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Air India Flight Turbulence: टर्बुलेंस की वजह तकनीकी खराबी या मौसम? भारतीय पायलट संघ ने क्या बताई वजह
Sun, 09 Aug 2026 02:45 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:45 PM IST
सार
Air India Flight Turbulence: एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में आखिर इतने तेज झटके क्यों लगे? पायलट संघ के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने इसकी वजह तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि हवा के गंभीर झटकों को बताया। वहीं, पायलट के डोप टेस्ट को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। पढ़िए रिपोर्ट-
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एयर इंडिया की उड़ान में टर्बुलेंस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
भारतीय पायलट संघ के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में आए तेज झटकों को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह इसे तकनीकी समस्या नहीं मानेंगे। उनके मुताबिक, यह गंभीर टर्बुलेंस यानी हवा में तेज झटकों की वजह से हुआ। उन्होंने कहा कि यह मौसम से जुड़ी समस्या है, तकनीकी खराबी नहीं। शुरुआत में इसे तकनीकी समस्या बताया जा रहा था। लेकिन ऐसा नहीं है। यह 100 फीसदी गंभीर टर्बुलेंस की वजह से हुआ है।
विमान में आखिर कब और कहां आए थे तेज झटके?
उन्होंने कहा, अभी न तो विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और न ही एअर इंडिया यह स्पष्ट कर रहे हैं कि विमान को गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था या नहीं। यह भी नहीं बताया गया है कि सीट बेल्ट का संकेत चालू था या नहीं और घटना किस जगह व किस समय हुई। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह घटना तब हुई, जब विमान म्यांमार के इलाके में दाखिल हुआ था। कुछ के मुताबिक, यह भारतीय सीमा में आते समय हुआ। वहीं, कुछ लोग इसे भुवनेश्वर के पास की घटना बता रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह विमान के उतरने से करीब 45 मिनट पहले नीचे आते समय हुआ।
उन्होंने कहा कि उन्हें इससे हैरानी नहीं है, क्योंकि एयरलाइन इस बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहेगी। डीजीसीए ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और एयरलाइन भी जांच करेगी। इसलिए संभव है कि एयरलाइन पूरी सच्चाई और वास्तव में क्या हुआ, इसकी जानकारी अभी सामने न रखे। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि वास्तव में क्या हुआ था।
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पायलट का डोप टेस्ट क्यों हुआ?
उन्होंने आगे कहा कि इन सबके बीच आज एक नया पहलू सामने आया है कि पायलट का डोप टेस्ट (यानी मन को प्रभावित करने वाले पदार्थों की जांच) किया गया है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में उड़ान शुरू होने से पहले ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट नहीं किया जाता। यह टेस्ट शराब की जांच के लिए होता है। आमतौर पर यह टेस्ट विमान के उतरने और गंतव्य पर पहुंचने के बाद किया जाता है।
टर्बुलेंस में केबिन क्रू क्या कर सकता है?
कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा कि कई बार केबिन क्रू भी विमान में इधर-उधर नहीं जा सकता, क्योंकि सीट बेल्ट का संकेत चालू होता है और विमान टर्बुलेंस का सामना कर रहा होता है। ऐसे में केबिन क्रू के लिए विमान के अंदर घूमकर यात्रियों की जांच करना सही नहीं होता।
तेज झटकों से विमान को कितना नुकसान हो सकता है?
उन्होंने कहा कि अगर सीट बेल्ट का संकेत चालू था और विमान को गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा, तो केबिन के अंदर विमान को नुकसान हो सकता है। केबिन में सामान वाली अलमारियां खुल सकती हैं और उनमें रखा सामान नीचे गिर सकता है। जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई हो, वे अपनी सीट से उछलकर बाहर गिर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विमान की छत और केबिन की छत को भी नुकसान पहुंच सकता है। शौचालयों की छत भी अंदर की ओर गिर सकती है। अगर उस समय ट्रॉली से खाना परोसने की सेवा चल रही हो, तो खाना पूरे केबिन में फैल सकता है। इसलिए गंभीर टर्बुलेंस का सामना करने पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
मौसम से टर्बुलेंस का पता कैसे चलता है?
उन्होंने कहा कि अगर टर्बुलेंस मौसम की वजह से हो रहा है, तो आमतौर पर पायलट को इसकी जानकारी होती है, क्योंकि वह मौसम का रडार देख रहा होता है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र: बारामती एयरपोर्ट पर प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त, टेकऑफ से पहले हुआ हादसा; क्या है वजह?
