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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव आज: महायुति गठबंधन का 12 सीटों पर दबदबा बनाने का प्रयास, पांच पर निर्विरोध जीते
Thu, 18 Jun 2026 02:33 AM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:33 AM IST
सार
महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन सभी सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरा है। इनमें से पांच सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। वहीं, शेष 12 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से मिलकर बने महायुति गठबंधन को कई क्षेत्रों में संख्यात्मक बढ़त हासिल है। हालांकि कुछ सीटों पर आंतरिक मतभेद भी सामने आए हैं।
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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन गुरुवार को होने वाले महाराष्ट्र विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव में सभी 17 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगा। महाराष्ट्र विधान परिषद की 12 सीटों पर ही मतदान होना है, क्योंकि पांच सीटों पर महायुति उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।
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स्थानीय स्वशासन निकायों जैसे नगर निगमों, नगर परिषदों और जिला परिषदों के सदस्य सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान करेंगे। मतों की गिनती 22 जून को होगी। पांच सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के कारण केवल 12 सीटों पर मतदान कराया जाएगा।
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पांच सीटों पर निर्विरोध जीत, बची 12 सीटों के लिए झोंकी ताकत
गठबंधन पहले ही वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से भाजपा के अरुण लखानी, पुणे से एनसीपी के विक्रम काकड़े, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से एनसीपी के अनिकेत तटकरे, ठाणे से शिवसेना के रवींद्र फाटक और यवतमाल से शिवसेना के दुष्यंत चतुर्वेदी को निर्विरोध निर्वाचित करा चुका है। महायुति में भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं।
इन सीटों पर जीत सुनिश्चित होने के बाद महायुति का पूरा ध्यान बची हुई 12 सीटों पर है। गठबंधन की कोशिश है कि विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) को कोई राजनीतिक बढ़त न मिले। संख्यात्मक बढ़त के बावजूद चुनावी अभियान पूरी तरह आसान नहीं रहा। सतारा-सांगली और नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के भीतर मतभेद सामने आए, जिसके बाद वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी।
आंतरिक मतभेदों के बीच जीत हासिल करने की चुनौती
सतारा-सांगली सीट सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल है। भाजपा ने यहां धैर्यशील कदम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एनसीपी (एसपी) ने अभयसिंह जगताप को मैदान में उतारा है। सीट बंटवारे को लेकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कुछ नेताओं ने असंतोष जताया था।
यह असहमति तब खुलकर सामने आई जब महाराष्ट्र सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई चुनाव से जुड़ी महायुति समन्वय बैठक से दूर रहे। बाद में देसाई ने कहा कि उन्होंने नगर निकाय और जिला परिषद चुनावों के दौरान सहयोगी दलों के बीच समन्वय की कई कोशिशें की थीं, लेकिन भाजपा मंत्रियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
वरिष्ठ नेताओं को देना पड़ा दखल
हालांकि शिवसेना के बागी नेता तानाजीराव पाटिल के चुनाव मैदान से हटने के बाद गठबंधन के वोटों में संभावित विभाजन की अटकलें खत्म हो गईं और मुकाबला सीधे कदम और जगताप के बीच सिमट गया। नासिक में भी महायुति को चुनौती का सामना करना पड़ा। भाजपा नेता गोकुल गीते ने शिवसेना के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया था। गीते की नाराजगी सीट शिवसेना को दिए जाने और स्थानीय स्तर पर दराडे के खिलाफ असंतोष से जुड़ी थी।
स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता गिरीश महाजन, शिवसेना मंत्री उदय सामंत और अन्य वरिष्ठ नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा। गिरीश महाजन ने नासिक और मुंबई में बागी खेमे के साथ कई दौर की बातचीत की। आखिरकार गीते ने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद अपना चुनाव प्रचार रोक दिया। हालांकि, नाम वापसी की समय सीमा निकल जाने के कारण उनका नाम मतपत्र पर बना रहेगा।
विपक्षी उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से मिला फायदा
महायुति को कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी उम्मीदवारों के नाम वापस लेने का भी लाभ मिला। कोंकण सीट से शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार बाल माने ने नामांकन वापस ले लिया, जबकि पुणे में एनसीपी (एसपी) के श्रीकांत पाटिल के हटने से विक्रम काकड़े की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हुआ।
इसी तरह औरंगाबाद-जालना सीट से शिवसेना (यूबीटी) की उम्मीदवार देवयानी पाटिल डोंगांवकर ने भी नामांकन वापस ले लिया। वहीं वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से कांग्रेस के शैलेश अग्रवाल और यवतमाल से साहेबराव कांबले के हटने से महायुति उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत सुनिश्चित हुई।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि उम्मीदवारों की वापसी के पीछे धनबल और राजनीतिक दबाव की भूमिका रही है। हालांकि महायुति नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है। नांदेड़ स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में कुल 452 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। यहां तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
चुनाव के लिए कहां और कितने मतदान केंद्र?
स्थानीय प्रशासन के अनुसार जिले के विभिन्न राजस्व उपखंड मुख्यालयों पर मतदान केंद्र बनाए गए हैं। कुल मतदाताओं में 224 महिलाएं और 228 पुरुष शामिल हैं। मतदाता सूची में नांदेड़-वाघाला नगर निगम के सभी सदस्य तथा जिले की नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं सदस्य शामिल हैं।
किनवट, हादगांव, भोकर, नांदेड़, कंधार, धर्माबाद, बिलोली और देगलूर तहसील कार्यालयों में मतदान की व्यवस्था की गई है। सबसे बड़ा मतदान केंद्र नांदेड़ तहसील कार्यालय में होगा, जहां नांदेड़-वाघाला नगर निगम और अर्धापुर नगर पंचायत के 108 मतदाता मतदान कर सकेंगे।
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अधिकारियों ने बताया कि मतगणना 22 जून को सुबह 8 बजे से नांदेड़ जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में शुरू होगी। उस्मानाबाद-लातूर-बीड निर्वाचन क्षेत्र में कुल 367 मतदाता मतदान के पात्र हैं। अधिकारियों के अनुसार जिले की सभी तहसीलों में निर्धारित मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस सीट पर भाजपा के बसवराज पाटिल मुरुमकर और कांग्रेस के महेश देशमुख के बीच सीधा मुकाबला है।