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मणिपुर में फिर तनाव: हिंसा के विरोध में विभिन्न संगठनों ने बुलाया बंद, 12 जिलों में दिख रहा असर; थम गए पहिये
पीटीआई, इंफाल।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 22 Apr 2026 04:16 PM IST
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सार
मणिपुर में अलग-अलग जातीय हिंसाओं और हत्याओं के विरोध में विभिन्न संगठनों की ओर से बुलाए गए बंद ने राज्य के 12 जिलों की रफ्तार रोक दी है। घाटी से लेकर पहाड़ी जिलों तक स्कूल, बाजार और परिवहन बंद रहने से आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मणिपुर बंद ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
मणिपुर में जातीय हिंसा की तपिश और विभिन्न समुदायों के बीच पनपा आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। बुधवार को राज्य के अलग-अलग जातीय संगठनों की ओर से बुलाए गए बंद के कारण मणिपुर के कुल 16 में से 12 जिलों में सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
घाटी के पांच जिलों में पांच दिवसीय बंद का असर
बिष्णुपुर जिले के त्रोंगलाओबी में बीते सात अप्रैल को हुए बम हमले के विरोध में जॉइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने पांच दिवसीय बंद का आह्वान किया है। इस हमले में दो मासूम बच्चों की जान चली गई थी। इस बंद का इंफाल घाटी के सभी पांच जिलों में व्यापक असर देखा जा रहा है। इंफाल पश्चिम के सगोलबंद और पटसोई जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है। यातायात पूरी तरह ठप होने से लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए हैं।
नगा बहुल इलाकों में तीन दिनों का पूर्ण बंद
घाटी के साथ-साथ राज्य के पहाड़ी जिलों में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यूनाइटेड नागा काउंसिल की ओर से बुलाए गए तीन दिवसीय बंद का आज दूसरा दिन था। यह बंद 18 अप्रैल को उखरुल जिले में दो तंगखुल नागा व्यक्तियों की हत्या के विरोध में बुलाया गया है। नागा बहुल छह पहाड़ी जिलों में इस बंद का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। नोनी जिले और इंफाल पूर्व के याइंगांगपोकपी में बंद समर्थकों ने सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित कर दिया, जिससे केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवाजाही में भी काफी परेशानी आई।
यह भी पढ़ें: सावधान हो जाइए: उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में लू का तांडव शुरू; मौसम विभाग ने जारी किया भीषण गर्मी का अलर्ट
चुराचांदपुर में विधायक वाल्टे के लिए न्याय की मांग
उधर, चुराचांदपुर जिले में भी स्थिति अलग नहीं थी। जोमी समन्वय समिति के तत्वावधान में विभिन्न संगठनों ने 13 घंटे के बंद का आह्वान किया। यह विरोध प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी के विधायक वुंगजागिन वाल्टे के लिए न्याय की मांग को लेकर किया गया। गौरतलब है कि मई 2023 में जातीय हिंसा की शुरुआत में एक उग्र भीड़ ने वाल्टे पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लंबे उपचार के बाद इसी साल फरवरी में गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया था।
ठप रहा व्यापार
प्रभावित जिलों में बंद का असर इतना गहरा था कि स्कूल, कॉलेज, बैंक और निजी प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और सार्वजनिक परिवहन के साधन सड़कों से नदारद रहे। केवल फार्मेसी और आपातकालीन सेवाओं को ही छूट दी गई थी।
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नगा बहुल इलाकों में तीन दिनों का पूर्ण बंद
घाटी के साथ-साथ राज्य के पहाड़ी जिलों में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यूनाइटेड नागा काउंसिल की ओर से बुलाए गए तीन दिवसीय बंद का आज दूसरा दिन था। यह बंद 18 अप्रैल को उखरुल जिले में दो तंगखुल नागा व्यक्तियों की हत्या के विरोध में बुलाया गया है। नागा बहुल छह पहाड़ी जिलों में इस बंद का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। नोनी जिले और इंफाल पूर्व के याइंगांगपोकपी में बंद समर्थकों ने सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित कर दिया, जिससे केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवाजाही में भी काफी परेशानी आई।
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चुराचांदपुर में विधायक वाल्टे के लिए न्याय की मांग
उधर, चुराचांदपुर जिले में भी स्थिति अलग नहीं थी। जोमी समन्वय समिति के तत्वावधान में विभिन्न संगठनों ने 13 घंटे के बंद का आह्वान किया। यह विरोध प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी के विधायक वुंगजागिन वाल्टे के लिए न्याय की मांग को लेकर किया गया। गौरतलब है कि मई 2023 में जातीय हिंसा की शुरुआत में एक उग्र भीड़ ने वाल्टे पर जानलेवा हमला किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लंबे उपचार के बाद इसी साल फरवरी में गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया था।
ठप रहा व्यापार
प्रभावित जिलों में बंद का असर इतना गहरा था कि स्कूल, कॉलेज, बैंक और निजी प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और सार्वजनिक परिवहन के साधन सड़कों से नदारद रहे। केवल फार्मेसी और आपातकालीन सेवाओं को ही छूट दी गई थी।
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