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ED: ईडी की गिरफ्त में क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड, 40% तक रिटर्न देने का झूठा वादा, 2170 करोड़ जब्त

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Thu, 22 Jan 2026 05:06 PM IST
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सार

प्रवर्तन निदेशालय ने क्रिप्टोकरेंसी से धोखाधड़ी के एक मामले में दो लोगो को गिरफ्तार किया है। ईडी ने इसके पास 2170 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है। 

ED arrested Cryptocurrency fraud mastermind promised returns  40% 2170 crore seized
क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार - फोटो : i-stock
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें वैश्विक तौर पर बिटकनेक्टकॉइन और क्रिप्टोकरेंसी के मार्फत धोखाधड़ी का खेल खेला गया। निवेशकों को 40 प्रतिशत तक रिटर्न देने का झूठा वादा किया गया। अहमदाबाद स्थित ईडी ने इस सप्ताह सूरत के निकुंज प्रवीणभाई और मुंबई निवासी भट्ट संजय कोटडिया को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत बिटकनेक्टकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। इस मामले में अभी तक 2170 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। 

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ईडी ने सूरत पुलिस स्टेशन के अपराध विभाग की सीआईडी द्वारा शैलेश बाबूलाल भट्ट, सतीश कुरजीभाई कुंभानी और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की है। एक एफआईआर के अनुसार, सतीश कुरजीभाई कुंभानी और अन्य आरोपियों ने बिटकनेक्ट कॉइन में जनता को निवेश करने के लिए प्रेरित करके अपराध की आय अर्जित की। यह आय सतीश कुरजीभाई कुंभानी और उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित थी। इसके अलावा, आरोपियों ने अपराध की आय का दुरुपयोग बिटकॉइन और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया।

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भारत और दुनिया भार के निवेशक थे शामिल 

ईडी की जांच में पता चला है कि नवंबर 2016 से जनवरी 2018 की अवधि के दौरान, आरोपियों ने बिटकनेक्ट के कथित "ऋण कार्यक्रम" में निवेश के रूप में क्रिप्टोकरेंसी की धोखाधड़ीपूर्ण और अपंजीकृत बिक्री की पेशकश की। इसमें भारत में स्थित निवेशकों सहित दुनिया भर के निवेशक शामिल थे। बिटकनेक्ट के संस्थापक, जो एक गैर-पंजीकृत संगठन है, ने प्रमोटरों का एक वैश्विक नेटवर्क स्थापित किया और उन्हें उनके प्रचार प्रयासों के लिए कमीशन देकर पुरस्कृत किया।

निवेशकों को नकद और बिटकॉइन के रूप में धनराशि जमा करने के लिए प्रेरित करने के मकसद से कथित ऋण कार्यक्रम में बिटकनेक्ट ने अन्य बातों के अलावा यह दावा किया कि बिटकनेक्ट एक कथित स्वामित्व वाला "अस्थिरता सॉफ्टवेयर ट्रेडिंग बॉट" ("ट्रेडिंग बॉट") तैनात करेगा, जो निवेशकों की धनराशि का उपयोग करके प्रति माह 40% तक का रिटर्न उत्पन्न करेगा। वृद्धि की झूठी छवि बनाने के लिए, उन्होंने बिटकनेक्ट वेबसाइट पर काल्पनिक रिटर्न पोस्ट किए, जो औसतन 1% प्रति दिन या वार्षिक आधार पर लगभग 3,700% थे। ये दावे झूठे थे, क्योंकि आरोपी जानते थे कि बिटकनेक्ट  निवेशकों की धनराशि का उपयोग अपने कथित ट्रेडिंग बॉट के साथ ट्रेडिंग के लिए नहीं करता था। वे निवेशकों की धनराशि को अपने सहयोगियों के लाभ के लिए अपने नियंत्रण वाले डिजिटल वॉलेट पतों में स्थानांतरित करके उसका दुरुपयोग करते थे।

दूसरी एफआईआर के अनुसार, बिटकॉइन में अपने कथित निवेश की वसूली के लिए शैलेश बाबूलाल भट्ट और उसके साथियों ने सतीश कुर्जीभाई कुंभानी के दो सहयोगियों, पीयूष सावलिया और धवल मावानी का अपहरण कर लिया और धवल मावानी को रिहा करने के बदले में उनसे 2254 बिटकॉइन, 11000 लाइटकॉइन और 14.5 करोड़ रुपये नकद वसूल किए।

