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सियासत: TMC के संसदीय दल में बड़ी टूट पर BJP की नजर, सियासी परिस्थितियों में परिसीमन का द्वार खुलने की संभावना

Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Fri, 05 Jun 2026 07:05 AM IST
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सार

तृणमूल कांग्रेस में संभावित टूट और डीएमके की बदलती राजनीतिक स्थिति से संसद में नए समीकरण बन सकते हैं। भाजपा परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर रणनीति मजबूत कर रही है।

BJP Eyes Political Realignment as TMC Rift and DMK Shift May Strengthen NDA Parliamentary Numbers
TMC- DMK समीकरण से बदलेगी दिल्ली की सियासत? - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में टूट, तमिलनाडु में डीएमके की कांग्रेस से बनी दूरी और राज्यसभा में राजग के दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने की संभावनाओं ने भाजपा की उम्मीदों को नए पंख लगा दिए हैं। दरअसल, परिसीमन और महिला आरक्षण पर नए सिरे से कदम आगे बढ़ाने के लिए भाजपा को अब तृणमूल के विधायक दल में बड़ी टूट के बाद उसके संसदीय दल में बड़ी टूट का इंतजार है।



इससे जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में फिर से पेश करने के लिए भाजपा की योजना 18 जून को राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद डीएमके समेत कुछ अन्य ऐसे विपक्षी दलों को साधने की है। दरअसल, भाजपा को तीन कारणों से संविधान संशोधन विधेयक पर आगे बढ़ने का हौसला मिला है।
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पहला 18 राज्यों की राज्यसभा की 27 सीटों के परिणाम आने के बाद उच्च सदन में भाजपा अपने सहयोगियों के साथ दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी। दूसरा तृणमूल विधायक दल में टूट के बाद पार्टी के संसदीय दल में भी बड़ी टूट का रास्ता तैयार हो गया है। तीसरा राज्य में सत्ता गंवाने और कांग्रेस से बनी दूरी के बाद डीएमके और भाजपा के बीच करीबी बढ़ रही है। भाजपा को लगता है कि तृणमूल में टूट और डीएमके की हां संविधान संशोधन विधेयक के लिए नया रास्ता खोल सकता है।
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डीएमके की हां से बदल जाएगी परिस्थिति
भाजपा अगर डीएमके को परिसीमन के लिए मना पाई तो संसद में परिस्थिति में बड़ा बदलाव होगा। रणनीतिकारों का मानना है कि टीएमसी संसदीय दल में बड़ी टूट तय है। तृणमूल के लोकसभा में 29 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं। ऐसे में अगर डीएमके (लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8) का साथ मिला तो तृणमूल के बागी व डीएमके को मिला कर भाजपा लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी। चूंकि डीएमके अब राज्य की सत्ता में नहीं है और कांग्रेस से भी उसका मोहभंग हो चुका है। ऐसे में पार्टी भाजपा को मुद्दागत समर्थन का विकल्प चुन सकती है।

संयुक्त बैठक का भी विकल्प
सरकार के सूत्र ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल की रत्ती भर की अनिश्चितता महसूस होने पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का विकल्प भी खुल सकता है।  ठीक उसी तरह जैसे वाजपेयी सरकार के दौरान 2002 में आतंकवाद रोक थाम कानून (पोटा) के लिए इस दांव का इस्तेमाल कर विपक्ष की रणनीति को ध्वस्त किया गया था।

राज्यसभा से मिलेगी ताकत
संयुक्त सत्र की स्थिति में राज्यसभा सरकार को नई ताकत देगी। 18 जून के नतीजे के बाद राजग के सदस्यों की संख्या 150 के पार चली जाएगी। भाजपा के रणनीतिकार इस बार बीजद (5), बीआरएस (3) को साधने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। फिर राज्यसभा में टीएमसी में टूट और डीएमके के संभावित समर्थन के बाद राजग के पक्ष में जरूरी तो तिहाई से अधिक का संख्या बल होगा। इसी प्रकार लोकसभा में 54 वोट से दूर रही भाजपा डीएमके और टीएमसी के नए गुट के समर्थन के बाद दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी।

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