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Una News: गेहूं-आलू की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 01 Apr 2026 05:49 AM IST
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खराब मौसम और बीमारियों से पैदावार प्रभावित, हजारों हेक्टेयर फसल पर खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में इस बार खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गेहूं और आलू की फसलें बरबादी की कगार पर पहुंच गई हैं, जिससे किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है। गेहूं की फसल में दाना ठीक से विकसित नहीं हो पा रहा, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है।
आलू के साथ-साथ प्याज और लहसुन की फसलों पर भी बीमारियों का प्रकोप देखा जा रहा है। इन फसलों की वृद्धि रुक गई है और किसानों द्वारा किए जा रहे दवाओं के छिड़काव का भी अपेक्षित असर नहीं हो रहा। किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम, अनियमित बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
जिले में करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की गई है, जबकि 1000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू उगाया गया है। इसके साथ ही प्याज और लहसुन की फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। किसानों के अनुसार फसल बचाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन हालात में सुधार नहीं हो रहा, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग, डॉ. प्रेम ठाकुर ने कहा कि विभाग को फसलों में बीमारी और नुकसान की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को उचित सलाह दी जा रही है। साथ ही, किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन करने और वैज्ञानिकों की सलाह पर ही दवाओं का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
गेहूं की फसल में दाना नहीं बन पाया है, जिससे उत्पादन बेहद कम रहने की आशंका है। उन्होंने बताया कि उन्होंने समय पर खाद और सिंचाई की, लेकिन मौसम की मार के आगे सब बेकार साबित हुआ। बलबीर चंद, किसान
आलू, प्याज और लहसुन की फसल पर बीमारी लग गई है। उन्होंने कई बार दवाओं का छिड़काव किया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इससे लागत भी बढ़ गई और नुकसान का खतरा और गहरा गया है। राजकुमार, किसान
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ऊना। जिले में इस बार खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गेहूं और आलू की फसलें बरबादी की कगार पर पहुंच गई हैं, जिससे किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है। गेहूं की फसल में दाना ठीक से विकसित नहीं हो पा रहा, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है।
आलू के साथ-साथ प्याज और लहसुन की फसलों पर भी बीमारियों का प्रकोप देखा जा रहा है। इन फसलों की वृद्धि रुक गई है और किसानों द्वारा किए जा रहे दवाओं के छिड़काव का भी अपेक्षित असर नहीं हो रहा। किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम, अनियमित बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
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जिले में करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती की गई है, जबकि 1000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू उगाया गया है। इसके साथ ही प्याज और लहसुन की फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। किसानों के अनुसार फसल बचाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन हालात में सुधार नहीं हो रहा, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग, डॉ. प्रेम ठाकुर ने कहा कि विभाग को फसलों में बीमारी और नुकसान की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को उचित सलाह दी जा रही है। साथ ही, किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन करने और वैज्ञानिकों की सलाह पर ही दवाओं का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
गेहूं की फसल में दाना नहीं बन पाया है, जिससे उत्पादन बेहद कम रहने की आशंका है। उन्होंने बताया कि उन्होंने समय पर खाद और सिंचाई की, लेकिन मौसम की मार के आगे सब बेकार साबित हुआ। बलबीर चंद, किसान
आलू, प्याज और लहसुन की फसल पर बीमारी लग गई है। उन्होंने कई बार दवाओं का छिड़काव किया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इससे लागत भी बढ़ गई और नुकसान का खतरा और गहरा गया है। राजकुमार, किसान