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Election 2026: चार राज्यों की वह सीटें जहां 2021 में चंद वोटों से ही तय हो गई थी जीत-हार, जानें कहां-कितनी

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्रा Updated Mon, 04 May 2026 11:08 AM IST
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सार

तमिलनाडु से लेकर असम और केरल से लेकर पुदुचेरी तक 2021 के विधानसभा चुनावों में कई ऐसी सीटें रही थीं, जहां जीत का अंतर महज कुछ वोटों का ही था। यानी थोड़े बहुत वोट इधर-उधर होने का असर पूरे चुनाव नतीजों पर ही असर डालता। आइये जानते हैं कि वह कौन सी सीटें थीं।

Election 2026 From Kerala to Puducherry Which States Had the Most Close Contests Check Detailed Analysis
चार राज्यों की सबसे करीबी टक्कर वाली सीटें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई (सोमवार) को आएंगे। सभी की निगाहें इस बार चुनाव में खड़े बड़े चेहरों से लेकर कड़े मुकाबलों पर होंगी। हालांकि, इस बीच नजरें इस बात पर भी रहेंगी कि आखिर 2021 के चुनाव में जिन सीटों पर जीत-हार महज चंद वोटों से तय हुई थी, वहां इस बार किस पार्टी ने अपना डंका बजाया है। तब के करीबी मुकाबलों का रुख साल 2026 में कितना बदल गया है।
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आइये जानते हैं 2021 के चुनाव में सबसे करीबी मुकाबलों वाली सीटों के बारे में....

1. तमिलनाडु में कितनी सीटों पर दिखी कड़ी टक्कर?

आंकड़ों के लिहाज से बात की जाए तो तमिलनाडु उन राज्यों में शामिल रहा, जहां सबसे करीबी मुकाबले में भी जीत-हार का अंतर एक हजार वोटों से कम था। तमिलनाडु में कुल 69 सीट ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम रहा।

1000 से कम वोटों पर हार-जीत वाली सीटें
तमिलनाडु में कुल आठ सीट ऐसी थीं, जिनमें हार-जीत का अंतर एक हजार से कम रहा। इनमें सबसे करीबी मुकाबले वाली सीट त्यागरायनगर की थी, जिस पर डीएमके के जे. करुणानिधि ने जीत हासिल की थी। वहीं, भाजपा ने भी 281 वोटों के अंतर से मोदक्कुरिची सीट पर कब्जा किया था। 
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1000 से 2000 वोटों के अंतर वाली सीटें
तमिलनाडु में कुल 11 सीट ऐसी थीं, जिन पर जीत-हार का अंतर 1000 से 2000 वोटों के बीच का रहा। इनमें सबसे कड़े मुकाबले वाली सीट वेल्लोर जिले में आनी वाली जोलारपेट सीट थी। यहां से डीएमके के देवराजी ने जीत हासिल की थी। उन्हें यह जीत महज 1091 वोटों से मिली थी।

2000-3000 के अंतर वाली सीटें
तमिलनाडु में ऐसी सीटों का आंकड़ा महज पांच रहा। इनमें से दो सीट द्रमुक, एक सीट अन्नाद्रमुक, एक सीट पीएमके और एक सीट कांग्रेस के पास आई। 

3000-5000 के अंतर वाली सीटें
15 सीटों पर जीत-हार का अंतर तीन हजार से पांच हजार के बीच रहा। इनमें से सात अन्नाद्रमुक, जबकि छह द्रमुक के पास आईं। इसके अलावा एक-एक सीट वीसीके और कांग्रेस के पास गईं।

5000 से 10,000 वोटों के अंतर वाली सीटें
कुल 30 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत-हार का अंतर पांच हजार से 10 हजार के बीच रहा। इनमें से 16 डीएमके के हाथ आईं, जबकि 10 पर अन्नाद्रमुक का कब्जा हुआ। तीन सीट पर कांग्रेस और एक पर वीसीके ने चुनाव जीता। 

2. असम में कितनी सीटों पर करीबी रहा मुकाबला?

असम में कुल 27 सीटों पर जीत-हार का अंतर 10 हजार वोटों से कम का रहा। हालांकि, राज्य की कम आबादी को मद्देनजर रखते हुए यहां वही सीटें कड़ी टक्कर वाली मानी जाती हैं, जहां जीत-हार का अंतर पांच हजार वोटों से कम का रहा। असम में ऐसी सीटों का आंकड़ा 15 ही रहा।

एक हजार वोटों से कम अंतर से कहां तय हुई जीत-हार
असम में सिर्फ दो सीट ऐसी रहीं, जहां हार-जीत का अंतर एक हजार से कम रहा। इनमें एक शिवसागर जिले की नजीरा सीट रही, जहां कांग्रेस के कद्दावर नेता देबब्रत सैकिया 683 वोटों से ही जीत हासिल कर पाए। दूसरी सीट नगांव की बरहमपुर रही, जहां भाजपा के जीतू गोस्वामी ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 751 वोटों से शिकस्त दी। 

