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Bangladesh: 4000 किलोमीटर की चिंता, बांग्लादेश चुनाव भारत के लिए क्यों हैं इतने अहम?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 12 Feb 2026 01:05 PM IST
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सार
बांग्लादेश चुनाव में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। बांग्लादेश में स्थिर और लोकतांत्रिक सरकार भारत के हित में होगी। यही वजह है कि भारत चाहेगा कि बीएनपी की सरकार सत्ता में आए ताकि दोनों देशों के संबंधों को पटरी पर लाया जा सके। जमात अगर सत्ता में आती है तो वहां भारत के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बांग्लादेश में चुनाव पर भारत की पैनी नजर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बांग्लादेश में आज आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में हो रहा ये चुनाव भारत के लिहाज से बेहद अहम है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का झुकाव पाकिस्तान और चीन की तरफ रहा है। अंतरिम सरकार को जमात ए इस्लामी का भी भरपूर समर्थन रहा। अब जमात ए इस्लामी चुनाव मैदान में है। अगर जमात बांग्लादेश में सरकार बनाने में सफल रही, तो वहां भारत के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
भारत द्वारा लगातार बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली का समर्थन किया जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का रुख पूर्व में भारत के खिलाफ रहा है, लेकिन उसे जमात ए इस्लामी जितना कट्टर नहीं माना जाता। ऐसे में भारत चाहेगा कि बांग्लादेश की सत्ता पर बीएनपी का कब्जा हो ताकि भारत और बांग्लादेश के संबंधों को फिर से पटरी पर लाया जा सके। भारत द्वारा बांग्लादेश के चुनाव पर करीब से नजर रखी जा रही है। बांग्लादेश चुनाव में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है और इनमें सबसे अहम है सुरक्षा।
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भारत द्वारा लगातार बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली का समर्थन किया जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का रुख पूर्व में भारत के खिलाफ रहा है, लेकिन उसे जमात ए इस्लामी जितना कट्टर नहीं माना जाता। ऐसे में भारत चाहेगा कि बांग्लादेश की सत्ता पर बीएनपी का कब्जा हो ताकि भारत और बांग्लादेश के संबंधों को फिर से पटरी पर लाया जा सके। भारत द्वारा बांग्लादेश के चुनाव पर करीब से नजर रखी जा रही है। बांग्लादेश चुनाव में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है और इनमें सबसे अहम है सुरक्षा।
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बांग्लादेश में संगीनों के साए में हो रहा चुनाव
- फोटो : पीटीआई
4000 किलोमीटर की चिंता!
- भारत और बांग्लादेश करीब 4000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। यह किसी भी पड़ोसी देश के साथ भारत की सबसे लंबी सीमा रेखा है। ऐसे में बांग्लादेश में स्थिरता होना, भारत के लिए बेहद जरूरी है।
- भारत-बांग्लादेश की सीमा के बड़े हिस्से में बाड़बंदी नहीं है और यह खुली हुई है। बांग्लादेश सीमा से घुसपैठ, पशु तस्करी, ड्रग तस्करी और नकली करेंसी की मूवमेंट भारत के लिए चिंता का सबब हैं। इस स्थिति में अगर बांग्लादेश में भारत विरोधी सरकार सत्ता में आती है तो ये सभी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
- साथ ही बांग्लादेश सीमा से भारत में आतंकी घुसपैठ का खतरा भी बढ़ सकता है। शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश में अपनी सक्रियता बहुत बढ़ा दी है। ऐसे में बांग्लादेश की सीमा से आतंकी घुसपैठ भारत के लिए एक असल चिंता है।
- जमात के नेतृत्व में बांग्लादेश में कट्टरपंथ बढ़ रहा है और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी जमात के साथ मिलकर भारत में आतंकी घुसपैठ करा सकती है। ऐसे में भारत की कोशिश होगी कि बांग्लादेश सरकार से बातचीत जारी रहे ताकि सीमा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- बांग्लादेश लंबे समय से भारत का प्रमुख व्यापार साझेदार रहा है। ऐसे में स्थिर बांग्लादेश भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए बेहद जरूरी है। शेख हसीना सरकार में भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक साझेदारी में खासा विस्तार हुआ था। दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग और व्यापार में भी काफी विस्तार किया। एक अस्थिर और कट्टर बांग्लादेश भारत की इन सभी कोशिशों को पटरी से उतार सकता है। जमात ए इस्लामी को पाकिस्तान समर्थक माना जाता है और जमात बांग्लादेश की पाकिस्तान से आजादी का भी समर्थन नहीं करती। यही वजह है कि जमात का सत्ता में आना भारत के मुफीद नहीं माना जा सकता।