ED: US वीजा दिलाने के नाम पर ठगी, 154 आवेदकों के खातों में दिखाए फर्जी फंड; क्या है सोने की ईंट का राज?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत जालंधर की स्पेशल कोर्ट में रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, अमनदीप सिंह, पूनम रानी, अंकुर कुमार केहर, नितिन विज, कमलजोत कंसल, ओवरसीज पार्टनर और रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पीसी) दायर की है। इन पर संगठित इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी से हुई अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को लॉन्डर करने में शामिल होने का आरोप है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत जालंधर की स्पेशल कोर्ट में रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, अमनदीप सिंह, पूनम रानी, अंकुर कुमार केहर, नितिन विज, कमलजोत कंसल, ओवरसीज पार्टनर और रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पीसी) दायर की है। इन पर संगठित इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी से हुई अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को लॉन्डर करने में शामिल होने का आरोप है। आरोपियों द्वारा अमेरिका का स्टूडेंट/विजिटर वीजा दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की गई। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। आवेदकों से चालीस हजार रुपये लेकर उनके बैंक खाते में 40 लाख रुपये जमा कराते थे, मगर कुछ ही मिनट बाद खाते से वह राशि गायब कर देते थे।
ईडी ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की शिकायतों पर पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई केसों के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। ये केस एक सुनियोजित साजिश से जुड़े हैं, जिसमें अमेरिका के स्टूडेंट और विजिटर वीजा पाने के लिए जाली एजुकेशनल सर्टिफिकेट, मनगढ़ंत अनुभव प्रमाण पत्र, नकली फाइनेंशियल स्टेटमेंट और फंड के धोखाधड़ी वाले सबूत तैयार करना और जमा करना शामिल था।
पीएमएलए के तहत की गई जांच से पता चला कि अमनदीप सिंह और पूनम रानी द्वारा संचालित रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड एक व्यवस्थित इमिग्रेशन धोखाधड़ी रैकेट चलाती थी। यह रैकेट उन वीजा आवेदकों को निशाना बनाता था, जिनके पास जरूरी शैक्षणिक योग्यता या फाइनेंशियल पात्रता नहीं होती थी। आरोपी, वीजा की जरूरतों को झूठे तौर पर पूरा करने के लिए जाली शैक्षणिक दस्तावेज, मनगढ़ंत काम के अनुभव के प्रमाण पत्र, गैप कवर करने वाले दस्तावेज और अस्थायी फंड की व्यवस्था करने के नाम पर आवेदकों से मोटी रकम वसूलते थे। विदेशी विश्वविद्यालयों और वीजा अधिकारियों के साथ बातचीत सहित पूरी वीजा आवेदन प्रक्रिया को आरोपी अपने द्वारा संचालित ईमेल अकाउंट के जरिए नियंत्रित करते थे।
जांच में यह भी पता चला कि अंकुर कुमार केहर द्वारा चलाई जा रही ओवरसीज पार्टनर ने नितिन विज द्वारा चलाई जा रही रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ मिलकर, वीजा आवेदकों की आर्थिक क्षमता का झूठा दिखावा करने के लिए उनके बैंक खातों में कुछ समय के लिए फंड का इंतजाम किया। जांच के अनुसार, इस तरीके से 154 वीजा आवेदकों को फंड का नकली सबूत दिया गया। इसके लिए आवेदकों के बैंक खातों में कुछ समय के लिए लगभग 40 लाख रुपये जमा किए गए और तुरंत बाद निकाल लिए गए। आरोपियों ने फंड का ऐसा धोखाधड़ी वाला इंतजाम करने के लिए हर आवेदक से लगभग 40,000 रुपये लिए।
जांच में यह भी पता चला कि कमलजोत कंसल द्वारा चलाई जा रही इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन ने उन वीजा आवेदकों के लिए नकली ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए, जिन्होंने कभी कोई ट्रेनिंग या नौकरी नहीं की थी। जब्त की गई डायरियों और सबूत वाले रिकॉर्ड से नकद पैसे के बदले नकली रोजगार दस्तावेज तैयार करने की पुष्टि हुई।
जांच के दौरान, ईडी ने फरवरी 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपियों से जुड़ी कई जगहों और लॉकरों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान सबूत वाले दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, गैर कानूनी लेन-देन के रिकॉर्ड वाली डायरियां, 19 लाख रुपये नकद (जिसका कोई हिसाब नहीं था) और लगभग 1 किलो वजन की सोने की एक ईंट जब्त की गई। जांच में वीजा धोखाधड़ी और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से गैर कानूनी कमाई की भी पहचान हुई है।
मुख्य प्वाइंट्स:
2.14 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई (Proceeds of Crime) का पता चला।
2.14 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच/फ्रीज की गईं।
रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड से 1.37 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का खुलासा।
ओवरसीज पार्टनर और रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज से 61.60 लाख रुपये की कमाई सामने आई।
इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन से 15 लाख रुपये की अवैध कमाई का पता चला।
अटैच संपत्तियों में रिहायशी प्रॉपर्टी और बैंक बैलेंस शामिल हैं।
आरोपियों पर संगठित इमिग्रेशन और वीजा धोखाधड़ी से कमाई करने का आरोप।
फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज और नकली एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट तैयार किए गए।
मनगढ़ंत फाइनेंशियल स्टेटमेंट और फर्जी फंड प्रूफ के जरिए वीजा आवेदन तैयार किए गए।
ईडी के अनुसार, अवैध कमाई को वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।