कर्नाटक के वेमगल में H-125 हेलीकॉप्टर का उद्घाटन: राजनाथ सिंह बोले- भारत बना रक्षा निर्यात में वैश्विक खिलाड़ी
रक्षा मंत्री रजनाथ सिंह और फ्रांसीसी समकक्ष कैथरीन वॉट्रिन कर्नाटक के वेमगल में H-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब निजी उद्योगों और MSMEs की मदद से रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अन्य देशों को उन्नत सुरक्षा समाधान देने को तैयार है।
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने टाटा और एयरबस के संयुक्त प्रयास से बने H-125 हेलिकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया। कर्नाटक के वेमगल में आयोजित इस समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन समेत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह में बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में रक्षा उत्पादन हमेशा सरकारी क्षेत्र की ओर केंद्रित रहा है। इसके कारण निजी कंपनियों का योगदान रक्षा उत्पादन और निर्यात में अपेक्षानुसार कम रहा। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि भारत के रक्षा निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है और देश दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस वृद्धि से छोटे और मध्यम उद्योग और सहायक उद्योगों को भी बहुत फायदा मिला है। कई विदेशी कंपनियां अब अपने कई हिस्सों की आपूर्ति भारतीय MSMEs से करती हैं। उन्होंने इन कंपनियों को आमंत्रित किया कि वे इस साझेदारी को और मजबूत करें, तकनीकी ज्ञान साझा करें और अन्य देशों की सुरक्षा जरूरतों के लिए उन्नत समाधान प्रदान करें।
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इस परियोजना में कितने का निवेश, रक्षा मंत्री ने दी जानकारी
इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने H-125 हेलीकॉप्टर कार्यक्रम के निवेश के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा और इससे सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से देश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। H-125 हेलीकॉप्टर की यह फाइनल असेंबली लाइन भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण और रक्षा उत्पादन में निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
इस दौरान राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा निर्माण प्रणाली में हुए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पहले भारत में रक्षा उत्पादन मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र तक सीमित था, जिससे निजी क्षेत्र का योगदान कम था। लेकिन अब निजी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ी है और रक्षा निर्यात में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
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विदेश कंपियनों से की ये अपील
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि MSME और सहायक उद्योग को इस वृद्धि से बड़ा लाभ मिला है। कई विदेशी कंपनियां अब भारतीय MSME से घटक खरीद रही हैं। सिंह ने विदेशी कंपनियों से कहा कि वे भारत के साथ तकनीक साझेदारी बढ़ाएं और उन्नत समाधानों के माध्यम से अन्य देशों की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करें। उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस हेलिकॉप्टर्स की टीमों को इस पहल के लिए बधाई दी और इसे दोस्त देशों के साथ उच्च तकनीकी निर्माण में सहयोग बढ़ाने का कदम बताया।
मेक इन इंदिया का किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने भारत की प्रमुख योजनाओं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से भारत ने उच्च तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर उद्योगिक विकास, निवेश योजनाएँ, और रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर जैसे उपाय अपनाए हैं। उन्होंने कहा कि अब निजी क्षेत्र का हिस्सा कुल रक्षा उत्पादन का लगभग एक चौथाई है।
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