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बच्चों को संस्कारवान बनाना आवश्यक : जोशी
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ध्रुव, प्रहलाद और वामन अवतार के प्रसंगों से गूंजा दरबार
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। डेरा बाबा हरि शाह अंबोआ दरबार में गद्दीनशीन बाबा राकेश शाह के सानिध्य में चल रही श्रीमद् गोभागवत कथा का तीसरा दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कथा वाचक कृष्ण कन्हैया जोशी ने सृष्टि वर्णन, भगवान ध्रुव, भक्त प्रहलाद और वामन अवतार के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा दरबार भक्तिरस में डूब गया।
कथा वाचक ने ध्रुव और प्रह्लाद के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि भगवान की भक्ति के लिए वृद्धावस्था का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि बाल्यकाल से ही भजन-स्मरण की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज घोर कलियुग चल रहा है, इसलिए बच्चों को संस्कारवान बनाना अत्यंत आवश्यक है। झूठ, निंदा, काम और क्रोध का त्याग कर यदि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भगवान का भजन किया जाए, तो अन्य किसी उपाय की आवश्यकता नहीं रहती; स्वयं भगवान भक्त का कल्याण करते हैं। कथा वाचक ने यह भी बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ तीसरे दिन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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दौलतपुर चौक (ऊना)। डेरा बाबा हरि शाह अंबोआ दरबार में गद्दीनशीन बाबा राकेश शाह के सानिध्य में चल रही श्रीमद् गोभागवत कथा का तीसरा दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कथा वाचक कृष्ण कन्हैया जोशी ने सृष्टि वर्णन, भगवान ध्रुव, भक्त प्रहलाद और वामन अवतार के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा दरबार भक्तिरस में डूब गया।
कथा वाचक ने ध्रुव और प्रह्लाद के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि भगवान की भक्ति के लिए वृद्धावस्था का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि बाल्यकाल से ही भजन-स्मरण की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज घोर कलियुग चल रहा है, इसलिए बच्चों को संस्कारवान बनाना अत्यंत आवश्यक है। झूठ, निंदा, काम और क्रोध का त्याग कर यदि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भगवान का भजन किया जाए, तो अन्य किसी उपाय की आवश्यकता नहीं रहती
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