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Una News: बिजली की फिज़ूलखर्ची पर संजीदा नहीं चिकित्सा स्टाफ
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 31 Mar 2026 06:02 PM IST
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इमरजेंसी में बेड खाली पर जल रही लाइट।
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लाइव रिपोर्ट
सीएचसी बसदेहडा में इमरजेंसी, वेटिंग में कोई नहीं पर लाइट ऑन, पर्ची काउंटर का भी यही हाल
बिजली की फिज़ूलखर्ची रोकने की अपील दिखा रहे ठेंगा
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। सरकारी कार्यालयों में बिजली की फिजूलखर्ची पर नकेल कसने को लेकर राज्य सरकार ने भले ही सरकारी कर्मचारियों से अपील कर रही हो, लेकिन सरकार की उस अपील पर शायद अभी भी सरकारी कर्मचारी संजीदा नहीं हले। मंगलवार को कुछ ऐसा ही हाल पंडित रामकृष्ण मेमोरियल सीएचसी बसदेहडा में देखने को मिला। दोपहर का वक्त है, ठीक 1:48 बज रहे हैं। पर्ची खिड़की बंद है, लाइट जल रही है। इसी के बगल में डॉक्टर रूम है। कुर्सी खाली है, लाइट जल रही है। सामने ही मरीजों के बैठने के लिए एक वेटिंग हॉल है, यहां भी कोई मरीज नहीं, कुर्सियां खाली है, दो लाइटें यहां भी जल रहीं है। अस्पताल का एमरजेंसी वार्ड, जिसमें कोई मरीज नहीं है, सभी बेड खाली हैं, लेकिन यहां पर भी दो लाइटें जल रही हैं। कहीं पर तो पंखे भी खाली कुर्सियों को हवा देते हुए नजर आ रहे हैं।
देखा गया है कि अक्सर यहां दिन के वक्त भी बेवजह लाइटें जलती रहती हैं। चिकित्सा स्टाफ तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मी आ जा रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इन बेवजह जल रही लाइटें को बंद करने की जरूरत नहीं समझी। ऊपरी मंजिल पर बीएमओ कार्यालय है, जो खुला हुआ था, कुर्सी खाली थी, लेकिन अच्छी बात यह कि उनके कार्यालय की लाइटें और पंखा बंद था। ग्राउंड फ्लोर पर हालात सबसे चिंताजनक दिखे।
यहां पर बिजली की फिज़ूलखर्ची को लेकर स्थानीय स्टाफ में संजीदगी नज़र नहीं आई। एक कर्मी को पूछने पर पता चला कि यह समय लंच ब्रेक का है, इसीलिए मरीज़ भी नहीं थे और डॉक्टरों की कुर्सियां खाली थी, लेकिन पंखे और लाइटें जलते रहने से यह बड़ा सवाल तो खड़ा होता ही है कि क्या सच में स्थानीय चिकित्सा स्टाफ राज्य सरकार की बिजली की फिजूलखर्ची को लेकर की गई अपील पर संजीदा नहीं है ?
बाक्स
बिजली की फिज़ूलखर्ची न हो इस बाबत सभी कर्मियों को कहा भी गया है, लेकिन अभी भी कुछ कर्मी इस मामले में गंभीर नहीं है। कहा कि इस दिशा जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
- डाॅ. रामपाल शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी
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बिजली की फिज़ूलखर्ची रोकने की अपील दिखा रहे ठेंगा
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। सरकारी कार्यालयों में बिजली की फिजूलखर्ची पर नकेल कसने को लेकर राज्य सरकार ने भले ही सरकारी कर्मचारियों से अपील कर रही हो, लेकिन सरकार की उस अपील पर शायद अभी भी सरकारी कर्मचारी संजीदा नहीं हले। मंगलवार को कुछ ऐसा ही हाल पंडित रामकृष्ण मेमोरियल सीएचसी बसदेहडा में देखने को मिला। दोपहर का वक्त है, ठीक 1:48 बज रहे हैं। पर्ची खिड़की बंद है, लाइट जल रही है। इसी के बगल में डॉक्टर रूम है। कुर्सी खाली है, लाइट जल रही है। सामने ही मरीजों के बैठने के लिए एक वेटिंग हॉल है, यहां भी कोई मरीज नहीं, कुर्सियां खाली है, दो लाइटें यहां भी जल रहीं है। अस्पताल का एमरजेंसी वार्ड, जिसमें कोई मरीज नहीं है, सभी बेड खाली हैं, लेकिन यहां पर भी दो लाइटें जल रही हैं। कहीं पर तो पंखे भी खाली कुर्सियों को हवा देते हुए नजर आ रहे हैं।
देखा गया है कि अक्सर यहां दिन के वक्त भी बेवजह लाइटें जलती रहती हैं। चिकित्सा स्टाफ तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मी आ जा रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इन बेवजह जल रही लाइटें को बंद करने की जरूरत नहीं समझी। ऊपरी मंजिल पर बीएमओ कार्यालय है, जो खुला हुआ था, कुर्सी खाली थी, लेकिन अच्छी बात यह कि उनके कार्यालय की लाइटें और पंखा बंद था। ग्राउंड फ्लोर पर हालात सबसे चिंताजनक दिखे।
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यहां पर बिजली की फिज़ूलखर्ची को लेकर स्थानीय स्टाफ में संजीदगी नज़र नहीं आई। एक कर्मी को पूछने पर पता चला कि यह समय लंच ब्रेक का है, इसीलिए मरीज़ भी नहीं थे और डॉक्टरों की कुर्सियां खाली थी, लेकिन पंखे और लाइटें जलते रहने से यह बड़ा सवाल तो खड़ा होता ही है कि क्या सच में स्थानीय चिकित्सा स्टाफ राज्य सरकार की बिजली की फिजूलखर्ची को लेकर की गई अपील पर संजीदा नहीं है ?
बाक्स
बिजली की फिज़ूलखर्ची न हो इस बाबत सभी कर्मियों को कहा भी गया है, लेकिन अभी भी कुछ कर्मी इस मामले में गंभीर नहीं है। कहा कि इस दिशा जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
- डाॅ. रामपाल शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी

इमरजेंसी में बेड खाली पर जल रही लाइट।