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क्या अब भी महाराष्ट्र में खुद को 'बड़ा भाई' समझेगी भाजपा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Thu, 24 Oct 2019 07:36 PM IST
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे एवं देवेंद्र फडणवीस
- फोटो : PTI
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पांच साल पहले तक महाराष्ट्र में शिवसेना का पलड़ा भारी हुआ करता था, लेकिन 2014 के बाद से प्रदेश में तस्वीर ही बदल गई। महाराष्ट्र में शिवसेना के सहयोगी की भूमिका में रहने वाली भाजपा अकेले दम पर चुनाव लड़ी और पहली बार शतक जड़ दिया। 76 सीटों के फायदे के साथ उसने 122 सीटें जीतीं। शिवसेना 63 सीटें ही जीत पाई। इसके बाद बहस शुरू हुई, कौन बड़ा भाई तो कौन छोटा भाई। इस दौरान भाजपा ने कई मौकों पर खुद को बड़े भाई के रूप में साबित किया।
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पहली बार भाजपा ज्यादा सीटों पर लड़ी
- 2019 से पहले तक हमेशा शिवसेना ज्यादा सीटों पर लड़ती रही
- इस बार भाजपा ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की
- शिवसेना को 124 सीटों से संतोष करना पड़ा। जबकि उद्धव ठाकरे ने 135 सीटों की मांग की थी।
बीएमसी चुनावों में पीछे छोड़ा
- भाजपा-शिवसेना ने बीएमसी चुनावों में भी अलग-अलग राह चुनी
- 2012 में 31 सीट जीतने वाली भाजपा ने 2017 में 82 सीट पर कब्जा किया
- शिवसेना को इस चुनाव में 84 सीटें मिलीं
- महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भाजपा ने दोगुनी बढ़ोतरी करते हुए 205 सीटें जीतीं
इस बार तस्वीर अलग
इस बार महाराष्ट्र में फिर से शिवसेना का पलड़ा भारी होता दिख रहा है। ठाकरे परिवार से पहली बार कोई चुनाव लड़ा और जीता। अब शिवसेना 50-50 फॉर्मूले और मुख्यमंत्री पर चर्चा करना चाहती है। ऐसे में देखना रोचक होगा कि क्या अब भी भाजपा खुद को बड़े भाई के रूप में कायम रख पाएगी।
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