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भारत ने यूएन में PAK को जमकर धोया: अफगानिस्तान-बांग्लादेश का जिक्र कर कहा- नरसंहार के कलंकित इतिहास वाला देश
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 21 May 2026 06:59 AM IST
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सार
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में जवाब देते हुए उसके इतिहास और नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। भारत ने कहा कि जो देश खुद नरसंहार और हिंसा के आरोपों से घिरा रहा है, वह दूसरों पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं रखता। अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संदर्भों के साथ भारत ने पाकिस्तान के रवैये को दोहरा और पाखंडी बताया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत ने पाकिस्तान के 'नरसंहार के कलंकित इतिहास' पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में तीखी प्रतिक्रिया दी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का अमानवीय आचरण दशकों से अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा के भीतर और बाहर हिंसा के कृत्यों के जरिए बाहरी दुनिया पर थोपने के उसके प्रयासों को दर्शाता है।
'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषय पर वार्षिक यूएनएससी की बहस के दौरान राजदूत पर्वतनेनी ने कहा, "यह विडंबना है कि पाकिस्तान अपने नरसंहार के कलंकित इतिहास के साथ, ऐसे मुद्दों का जिक्र करता है जो भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक मामले हैं।" पर्वतनेनी की यह टिप्पणी पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा बहस में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद आई।
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अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले का उठाया मुद्दा
राजदूत पर्वतनेनी ने इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "दुनिया यह नहीं भूली है कि यह इस साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के दौरान था, जो शांति, चिंतन और दया का समय था, जब पाकिस्तान ने काबुल में अस्पताल पर एक बर्बर हवाई हमला किया था।"
उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के हवाले से कहा कि "हिंसा का यह कायरतापूर्ण और अनैतिक कार्य एक ऐसी सुविधा में 269 नागरिकों की मौत और 122 अन्य के घायल होने का कारण बना, जिसे किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता है।"
'पाखंडी' है पाकिस्तान का रवैया
पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के इस रवैये को पाखंडी करार दिया। उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों का पालन करने का दावा करता है, जबकि अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाता है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा किए गए ये हवाई हमले शाम की नमाज के आखिर में हुए, जब कई मरीज मस्जिद से निकल रहे थे। अफगानिस्तान के नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा के कारण 94,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
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'खुद के लोगों पर बमबारी करने वाला देश'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा इस तरह के जघन्य हमले आश्चर्यजनक नहीं होने चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और नरसंहार करता है। पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान अपनी सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के नरसंहार और बलात्कार अभियान को मंजूरी दी थी। ऑपरेशन सर्चलाइट पाकिस्तानी सेना द्वारा मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में बांग्लादेशी राष्ट्रवादी आंदोलन के खिलाफ की गई कार्रवाई का कोडनेम था।
'सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा' विषय पर वार्षिक यूएनएससी की बहस के दौरान राजदूत पर्वतनेनी ने कहा, "यह विडंबना है कि पाकिस्तान अपने नरसंहार के कलंकित इतिहास के साथ, ऐसे मुद्दों का जिक्र करता है जो भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक मामले हैं।" पर्वतनेनी की यह टिप्पणी पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा बहस में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद आई।
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अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले का उठाया मुद्दा
राजदूत पर्वतनेनी ने इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "दुनिया यह नहीं भूली है कि यह इस साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के दौरान था, जो शांति, चिंतन और दया का समय था, जब पाकिस्तान ने काबुल में अस्पताल पर एक बर्बर हवाई हमला किया था।"
उन्होंने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के हवाले से कहा कि "हिंसा का यह कायरतापूर्ण और अनैतिक कार्य एक ऐसी सुविधा में 269 नागरिकों की मौत और 122 अन्य के घायल होने का कारण बना, जिसे किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता है।"
'पाखंडी' है पाकिस्तान का रवैया
पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के इस रवैये को पाखंडी करार दिया। उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों का पालन करने का दावा करता है, जबकि अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाता है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा किए गए ये हवाई हमले शाम की नमाज के आखिर में हुए, जब कई मरीज मस्जिद से निकल रहे थे। अफगानिस्तान के नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा के कारण 94,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
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'खुद के लोगों पर बमबारी करने वाला देश'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा इस तरह के जघन्य हमले आश्चर्यजनक नहीं होने चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और नरसंहार करता है। पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान अपनी सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के नरसंहार और बलात्कार अभियान को मंजूरी दी थी। ऑपरेशन सर्चलाइट पाकिस्तानी सेना द्वारा मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में बांग्लादेशी राष्ट्रवादी आंदोलन के खिलाफ की गई कार्रवाई का कोडनेम था।