8th CPC: केंद्र के 50 लाख कर्मियों, 69 लाख पेंशनरों को DA/DR फ्रीज होने का डर, क्या पश्चिम एशिया संकट का असर?
केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर डीए/डीआर बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अप्रैल तक घोषणा नहीं हुई। कर्मचारियों को देरी और संभावित फ्रीज का डर है। महंगाई भत्ता 60% पार होने की उम्मीद है।
विस्तार
केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर, एक जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दरों में बढ़ोतरी होने की राह देख रहे हैं। अमूमन मार्च तक इन भत्तों में वृद्धि होती रही है, लेकिन इस बार अप्रैल में भी उक्त घोषणा नहीं हो सकी। केंद्रीय कर्मियों की नजर, कैबिनेट ब्रीफिंग पर रहती है। वे इसी उम्मीद में होते हैं कि इस बार तो डीए/डीआर में इजाफा होने की खुशखबरी मिलेगी। बुधवार को कैबिनेट ब्रीफिंग तो हुई, मगर महंगाई भत्ते को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी, सरकार से सवाल कर रहे हैं कि डीए/डीआर की घोषणा टलने के पीछे क्या 'पश्चिम एशिया संकट' जिम्मेदार है। सरकारी कर्मियों को अब यह डर सता रहा है कि कोरोनाकाल की तरह कहीं एक बार फिर डीए/डीआर फ्रीज तो नहीं हो जाएगा। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' ने डीए/डीआर बढ़ोतरी की घोषणा कराने के लिए बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है।
पिछली बार हुई थी तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2025 से अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद डीए/डीआर की दर 58 पर पहुंच गई थी। अब एक जनवरी 2026 से डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी होनी है। फिलहाल अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) की रिपोर्ट, डीए की दरों में दो से तीन फीसदी की वृद्धि होने के संकेत दे रही है। जुलाई 2025 में सूचकांक 146.5, अगस्त में 147.1, सितंबर में 147.3, अक्टूबर में 147.7, नवंबर में 148.2 और दिसंबर में भी 148.2 पर संकलित हुआ है। ऐसे में महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दर 60 के पार हो सकती है। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के महासचिव बीएस यादव ने कहा, अभी तक मार्च में यह घोषणा होती रही है। अप्रैल के पहले सप्ताह में तीन माह का एरियर मिल जाता था। इस बार कर्मचारियों को डर है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते कहीं केंद्र सरकार डीए/डीआर बढ़ोतरी को रोकने का मन तो नहीं बना रही।
कर्मचारियों को सता रहा यह डर
ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन एवं नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया, केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर, भत्तों में बढ़ोतरी होने का इंतजार कर रहे हैं। गत वर्षों में होली से पहले इन भत्तों में वृद्धि होती रही है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, जब इस घोषणा को करने में इतनी देर हुई हो। कर्मचारियों को यह डर सता रहा है कि सरकार, 'पश्चिम एशिया संकट' के चलते कहीं इन भत्तों को फ्रीज करने का मन तो नहीं बना रही। अगर सरकार की नीयत साफ है तो तुरंत इस बाबत स्पष्टीकरण देना चाहिए। कर्मचारियों को यह बताया जाए कि भत्तों में देरी की क्या वजह है और कब तक इनकी घोषणा संभव है।
कोरोनकाल में रोकी गई थी तीन किस्तें
केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल के दौरान जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 महीने का महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की तीन किस्तें रोक ली थी। उस वक्त सरकार ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही थी। स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सदस्य सी.श्रीकुमार का कहना है कि कोरोनाकाल में सरकार ने कर्मियों के 11 फीसदी डीए का भुगतान रोक कर 34,402.32 करोड़ रुपये बचा लिए थे। कर्मचारी संगठनों द्वारा उक्त भुगतान को लेकर सरकार के समक्ष लगातार मांग उठाई जा रही है। इस बार भी सरकार के इरादे ठीक नहीं लग रहे। सरकार को अविलंब डीए/डीआर की घोषणा करनी चाहिए।
कर्मियों को हर माह दस प्रतिशत नुकसान
डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया, डीए/डीआर की दर जब 50 फीसदी के पार हो जाती है तो नियमानुसार डीए/डीआर को मूल वेतन और पेंशन में विलय कर दिया जाता है। सरकार ने इस विलय से इनकार कर दिया है। पिछले दो साल से दस प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारियों का वेतन हड़पा जा रहा है। पेंशन भी हड़पी जा रही है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद दो साल बाद ही कर सकते हैं। ऐसे में चार साल तक कर्मियों को हर माह दस प्रतिशत वेतन का नुकसान उठाना पड़ेगा। अब सरकार कह रही है कि डीए का मूल वेतन में विलय नहीं करेंगे। सरकार, कर्मचारी को उसका आर्थिक फायदा देने से क्यों कतरा रही है।