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Una News: किसानों को कॉफी की खेती के लिए प्रेरित कर रहे सीता राम ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 17 Mar 2026 06:27 AM IST
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अंब के तहत पंचायत ठठल के प्रगतिशील एवं अग्रणी किसान सीता राम ठाकुर ।संवाद
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बडूही (ऊना)। उपमंडल अंब के तहत पंचायत ठठल के प्रगतिशील एवं अग्रणी किसान सीता राम ठाकुर क्षेत्र में किसानों को आधुनिक व लाभकारी खेती की ओर प्रेरित कर रहे हैं। वह लोगों को निशुल्क कॉफी के पौधे वितरित कर खेती अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से हिमाचल में कॉफी, अनानास और चंदन की खेती को बढ़ावा देने और इसे अनिवार्य करने की वकालत भी की है।
सीता राम ठाकुर का कहना है कि हिमाचल प्रदेश की जलवायु कॉफी, चंदन और अनानास जैसी नकदी फसलों के लिए बेहद अनुकूल है लेकिन अभी तक इस दिशा में किसानों का रुझान अपेक्षाकृत कम है। यदि सरकार इन फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं शुरू करे तो इससे प्रदेश के किसानों और बागवानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने बताया कि यदि सरकारी भूमि के साथ-साथ निजी भूमि पर भी इन फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए तो इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि सरकार को भी करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
ठठल क्षेत्र के किसान सीता राम ठाकुर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्वयं आगे आकर कॉफी और चंदन के पौधे निशुल्क वितरित कर रहे हैं ताकि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर भी कदम बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि आज के समय में खेती से दूर हो रही युवा पीढ़ी भी कॉफी जैसी फसलों को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकती है। हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से अरेबिका किस्म की कॉफी की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
सीता राम ठाकुर के अनुसार बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना के शिवालिक क्षेत्र, जहां मध्य ऊंचाई और छायादार भूमि उपलब्ध है, कॉफी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त हैं। इन क्षेत्रों के किसान पारंपरिक खेती के स्थान पर कॉफी को एक आकर्षक और सुरक्षित नकदी फसल के रूप में अपना सकते हैं, बशर्ते सरकार इस दिशा में प्रभावी योजनाएं लागू करे।
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सीता राम ठाकुर का कहना है कि हिमाचल प्रदेश की जलवायु कॉफी, चंदन और अनानास जैसी नकदी फसलों के लिए बेहद अनुकूल है लेकिन अभी तक इस दिशा में किसानों का रुझान अपेक्षाकृत कम है। यदि सरकार इन फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं शुरू करे तो इससे प्रदेश के किसानों और बागवानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
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उन्होंने बताया कि यदि सरकारी भूमि के साथ-साथ निजी भूमि पर भी इन फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए तो इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि सरकार को भी करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
ठठल क्षेत्र के किसान सीता राम ठाकुर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्वयं आगे आकर कॉफी और चंदन के पौधे निशुल्क वितरित कर रहे हैं ताकि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर भी कदम बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि आज के समय में खेती से दूर हो रही युवा पीढ़ी भी कॉफी जैसी फसलों को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकती है। हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से अरेबिका किस्म की कॉफी की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
सीता राम ठाकुर के अनुसार बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना के शिवालिक क्षेत्र, जहां मध्य ऊंचाई और छायादार भूमि उपलब्ध है, कॉफी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त हैं। इन क्षेत्रों के किसान पारंपरिक खेती के स्थान पर कॉफी को एक आकर्षक और सुरक्षित नकदी फसल के रूप में अपना सकते हैं, बशर्ते सरकार इस दिशा में प्रभावी योजनाएं लागू करे।