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AIADMK Leader S. Semmalai Resigns: S. Semmalai Steps Down—The Impact of the Split in the AIADMK!
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AIADMK Leader S Semmalai Resigns: एस सेम्मालाई ने दिया इस्तीफा, AIADMK में टूट का असर!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 18 May 2026 04:24 PM IST
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तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है। एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता एस सेम्मालाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है। सेम्मालाई ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में संगठन की मौजूदा स्थिति पर गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त की। उनके इस कदम को एआईएडीएमके के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में पार्टी लगातार अंदरूनी असंतोष और टूट का सामना कर रही है।
अपने भावुक इस्तीफा पत्र में सेम्मालाई ने लिखा कि चुनाव के बाद पार्टी में जो घटनाक्रम हुए हैं, उन्होंने उन्हें मानसिक रूप से बेहद आहत किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एमजी रामचंद्रन द्वारा स्थापित और जे. जयललिता द्वारा मजबूत की गई पार्टी की यही नियति रह गई है। उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि कपूर तो घुल सकता है, लेकिन क्या कोई राजनीतिक पार्टी भी इस तरह खत्म हो सकती है।
सेम्मालाई ने साफ कहा कि पार्टी के भीतर संवाद की कमी और नेताओं के बढ़ते अहंकार ने संगठन को कमजोर कर दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर पार्टी को बचाना है तो नेताओं को व्यक्तिगत अहंकार छोड़कर संगठन को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वस्थ चर्चा और सामूहिक फैसलों की परंपरा खत्म होती जा रही है, जिसका नुकसान सीधे पार्टी को उठाना पड़ रहा है।
हालांकि सेम्मालाई ने किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की संभावना से इनकार किया है, लेकिन उनके इस्तीफे ने एआईएडीएमके की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह केवल एक इस्तीफा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी का बड़ा संकेत है। हाल ही में एआईएडीएमके के कुछ बागी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का एलान किया था। ऐसे में सेम्मालाई का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व पर और ज्यादा दबाव बढ़ा सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके लंबे समय तक एक मजबूत क्षेत्रीय ताकत रही है, लेकिन जयललिता के निधन के बाद से पार्टी लगातार नेतृत्व संकट और गुटबाजी से जूझ रही है। ओ. पन्नीरसेल्वम और पलानीस्वामी के बीच सत्ता संघर्ष ने पहले ही संगठन को कमजोर किया था। अब लगातार सामने आ रही बगावतें यह संकेत दे रही हैं कि पार्टी के भीतर असंतोष अभी खत्म नहीं हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एआईएडीएमके नेतृत्व जल्द ही संगठनात्मक एकता पर ध्यान नहीं देता, तो आगामी चुनावों में पार्टी को और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल सेम्मालाई के इस्तीफे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एआईएडीएमके अपने पुराने जनाधार और संगठनात्मक ताकत को फिर से हासिल कर पाएगी।
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