1000-2000 वोटों के अंतर वाली सीटें
तीन सीटों पर उम्मीदवारों की जीत-हार एक हजार से दो हजार वोटों से तय हुई। इनमें बोनगईगांव की बिजनी सीट और गोपालपाड़ा की दुधनई सीट शामिल रही। इसके अलावा जोरहाट की एक सीट पर भी यह आंकड़ा 1350 वोटों का ही रहा। 

2000-5000 वोटों के अंतर से जीत-हार वाली सीटें
कुल 10 सीटों पर जीत-हार का अंतर दो हजार से ज्यादा और पांच हजार से कम रहा। इनमें से पांच सीटें अकेले कांग्रेस को मिली थीं, वहीं तीन सीटें भाजपा के खाते में गिरी थीं। एक सीट कांग्रेस की गठबंधन की सहयोगी एआईयूडीएफ को मिली थी, जबकि एक सीट भाजपा की सहयोगी यूपीपीएल के खाते में गई थी। 

5000-10,000 वोटों के अंतर वाले करीबी मुकाबले
12 सीटें ऐसी भी रहीं, जहां उम्मीदवारों की जीत-हार का अंतर 5000 वोटों से ज्यादा और 10 हजार वोटों से कम रहा। इनमें से सात सीटें भाजपा के पास गई थीं। वहीं तीन सीट कांग्रेस के पास आईं। इसके अलावा एक सीट बोडोलैंड पीपल्स पार्टी और एक सीट असम गण परिषद के पास गई थी।  

3. केरल में कितनी सीटों पर करीबी रहा मुकाबला?

केरल में कुल 52 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत-हार का अंतर 10 हजार वोटों से कम रहा। हालांकि, यहां भी कम आबादी के मद्देनजर पांच हजार वोट से कम की हार-जीत ही कड़ा मुकाबला माना जा सकता है। केरल में ऐसी करीब 26 सीटें रहीं। 

1000 से कम वोटों के अंतर से जीत-हार वाली सीटें
केरल की छह सीटों पर उम्मीदवारों की जीत-हार का अंतर एक हजार वोट से भी कम रहा। इनमें से दो सीट इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), दो सीट मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), एक सीट कांग्रेस और एक सीट नेशनल सेक्युलर पार्टी के खाते में गिरी थी। सबसे छोटी जीत महज 38 वोटों से आई थी। यह मल्लपुरम जिले की पेरिन्थलमन्ना सीट पर आईयूएमएल के उम्मीदवार नजीब कांथपुरम को मिली थी। 

1000-2000 वोटों के अंतर से विजयी बनाने वाली सीटें
पांच सीटों पर उम्मीदवारों की जीत-हार का अंतर एक हजार से दो हजार वोटों के बीच रहा। इनमें से एक सीट कांग्रेस और एक माकपा को गई, जबकि बाकी तीनों पर क्षेत्रीय दल हावी रहे। 

2000 से 5000 वोटों के अंतर से हार-जीत तय करने वाली सीटें
कुल 15 सीटों पर जीत-हार का अंतर दो हजार से पांच हजार वोटों के बीच रहा। इनमें आठ सीटों पर लेफ्ट पार्टियों को जीत मिली। वहीं, चार सीटें कांग्रेस के खाते में आईं। इसके अलावा दो सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर केरल कांग्रेस ने जीत हासिल की। 

5000 से 1000 वोटों के अंतर वाली सीटें
26 सीटों पर जीत-हार का अंतर पांच हजार से 10 हजार के बीच रहा। इनमें 12 सीट लेफ्ट पार्टियों को और तीन सीट कांग्रेस को मिलीं। इसके अलावा चार सीटें आईयूएमएल को भी हासिल हुईं। इसके अलावा बची हुई सात सीट पर क्षेत्रीय दलों ने कब्जा जमाया। 

4. पुदुचेरी में कितनी सीटों पर कड़ा मुकाबला?

पुदुचेरी की कम जनसंख्या के मद्देनजर उन सीटों को ही कड़े मुकाबले वाला माना गया, जहां जीत-हार का अंतर दो हजार से कम रहा हो। 30 विधानसभा सीटों में से ऐसी नौ सीटें रहीं। 

1000 से कम वोटों के अंतर से जीत-हार वाली सीटें
पुदुचेरी में कुल सात सीटें ऐसी रहीं, जहां हार-जीत का अंतर एक हजार वोटों से कम रहा। इनमें सबसे करीबी मुकाबला करईकल जिले में आने वाली करईकल उत्तर सीट रही, जहां 135 वोटों से ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत हासिल की।



सात में से दो सीटों पर एनडीए गठबंधन को जीत मिली थी, जबकि दो सीट पर द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की। इसके अलावा बाकी तीन सीटों पर निर्दलीयों ने कब्जा जमाया। 

1000-2000 वोटों के अंतर वाली सीटें
ऐसी सीटों की संख्या महज दो ही रही। इनमें से एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के पास गई, जबकि एक सीट भाजपा के खाते में आई। 

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