क्या पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है?
कैप्टन रंधावा ने पायलट के डोप टेस्ट को लेकर कहा कि एयरलाइन ने यह नहीं बताया है कि पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसलिए किसी भी अदालत में जब तक सबूत किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करते, तब तक यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
उन्होंने कहा कि हर एयरलाइन रोजाना हजारों ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट करती है। क्या इन सभी टेस्ट में लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं? इसका जवाब है- नहीं। सिर्फ पॉजिटिव मामलों को डीजीसीए के पास भेजा जाता है। इसी तरह हमें भी रिपोर्ट आने का इंतजार करना चाहिए।
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विमान में आखिर कब और कहां आए थे तेज झटके?
उन्होंने कहा, अभी न तो विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और न ही एअर इंडिया यह स्पष्ट कर रहे हैं कि विमान को गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था या नहीं। यह भी नहीं बताया गया है कि सीट बेल्ट का संकेत चालू था या नहीं और घटना किस जगह व किस समय हुई। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह घटना तब हुई, जब विमान म्यांमार के इलाके में दाखिल हुआ था। कुछ के मुताबिक, यह भारतीय सीमा में आते समय हुआ। वहीं, कुछ लोग इसे भुवनेश्वर के पास की घटना बता रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह विमान के उतरने से करीब 45 मिनट पहले नीचे आते समय हुआ।
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उन्होंने कहा कि उन्हें इससे हैरानी नहीं है, क्योंकि एयरलाइन इस बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहेगी। डीजीसीए ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और एयरलाइन भी जांच करेगी। इसलिए संभव है कि एयरलाइन पूरी सच्चाई और वास्तव में क्या हुआ, इसकी जानकारी अभी सामने न रखे। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि वास्तव में क्या हुआ था।
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पायलट का डोप टेस्ट क्यों हुआ?
उन्होंने आगे कहा कि इन सबके बीच आज एक नया पहलू सामने आया है कि पायलट का डोप टेस्ट (यानी मन को प्रभावित करने वाले पदार्थों की जांच) किया गया है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में उड़ान शुरू होने से पहले ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट नहीं किया जाता। यह टेस्ट शराब की जांच के लिए होता है। आमतौर पर यह टेस्ट विमान के उतरने और गंतव्य पर पहुंचने के बाद किया जाता है।
टर्बुलेंस में केबिन क्रू क्या कर सकता है?
कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा कि कई बार केबिन क्रू भी विमान में इधर-उधर नहीं जा सकता, क्योंकि सीट बेल्ट का संकेत चालू होता है और विमान टर्बुलेंस का सामना कर रहा होता है। ऐसे में केबिन क्रू के लिए विमान के अंदर घूमकर यात्रियों की जांच करना सही नहीं होता।
तेज झटकों से विमान को कितना नुकसान हो सकता है?
उन्होंने कहा कि अगर सीट बेल्ट का संकेत चालू था और विमान को गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा, तो केबिन के अंदर विमान को नुकसान हो सकता है। केबिन में सामान वाली अलमारियां खुल सकती हैं और उनमें रखा सामान नीचे गिर सकता है। जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई हो, वे अपनी सीट से उछलकर बाहर गिर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विमान की छत और केबिन की छत को भी नुकसान पहुंच सकता है। शौचालयों की छत भी अंदर की ओर गिर सकती है। अगर उस समय ट्रॉली से खाना परोसने की सेवा चल रही हो, तो खाना पूरे केबिन में फैल सकता है। इसलिए गंभीर टर्बुलेंस का सामना करने पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
मौसम से टर्बुलेंस का पता कैसे चलता है?
उन्होंने कहा कि अगर टर्बुलेंस मौसम की वजह से हो रहा है, तो आमतौर पर पायलट को इसकी जानकारी होती है, क्योंकि वह मौसम का रडार देख रहा होता है।
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क्या पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है?
कैप्टन रंधावा ने पायलट के डोप टेस्ट को लेकर कहा कि एयरलाइन ने यह नहीं बताया है कि पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसलिए किसी भी अदालत में जब तक सबूत किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करते, तब तक यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
उन्होंने कहा कि हर एयरलाइन रोजाना हजारों ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट करती है। क्या इन सभी टेस्ट में लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं? इसका जवाब है- नहीं। सिर्फ पॉजिटिव मामलों को डीजीसीए के पास भेजा जाता है। इसी तरह हमें भी रिपोर्ट आने का इंतजार करना चाहिए।