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Una News: चाय मसाला बनाकर आत्मनिर्भर बनीं प्रेमलता

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Wed, 22 Apr 2026 07:54 AM IST
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Premlata became self-reliant by making tea masala
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नारी (ऊना)। जब कोई गुरु मन से सीखाने वाला हो और शिष्य भी एकाग्रचित्त होकर सीखे तो आज कुछ भी असंभव नहीं है। ऐसी ही एक मिसाल बनकर उभरी हैं, घंडावल क्षेत्र की प्रेमलता। जिन्होंने पहले स्वयं चाय मसाला बनाने का प्रशिक्षण लिया और अब आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। खास बात यह है कि घर बैठे ही प्रेमलता प्रतिमाह 15,000 रुपये की कमाई कर रही हैं।
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प्रेमलता ने देसी जड़ी-बूटियों से चाय मसाला तैयार करना सीखा। बाद में स्वयं चाय मसाला तैयार कर इसे स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेशभर में बेचना शुरू कर दिया। जड़ी-बूटियों से तैयार यह चाय मसाला लोगों को खूब पसंद आया और मांग बढ़ गई। अब वह बड़े स्तर पर चाय मसाला बेचने का काम कर रही हैं।
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कारोबार में मदद के लिए अन्य सात महिलाओं को जोड़कर प्रेमलता उन्हें भी रोजगार दे रही हैं। इन महिलाओं को 500 रुपये की मजदूरी दी जाती है। प्रेमलता ने बताया कि बसुटी, कड़ी पत्ता, बणा, गुलाब के फूल, लेमन ग्रास, अर्जुन और मोरिंगा के पत्ते और उसमें दालचीनी, छोटी इलायची, बड़ी इलायची मग, अदरक आदि डालकर पहले इनको धूप में सुखाया जाता है। सूख जाने पर ग्राइंड किया जाता है और दोबारा चार या पांच दिन की धूप लगाई जाती है। बाद में उसे बारीक ग्राइंडर में से निकाल कर पाउडर तैयार किया जाता है। तैयार हुए इस पाउडर के 50 से 250 ग्राम तक के पैकेट बनाए जाते हैं। इसमें 250 ग्राम पैकेट 150 से 200 रुपये की कीमत पर बिक रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें काफी मेहनत लगती है लेकिन स्थानीय स्तर पर इस चाय मसाले मांग भी अधिक है।

ग्रीन टी के तौर पर भी हो सकता है प्रयोग
प्रेमलता का कहना कि सुबह और शाम को तीन घंटे जंगल से जड़ी-बूटियों को इकट्ठा करके लाया जाता है और सूखने के लिए रख दिया जाता है। उन्होंने बताया कि लागत और मेहनत निकाल कर लगभग 40% लाभ हो जाता है। इससे घर का खर्च चलाना आसान हो गया है। प्रेमलता ने बता कि इस चाय मसाला को ग्रीन टी के तौर पर भी प्रयोग किया जा सकता है। यही वजह है कि ऊना सहित अन्य जिलों में भी इसकी काफी मांग है। कुछ लोग फोन कॉल करके पहले ही अपनी बुकिंग करवा लेते हैं।
वहीं मुख्य प्रशिक्षक मीना ठाकुर का कहना है कि मैं ग्रामीण रोजगार मिशन के माध्यम से कई प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हूं। कोशिश रहती है कि दूसरी महिलाओं को भी प्रशिक्षित करके आत्मनिर्भर बना सकें। जो महिलाएं घरेलू काम करती थीं, अब प्रशिक्षण लेकर अब अपना खर्च निकाल रही हैं। इससे उन्हें संतुष्टि मिलती है।
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