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Bihar: सामाजिक संतुलन साधने को नीतीश का बड़ा सियासी दांव, श्रवण कुमार के जरिए लव-कुश समीकरण साधा
कुमार निशांत, पटना
Published by: Nitin Gautam
Updated Wed, 22 Apr 2026 05:42 AM IST
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सार
नीतीश कुमार ने जदयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उन्हें विधायक दल का नेता चुना है। अपने इस फैसले से न सिर्फ नीतीश कुमार ने अनुभव को तरजीह दी है बल्कि बिहार के जातीय समीकरणों को भी बखूबी साधा है।
श्रवण कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच जदयू नेता नीतीश कुमार ने फिर सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर बड़ा दांव चला है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार को जदयू विधायक दल का नेता बनाकर संकेत दिया कि लव-कुश समीकरण को नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है। दरअसल, जदयू की राजनीति लंबे समय से कुर्मी और कुशवाहा (लव-कुश) सामाजिक आधार पर टिकी रही है। इसकी धुरी नीतीश कुमार रहे हैं।
सत्ता से हटने के बाद भी नीतीश संतुलन साधने में सक्रिय हैं। पहले उन्होंने भूमिहार और यादव समाज के नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाकर संदेश दिया, वहीं अब कुर्मी समाज को साधने के लिए श्रवण को नई जिम्मेदारी दी है। सोमवार को विधायक दल की बैठक में विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चयन का अधिकार नीतीश को सौंपा था। बैठक के बाद कई नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः उन्होंने अटकलों पर विराम लगाते हुए श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी।
अनुभव बना सबसे बड़ा फैक्टर
नालंदा से 1995 से लगातार विधायक रहे श्रवण को संगठन का भरोसेमंद और जमीनी नेता माना जाता है। सरकार और संगठन में लंबे अनुभव के कारण वे पार्टी में संतुलन बनाने में सक्षम चेहरे के रूप में उभरे हैं। हाल में उनकी सुरक्षा बढ़ाकर वाई प्लस श्रेणी की गई है, जो उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत है। विधायक दल का नेता बनने के बाद अब उनकी जिम्मेदारी केवल सदन तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन को एकजुट रखने की भी होगी।
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सत्ता से हटने के बाद भी नीतीश संतुलन साधने में सक्रिय हैं। पहले उन्होंने भूमिहार और यादव समाज के नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाकर संदेश दिया, वहीं अब कुर्मी समाज को साधने के लिए श्रवण को नई जिम्मेदारी दी है। सोमवार को विधायक दल की बैठक में विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चयन का अधिकार नीतीश को सौंपा था। बैठक के बाद कई नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः उन्होंने अटकलों पर विराम लगाते हुए श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी।
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अनुभव बना सबसे बड़ा फैक्टर
नालंदा से 1995 से लगातार विधायक रहे श्रवण को संगठन का भरोसेमंद और जमीनी नेता माना जाता है। सरकार और संगठन में लंबे अनुभव के कारण वे पार्टी में संतुलन बनाने में सक्षम चेहरे के रूप में उभरे हैं। हाल में उनकी सुरक्षा बढ़ाकर वाई प्लस श्रेणी की गई है, जो उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत है। विधायक दल का नेता बनने के बाद अब उनकी जिम्मेदारी केवल सदन तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन को एकजुट रखने की भी होगी।

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