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SC: नशे की गिरफ्त में देश के डेढ़ करोड़ से ज्यादा नौनिहाल, 16 करोड़ लोग पीते हैं शराब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 14 Dec 2022 08:53 PM IST
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सार

केंद्र सरकार का पक्ष रख रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत के 2016 के फैसले के बाद भारत में मादक पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण किया था।

Govt tells SC Over one crore children in 10 to 17 age group addicted to substances
नशे की गिरफ्त में बच्चे। - फोटो : Reuters
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में नशे को लेकर सरकार द्वारा दिया गया एक जवाब चिंता बढ़ाने वाला है। देश में बच्चों में बढ़ती नशे की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है। सरकार ने बुधवार को शीर्ष अदालत के एक आदेश के बाद किए गए एक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में 10 से 17 साल की उम्र के 1.58 करोड़ बच्चे नशीले पदार्थों के आदी हैं। ये बच्चे और किशोर अल्कोहल, अफीम, कोकीन, भांग सहित कई तरह के नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। सरकार ने यह भी कहा कि शराब भारतीयों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला साइकोएक्टिव पदार्थ है, इसके बाद भांग और नशीली दवाएं हैं।

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16 करोड़ लोग करते हैं शराब का सेवन
शीर्ष अदालत में सरकार द्वारा दिए गए जवाब के मुताबिक, देश के लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं और 5.7 करोड़ से अधिक व्यक्ति हानिकारक शराब पीते हैं। वहीं, लगभग 3.1 करोड़ व्यक्ति नशे के लिए भांग उत्पादों का उपयोग करते हैं। साथ ही लगभग 25 लाख लोग भांग की लत से पीड़ित हैं। जबकि 2.26 करोड़ लोग नशीली दवाओं का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही लगभग 77 लाख व्यक्तियों को नशीली दवाओं के सेवन से होने वाली समस्याओं से मदद की जरूरत है। 
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केंद्र सरकार का पक्ष रख रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत के 2016 के फैसले के बाद भारत में मादक पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण किया था। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 14 दिसंबर, 2016 के फैसले में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में मादक पदार्थों के उपयोग पर एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया था।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि उसने 2018 के दौरान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (NDDTC) के माध्यम से सर्वेक्षण किया। 

देश की आबादी की 1.6 प्रतिशत महिलाएं करती हैं शराब का सेवन
इस सर्वें के मुताबिक, शराब भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाने वाला सबसे आम नशीला पदार्थ है। राष्ट्रीय स्तर पर 10 से 75 वर्ष की आयु के बीच की लगभग 14.6 प्रतिशत जनसंख्या शराब का नशा करती है। इसमें यह भी कहा गया है कि देश में शराब पीने वाली महिलाओं (1.6 प्रतिशत) की तुलना में पुरुषों (27.3 प्रतिशत) में शराब का उपयोग काफी ज्यादा होता है। सर्वे के मुताबिक, एक महिला की तुलना में 17 पुरुष शऱाब का सेवन करते हैं। इसके साथ ही देश के छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश और गोवा में सबसे ज्यादा  शराब का सेवन किया जाता है। 

सर्वे के मुताबिक, शराब के बाद भारत में भांग और नशीली दवाएं आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थ हैं। बीते साल में लगभग 2.8 प्रतिशत आबादी (3.1 करोड़ व्यक्तियों) द्वारा किसी भी भांग उत्पाद का उपयोग करना दर्ज किया गया है। भांग के सबसे अधिक प्रचलन वाले राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली हैं।

'बचपन बचाओ आंदोलन' ने दिया यह तर्क
इस दौरान एनजीओ 'बचपन बचाओ आंदोलन' की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने तर्क दिया कि सरकार 2016 में जारी शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है। मादक द्रव्यों के सेवन से निपटने के लिए अपनी राष्ट्रीय योजना में सभी पहलुओं को शामिल नहीं किया है। इस पर पीठ ने फूलका से पूछा कि क्या वह आदेश का पालन नहीं होने से व्यथित हैं, या योजना में कुछ और किया जा सकता था। इस पर फूलका ने कहा कि हालांकि राष्ट्रीय योजना का अनुपालन किया गया है, लेकिन इसमें अधिक पहलुओं को शामिल किया जा सकता था।

पीठ ने कहा कि वह इस मामले को एक ऐसे मामले से जोड़ रही है जिसे अदालत ने अपने आप लिया था, जो कमोबेश उसी मुद्दे से संबंधित है और मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा सुनवाई की जा रही है।
भाटी ने कहा कि मामले में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा विभिन्न रिपोर्टें दायर की गई हैं और इस बात से सहमत हैं कि इस मामले को मुख्य न्यायाधीश द्वारा मामले की सुनवाई के साथ जोड़ा जा सकता है।

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