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Una News: मंजू ने सब्जी उत्पादन से खोला कमाई का रास्ता
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:29 AM IST
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मंजू
- फोटो : गैस एजेंसी के बाहर लगी उपभोक्ताओं की भीड़। संवाद
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गगरेट (ऊना)। विकास खंड गगरेट की ग्राम पंचायत कलोह के बंबलू गांव की महिला किसान मंजू ने मेहनत, नवाचार और हौसले के दम पर सफलता की नई मिसाल पेश की है। पॉलीहाउस गांव के रूप में पहचान बना चुके क्षेत्र में मंजू अब नगदी फसलों के रूप में सब्जी उत्पादन कर न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे रही हैं।
मंजू ने करीब 35 कनाल भूमि में लौकी, कद्दू, खीरा, तरबूज और खरबूजे की खेती कर शानदार उत्पादन हासिल किया है। अच्छी पैदावार के चलते वे प्रतिदिन 10 से 15 हजार रुपये तक की सब्जियां बेचकर मुनाफा कमा रही हैं। उनकी ताजा उपज सीधे सब्जी मंडियों तक पहुंच रही है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है।
कुछ वर्ष पहले मंजू ने बंबलू में जमीन खरीदकर पॉलीहाउस स्थापित किया था, जहां उन्होंने फूलों की खेती शुरू की। उनके फूलों की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक थी लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इस कारोबार को बड़ा झटका लगा और उन्हें तैयार फसल तक नष्ट करनी पड़ी। इसके बावजूद मंजू ने हार नहीं मानी और पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती शुरू की, जिसमें उन्हें सफलता मिली।
आगे बढ़ते हुए उन्होंने स्वां नदी क्षेत्र के राई परिवारों से प्रेरणा लेकर कद्दू, घीया, खीरा, तरबूज और खरबूजे की खेती शुरू की। पारंपरिक तकनीकों के साथ अपनी नई सोच जोड़कर उन्होंने खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया।
फल उत्पादन की भी तैयारी
मंजू ने बागवानी विभाग के मार्गदर्शन में आड़ू, अनार, प्लम और सेब के पौधों का सफल परीक्षण भी किया है। अब वे इन फलदार पौधों की व्यावसायिक खेती शुरू करने की योजना बना रही हैं। मंजू की सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीकों और नवाचार को अपनाकर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। उनकी यह पहल न केवल क्षेत्र की महिलाओं को प्रेरित कर रही है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है।
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मंजू ने करीब 35 कनाल भूमि में लौकी, कद्दू, खीरा, तरबूज और खरबूजे की खेती कर शानदार उत्पादन हासिल किया है। अच्छी पैदावार के चलते वे प्रतिदिन 10 से 15 हजार रुपये तक की सब्जियां बेचकर मुनाफा कमा रही हैं। उनकी ताजा उपज सीधे सब्जी मंडियों तक पहुंच रही है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है।
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कुछ वर्ष पहले मंजू ने बंबलू में जमीन खरीदकर पॉलीहाउस स्थापित किया था, जहां उन्होंने फूलों की खेती शुरू की। उनके फूलों की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक थी लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इस कारोबार को बड़ा झटका लगा और उन्हें तैयार फसल तक नष्ट करनी पड़ी। इसके बावजूद मंजू ने हार नहीं मानी और पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती शुरू की, जिसमें उन्हें सफलता मिली।
आगे बढ़ते हुए उन्होंने स्वां नदी क्षेत्र के राई परिवारों से प्रेरणा लेकर कद्दू, घीया, खीरा, तरबूज और खरबूजे की खेती शुरू की। पारंपरिक तकनीकों के साथ अपनी नई सोच जोड़कर उन्होंने खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया।
फल उत्पादन की भी तैयारी
मंजू ने बागवानी विभाग के मार्गदर्शन में आड़ू, अनार, प्लम और सेब के पौधों का सफल परीक्षण भी किया है। अब वे इन फलदार पौधों की व्यावसायिक खेती शुरू करने की योजना बना रही हैं। मंजू की सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीकों और नवाचार को अपनाकर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। उनकी यह पहल न केवल क्षेत्र की महिलाओं को प्रेरित कर रही है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है।