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कॉलेजियम: जस्टिस भुइयां ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल, कहा- किसी जज को क्यों चुना, नहीं बताना बाकी के लिए अन्याय
Sun, 02 Aug 2026 04:35 AM IST
ज्योति भास्कर
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 02 Aug 2026 04:35 AM IST
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सु्प्रीम कोर्ट कॉलेजियम और पारदर्शिता पर नई बहस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स-एआई
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उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति करने वाले सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की प्रणाली पर शीर्ष अदालत के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने ही सवाल उठाए हैं। जस्टिस भुइयां ने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशों में जज के चयन का कारण नहीं बताना, अच्छा काम करने वाले जजों के साथ अन्याय है। यह प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को भी दर्शाता है।
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प्रस्तावों में सिफारिशों के पीछे के कारण नहीं बताए गए
जस्टिस भुइयां ने शनिवार को कानूनी थिंक टैंक विधि की रिपोर्ट के विमोचन पर चर्चा के दौरान कहा, मैंने देखा है कि पिछले तीन कॉलेजियम प्रस्तावों में सिफारिशों के पीछे के कारण नहीं बताए गए। उन्होंने पूछा, क्या कारण न बताना पारदर्शिता के सिद्धांत से पीछे हटने जैसा नहीं है।
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क्या पिछली कुछ सिफारिशें एक ही ढर्रे पर?
उन्होंने कहा कि नियुक्तियों व पदोन्नति के कारण उजागर न करने से अयोग्य उम्मीदवारों को न्यायपालिका में प्रवेश करने का मौका मिलता है। कॉलेजियम की पिछली कुछ सिफारिशें एक ही ढर्रे पर नजर आती हैं।
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कॉलेजियम की सिफारिशों पर खुली चर्चा हो
जस्टिस भुइयां ने कहा, न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने और असांविधानिक सोच वाले लोगों को सिस्टम में आने से रोकने के लिए जरूरी है कि सिफारिशों पर खुली चर्चा हो। कारण न बताकर कॉलेजियम उन कई जजों के साथ अन्याय करती है जो वास्तव में उत्कृष्ट हैं।
बीते दशक का सबसे पारदर्शी विकास क्या?
जस्टिस भुइयां ने कोर्ट कार्यवाही के सीधे प्रसारण का समर्थन किया। उन्होंने इसे बीते दशक का सबसे पारदर्शी विकास करार दिया। उन्होंने कहा कि अदालतों का जनता के लिए खुला होना जरूरी है। इससे न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत होता है।