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केंद्रीय करों में बढ़ेगी राज्यों की हिस्सेदारी: 25 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे; केंद्र ने मानी आयोग की सिफारिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 03 Feb 2026 04:33 AM IST
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सार
अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्यों को भारी मात्रा में धनराशि मिलेगी। ऐसे में केंद्र को अपने राजकोषीय लक्ष्यों और ऋण प्रबंधन का पालन सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरतनी होगी।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
16वें वित्त आयोग ने एक अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले पांच वर्ष के लिए केंद्रीय करों में राज्यों की 41 फीसदी हिस्सेदारी का सुझाव दिया है। इसने स्थानीय निकायों के अनुदान को दोगुना करने और राज्यों के लिए हस्तांतरण के बाद के राजस्व घाटे के अनुदान को समाप्त करने की बात भी कही है।
व्यय सचिव ने बताया- सरकार ने सिफारिश मानीं
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व्यय सचिव ने बताया- सरकार ने सिफारिश मानीं
- व्यय सचिव वी. वुअलनाम ने सोमवार को कहा, सरकार ने सिफारिशें मान ली हैं। वित्त आयोग के हस्तांतरण सूत्र के अनुसार केंद्रीय कर संग्रह में राज्यों का हिस्सा करीब 14 लाख करोड़ रुपये होगा।
- अनुदानों के साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं जैसे अन्य मदों को मिलाकर सरकार से राज्यों को जाने वाली कुल राशि 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी।
- 16वें वित्त आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए विधिवत गठित ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को मिलाकर कुल 7,91,493 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है।
- व्यय सचिव ने यह भी कहा, 16वें वित्त आयोग की ओर से हस्तांतरण के बाद दिए जाने वाले राजस्व घाटा अनुदान को खत्म करने की सिफारिश का राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सिर्फ कुछ ही राज्यों को यह अनुदान मिल रहा था।
- वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यों को मिलने वाली अनुदान की कुल राशि घटकर मात्र 13,000 करोड़ रुपये रह गई है। व्यय सचिव के मुताबिक, राजस्व घाटा अनुदान एक क्रमिक रूप से कम होने वाला अनुदान था और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार इसे 2025-26 तक खत्म होना ही था।
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