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Amar Ujala Samwad LIVE: अश्विनी कुमार चन्नन बोले- सूचना तंत्र और आत्मनिर्भरता का नया दौर है ऑपरेशन सिंदूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 18 May 2026 04:46 PM IST
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अमर उजाला संवाद में देश की बात रखेंगे तीनों सेना के शीर्ष अधिकारी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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राजधानी लखनऊ में आयोजित प्रतिष्ठित वैचारिक महाकुंभ 'अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026' में देश की सुरक्षा और समृद्धि को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण सत्र शुरू होने जा रहा है। इस सत्र का मुख्य विषय रणनीतिक शक्ति से आर्थिक समृद्धि रखा गया है। इस खास चर्चा में भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना के तीन ऐसे शीर्ष अधिकारी एक साथ मंच साझा करने जा रहे हैं, जिन्हें देश की रणनीतिक और सामरिक नीतियों को आकार देने का लंबा अनुभव है। इस सत्र में ये तीनों विशेषज्ञ इस बात पर रोशनी डालेंगे कि कैसे किसी देश की मजबूत सैन्य और रणनीतिक ताकत उसकी आर्थिक प्रगति का आधार बनती है। सुरक्षित समुद्री व्यापारिक मार्ग, मजबूत हवाई सुरक्षा और अभेद्य जमीनी सीमाएं किस तरह विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का कद बढ़ाने में मदद करती हैं, इस पर इन दिग्गजों के विचार सुनने को मिलेंगे। भारतीय सेना के पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने क्या कुछ कहा है? यहां पढ़ें...
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कौन हैं मेजर जनरल अश्वनी कुमार चन्नन ?
मेजर जनरल अश्वनी कुमार चन्नन भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट के एक अत्यंत अनुभवी अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने देश की सेवा में लगभग 38 वर्ष दिए। वे भारतीय सेना के पहले एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ आर्मी डिजाइन ब्यूरो (एडीबी) रह चुके हैं, जहां उनकी मुख्य भूमिका सेना की तकनीकी जरूरतों को घरेलू उद्योगों से जोड़कर ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करना था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में ब्रिगेड कमांडर के रूप में आतंकवाद विरोधी कई सफल अभियानों का नेतृत्व भी किया है।
रिटायर्ड विंग कमांडर डॉक्टर मनोज कुमार को जानिए
विंग कमांडर डॉक्टर मनोज कुमार भारतीय वायुसेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने सैन्य परिचालन के साथ-साथ डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर की हवाई सुरक्षा, पूर्वोत्तर में एयर डिफेंस और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला है। वे भारतीय वायुसेना के प्रमुख ‘मेहर बाबा स्वार्म ड्रोन’ कार्यक्रम के प्रमुख रहे हैं और रोबोटिक्स व एआई से जुड़े 7 से अधिक पेटेंट के सह-आविष्कारक हैं।
नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी निशांत कुमार कौन हैं?
कमोडोर निशांत कुमार भारतीय नौसेना के एक वरिष्ठ रणनीतिक विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने तीन दशक से अधिक की सेवा में समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। वे तमिलनाडु स्थित अत्यंत संवेदनशील नौसैनिक संचार केंद्र आईएनएस कट्टाबोम्मन के कमांडिंग ऑफिसर रह चुके हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ नौसेना के पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास संबंधी लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया है।
मेजर जनरल अश्वनी कुमार चन्नन भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट के एक अत्यंत अनुभवी अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने देश की सेवा में लगभग 38 वर्ष दिए। वे भारतीय सेना के पहले एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ आर्मी डिजाइन ब्यूरो (एडीबी) रह चुके हैं, जहां उनकी मुख्य भूमिका सेना की तकनीकी जरूरतों को घरेलू उद्योगों से जोड़कर ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करना था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में ब्रिगेड कमांडर के रूप में आतंकवाद विरोधी कई सफल अभियानों का नेतृत्व भी किया है।
रिटायर्ड विंग कमांडर डॉक्टर मनोज कुमार को जानिए
विंग कमांडर डॉक्टर मनोज कुमार भारतीय वायुसेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने सैन्य परिचालन के साथ-साथ डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर की हवाई सुरक्षा, पूर्वोत्तर में एयर डिफेंस और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला है। वे भारतीय वायुसेना के प्रमुख ‘मेहर बाबा स्वार्म ड्रोन’ कार्यक्रम के प्रमुख रहे हैं और रोबोटिक्स व एआई से जुड़े 7 से अधिक पेटेंट के सह-आविष्कारक हैं।
नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी निशांत कुमार कौन हैं?
कमोडोर निशांत कुमार भारतीय नौसेना के एक वरिष्ठ रणनीतिक विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने तीन दशक से अधिक की सेवा में समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। वे तमिलनाडु स्थित अत्यंत संवेदनशील नौसैनिक संचार केंद्र आईएनएस कट्टाबोम्मन के कमांडिंग ऑफिसर रह चुके हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ नौसेना के पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास संबंधी लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया है।
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चन्नन बोले- सूचना तंत्र और आत्मनिर्भरता का नया दौर है ऑपरेशन सिंदूर
चान्नन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। साल 2019 से ही भारत इस तरह की आधुनिक युद्ध नीति पर लगातार काम कर रहा है। इससे पहले हुए उरी और बालाकोट जैसे सैन्य अभियानों की सत्यता और सफलता पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। परंतु, इस बार की सैन्य कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ सबके सामने हुई है। यही कारण है कि इसका प्रभाव बहुत बड़े और व्यापक रूप में देश और दुनिया के सामने आया है।
चान्नन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। साल 2019 से ही भारत इस तरह की आधुनिक युद्ध नीति पर लगातार काम कर रहा है। इससे पहले हुए उरी और बालाकोट जैसे सैन्य अभियानों की सत्यता और सफलता पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। परंतु, इस बार की सैन्य कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ सबके सामने हुई है। यही कारण है कि इसका प्रभाव बहुत बड़े और व्यापक रूप में देश और दुनिया के सामने आया है।