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महाराष्ट्र में प्याद उत्पादकों का फूटा गुस्सा: किसानों के साथ सड़क पर उतरे रोहित पवार, सरकार से की ये मांग
पीटीआई, नासिक।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 18 May 2026 04:37 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया संकट के कारण निर्यात रुकने से प्याज के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। लागत से भी कम दाम मिलने से बेहाल किसानों के समर्थन में उतरी एनसीपी- शरद पवार ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। यदि सरकार ने खरीद की कीमतें नहीं बढ़ाईं तो महाराष्ट्र में प्याज की यह तपिश एक बड़े सियासी आंदोलन में बदल जाएगी।
कम कीमतों से परेशान प्याज किसान!
- फोटो : @RRPSpeaks
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विस्तार
महाराष्ट्र में प्याज की गिरती कीमतों को लेकर सियासत गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- शरद पवार के विधायक रोहित पवार सोमवार को प्याज किसानों के आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से किसानों को राहत देने की जोरदार वकालत की। रोहित पवार ने मांग की है कि सरकार किसानों से तुरंत 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की खरीद शुरू करे। इसके साथ ही उन्होंने संकट के समय औने-पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर हुए किसानों के लिए भारी मुआवजे की भी मांग उठाई है।
संसद सदस्यों के साथ किसानों का अनोखा विरोध
रोहित पवार के साथ पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद नीलेश लंके और भास्कर भगरे भी इस आंदोलन में शामिल हुए। इन नेताओं ने देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में से एक, नासिक की लासालगांव कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) में किसानों के साथ एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली। इसके बाद वे सभी वहीं धरने पर बैठ गए। आंदोलन के दौरान किसानों की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने जमीन पर बैठकर प्रतीकात्मक रूप से प्याज और भाकरी यानी बाजरे -ज्वार की सूखी रोटी खाई।
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उत्पादन लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान
मंडी में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए रोहित पवार ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक इस समय अपनी बुनियादी लागत भी वसूल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से राज्य भर के किसानों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई किसानों को अपनी प्याज की फसल बेहद कम और कौड़ियों के दाम पर बेचनी पड़ी। इसके बाद उन्हें अपनी जेब से परिवहन का खर्च तक उठाना पड़ा है।
यह भी पढ़ें: Indore: इंदौर के गांवों में हिरण, नील गाय रौंद रहे खेतों को, फसलें चौपट होने से किसान परेशान
सरकारी खरीद की दरें बेहद अपर्याप्त- रोहित पवार
एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार ने कहा कि इस समय एक किलो प्याज उगाने में किसान की वास्तविक लागत 17 रुपये से 20 रुपये के बीच आ रही है। इसके विपरीत, सरकार किसानों को महज 12.50 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास का भाव दे रही है। यह किसानों के साथ क्रूर मजाक है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ के माध्यम से किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज खरीदेगी। आंदोलनकारियों ने इस दर को बहुत कम बताया है।
नेफेड के भरोसे न रहे सरकार, सीधे हो खरीद
रोहित पवार ने मांग की कि सरकार को नेफेड जैसी एजेंसियों के जरिए सीमित मात्रा में खरीद करने के बजाय एक नया तंत्र बनाना चाहिए। सरकार को सभी कृषि बाजार समितियों मंडियों में सीधे किसानों से 25 रुपये प्रति किलो की दर से पूरे प्याज स्टॉक की खरीद करनी चाहिए। इसके अलावा, जिन किसानों ने पहले ही भारी घाटा सहकर अपनी फसल बाजार में बेच दी है, उन्हें सरकार की तरफ से 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम का विशेष अनुदान दिया जाना चाहिए। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही प्याज उत्पादकों की इन मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे राज्य में और अधिक उग्र किया जाएगा।
आज रस्त्यावर बसून कांदा भाकर खाण्याची वेळ या सरकारने आमच्या बळीराजावर आणली… कांद्याला भाव दिला नाही तर उद्या हाच कांदा उत्पादक शेतकरी सरकारच्या डोळ्यात पाणी आणल्याशिवाय राहणार नाही…
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(लासलगाव, नाशिक) pic.twitter.com/u4ZHUOtLwu — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) May 18, 2026
संसद सदस्यों के साथ किसानों का अनोखा विरोध
रोहित पवार के साथ पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद नीलेश लंके और भास्कर भगरे भी इस आंदोलन में शामिल हुए। इन नेताओं ने देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में से एक, नासिक की लासालगांव कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) में किसानों के साथ एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली। इसके बाद वे सभी वहीं धरने पर बैठ गए। आंदोलन के दौरान किसानों की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने जमीन पर बैठकर प्रतीकात्मक रूप से प्याज और भाकरी यानी बाजरे -ज्वार की सूखी रोटी खाई।
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उत्पादन लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान
मंडी में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए रोहित पवार ने सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक इस समय अपनी बुनियादी लागत भी वसूल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से राज्य भर के किसानों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई किसानों को अपनी प्याज की फसल बेहद कम और कौड़ियों के दाम पर बेचनी पड़ी। इसके बाद उन्हें अपनी जेब से परिवहन का खर्च तक उठाना पड़ा है।
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सरकारी खरीद की दरें बेहद अपर्याप्त- रोहित पवार
एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार ने कहा कि इस समय एक किलो प्याज उगाने में किसान की वास्तविक लागत 17 रुपये से 20 रुपये के बीच आ रही है। इसके विपरीत, सरकार किसानों को महज 12.50 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास का भाव दे रही है। यह किसानों के साथ क्रूर मजाक है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ के माध्यम से किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज खरीदेगी। आंदोलनकारियों ने इस दर को बहुत कम बताया है।
नेफेड के भरोसे न रहे सरकार, सीधे हो खरीद
रोहित पवार ने मांग की कि सरकार को नेफेड जैसी एजेंसियों के जरिए सीमित मात्रा में खरीद करने के बजाय एक नया तंत्र बनाना चाहिए। सरकार को सभी कृषि बाजार समितियों मंडियों में सीधे किसानों से 25 रुपये प्रति किलो की दर से पूरे प्याज स्टॉक की खरीद करनी चाहिए। इसके अलावा, जिन किसानों ने पहले ही भारी घाटा सहकर अपनी फसल बाजार में बेच दी है, उन्हें सरकार की तरफ से 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम का विशेष अनुदान दिया जाना चाहिए। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही प्याज उत्पादकों की इन मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे राज्य में और अधिक उग्र किया जाएगा।