19 करोड़ रुपये की नकद संपत्ति जब्त 

पीएमएलए के तहत जांच के दौरान, 09.01.2026 को 5 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए और शेयरों और म्यूचुअल फंडों में निवेश, क्रिप्टोकरेंसी और लगभग 19 करोड़ रुपये की नकद संपत्ति जब्त की गई। जांच में पता चला है कि निकुंज प्रवीणभाई भट्ट, शैलेश बाबूलाल भट्ट के अपहरण और बिटकॉइन एवं नकदी की जबरन वसूली के अपराध में उसके सहयोगियों में से एक था। जबरन वसूली किए गए बिटकॉइन में से, निकुंज भट्ट को एक क्रिप्टो एक्सचेंज में रखे गए दो अलग-अलग खातों में कम से कम 266 बिटकॉइन प्राप्त हुए। निकुंज भट्ट को प्राप्त 266 बिटकॉइन में से 10.9 बिटकॉइन ईडी द्वारा जब्त कर लिए गए हैं। 

46 बिटकॉइन को एथेरियम और यूएसडीटी में परिवर्तित

जांच में यह भी पता चला है कि निकुंज भट्ट ने जानबूझकर कम से कम 246 बिटकॉइन को तृतीय-पक्ष क्रिप्टो खातों के माध्यम से संभाला, अपने पास रखा और स्थानांतरित किया ताकि धन के वास्तविक स्वामित्व, नियंत्रण और स्रोत को छिपाया जा सके। उक्त 246 बिटकॉइन को एथेरियम और यूएसडीटी में परिवर्तित किया गया। उसके बाद उक्त एथेरियम और यूएसडीटी को संजय कोटड़िया सहित कई व्यक्तियों से जुड़े विभिन्न वॉलेट में स्थानांतरित कर दिया। 

जांच के अनुसार, निकुंज भट्ट ने कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग के लिए संजय कोटड़िया से जुड़े विभिन्न वॉलेट में कम से कम 23 लाख यूएसडीटी (लगभग 20.70 करोड़ रुपये) ट्रांसफर किए थे। इसके अलावा, जबरन वसूली गई क्रिप्टोकरेंसी में से कम से कम 4.5 लाख यूएसडीटी (लगभग 4.05 करोड़ रुपये) संजय कोटड़िया को शैलेश भट्ट से क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग के लिए प्राप्त हुए थे। जांच के दौरान, ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया और डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए। जब्त की गई सामग्री के फोरेंसिक विश्लेषण से क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन डेटा और एक्सचेंज से संबंधित रिकॉर्ड मिले, जो गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्तियों के बीच लेनदेन संबंधी संबंधों को दर्शाते हैं।

पीएमएलए के तहत जांच के दौरान, संजय कनुभाई कोटडिया और निकुंज भट्ट ने शैलेश बाबूलाल भट्ट से प्राप्त क्रिप्टोकरेंसी की प्राप्ति, उपयोग और वर्तमान स्थिति के संबंध में टालमटोल भरे और अधूरे खुलासे किए। कई बार अवसर दिए जाने के बावजूद, संजय कोटडिया और निकुंज प्रवीणभाई भट्ट ने जांच में सहयोग नहीं किया। पीएमएलए की धारा 50(3) के तहत झूठे, अधूरे और टालमटोल भरे बयान देकर जांच की दिशा को भटकाने और बाधित करने का प्रयास किया। उनके असहयोग, साक्ष्य नष्ट होने के जोखिम और भागने के जोखिम को देखते हुए, निकुंज भट्ट और संजय कोटडिया को गिरफ्तार कर 20.01.2026 को अहमदाबाद स्थित पीएमएलए विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपियों को ईडी की चार दिन की हिरासत में भेजा है। इस मामले में, ईडी ने पहले ही शैलेश बाबूलाल भट्ट नामक एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब तक लगभग 2170 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त/फ्रीज कर दी गई है। 

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