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Hindi News ›   India News ›   CBI Another case against Anil Ambani's company; action now taken in EPFO investment scam.

CBI: अनिल अंबानी की कंपनी के खिलाफ एक और केस, अब ईपीएफओ के निवेश घोटाले में हुई कार्रवाई

Sat, 01 Aug 2026 04:42 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Sat, 01 Aug 2026 04:42 PM IST
सार

सीबीआई ने ईपीएफओ की शिकायत पर अनिल अंबानी, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि 2,500 करोड़ रुपये के निवेश में कथित धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन से ईपीएफओ को 1,816.22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले की जांच जारी है।

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CBI Another case against Anil Ambani's company; action now taken in EPFO investment scam.
सीबीआई - फोटो : cbi.gov.in/

विस्तार

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) से मिली लिखित शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर रिलायंस केपिटल लिमिटेड (मुंबई), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार जैसे अपराध करके 1007.55 करोड़ रुपये का गलत नुकसान पहुंचाने और 808.67 करोड़ रुपये की ब्याज देनदारी पैदा करने का आरोप है।

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श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत ईपीएफओ की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2013 और 2014 के दौरान, रिलायंस केपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी किए थे। इनमें ईपीएफओ ने रिलायंस केपिटल एसेट मैनेजमेंट सहित चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के जरिए ₹2,500 करोड़ का निवेश किया था। इन नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर की मैच्योरिटी 2023 और 2024 में होनी थी। आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी वाले लेन-देन किए और फंड का गलत इस्तेमाल (डायवर्जन) किया, जिसके कारण रिलायंस केपिटल लिमिटेड, एनसीडी का रिडेम्पशन (भुगतान) करने में नाकाम रही। नतीजा, ईपीएफओ को कुल ₹1,816.22 करोड़ का कथित नुकसान हुआ।
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सीबीआई के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट व्यक्तियों समेत इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाने, कथित आपराधिक साज़िश की जांच करने और निवेश किए गए फंड के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने पहले ही कई पब्लिक सेक्टर बैंकों और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं। सीबीआई ने अब तक रिलायंस एडीए ग्रुप के मामलों में चार चार्जशीट दाखिल की हैं। सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल इन मामलों की जांच चल रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन केसों की जांच की निगरानी की जा रही है।

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