समीक्षा की गई।
एडीसी ने बताया कि 18 वर्ष की आयु के बाद पात्र व्यक्तियों के लिए स्थायी या सीमित अवधि के विधिक संरक्षक नियुक्त किए जाते हैं। जिले में अब तक 113 स्थायी और 6 सीमित संरक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।
एडीसी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि दोनों अधिनियमों के प्रावधानों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए और पीड़ितों व दिव्यांगजनों को समय पर राहत व कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जाए। बैठक में डीएसपी अजय ठाकुर और जिला कल्याण अधिकारी आवास पंडित सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।