Women Reservation Bill: 'बिल पास नहीं हुआ तो 2029 में मतदाता देंगी जवाब', महिला आरक्षण पर बोलीं किरण बेदी
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुदुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी ने महिला आरक्षण बिल पर कहा कि अगर यह विधेयक पास नहीं हुआ तो 2029 के चुनाव में महिला मतदाता जवाब देंगी।
विस्तार
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुदुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी ने शुक्रवार को महिला आरक्षण विधेयक पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर संसद महिला आरक्षण विधेयक पारित करने में असफल रहती है, तो महिला मतदाता निर्णायक रूप से उन उम्मीदवारों का समर्थन कर सकती हैं, जो 2029 की संसद और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं अब शासन और नीति निर्माण में वास्तविक भूमिका की मांग कर रही हैं।
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तुष्टीकरण से काम नहीं चलेगा- बेदी
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘अगर संसद #महिलाकोटाविधेयक पारित करने में विफल रहती है, तो महिला मतदाता निर्णायक रूप से उन लोगों का समर्थन कर सकती हैं जो 2029 की संसद और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ उन्होंने आगे कहा, 'अब यह स्पष्ट है कि महिलाएं एक निर्णायक चुनावी ताकत हैं। प्रतीकात्मक तुष्टीकरण से काम नहीं चलेगा। वे वास्तविक रूप से सत्ता में अपनी जगह चाहती हैं और भारत के भविष्य को आकार देने में प्रत्यक्ष भूमिका चाहती हैं।'
महिला आरक्षण कानून में संशोधन आज मतदान
इस बीच, महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग की स्थापना के उद्देश्य से लाए गए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर लोकसभा में शुक्रवार को मतदान होने वाला है। संविधान (131 संशोधन) विधेयक, 2026, जिसका उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण को सक्षम बनाना और परिसीमन को सुगम बनाना है। गुरुवार को लोकसभा में मतों के विभाजन के बाद मंजूरी मिल गई।
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50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी- कानून मंत्री
कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के साथ-साथ महिला कोटा लागू करने के अभ्यास के तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो कई राज्यों में सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उत्तर प्रदेश में 120 सीटें, तमिलनाडु में 59, पश्चिम बंगाल में 63, केरल में 30 और गुजरात में 39 सीटें होने की संभावना है।
272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए मेघवाल ने कहा, 'महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था, जिसमें 2026 के बाद की जनगणना और उसके बाद के परिसीमन के आधार पर इसके प्रावधानों को लागू करने का प्रावधान है। लोकसभा सदस्यों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें 815 हो जाएंगी, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन का एक तिहाई हिस्सा है। पुरुष सांसदों या किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और सभी की सीटें बरकरार रहेंगी।'
हालांकि, विपक्ष ने परिसीमन पहलू पर आपत्ति जताई है, जबकि सैद्धांतिक रूप से महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को महिला आरक्षण विधेयक के रूप में पेश किया जा रहा है।
