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PM Modi Gifts: केसर आम, मधुबनी पेंटिंग और मूगा सिल्क स्टोल, पांच देशों की यात्रा में PM मोदी ने दिए खास उपहार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 21 May 2026 10:45 AM IST
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सार

प्रधानमंत्री मोदी ने पांच देशों की यात्रा के दौरान विभिन्न नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े खास उपहार भेंट किए। जॉर्जिया मेलोनी को मूगा सिल्क और शिरुई लिली स्टोल, सर्जियो मैटारेला को मार्बल इनले वर्क बॉक्स, मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को केसर आम, विलेम-अलेक्जेंडर को ब्लू पॉटरी और जोनास गहर स्टोरे को ऑर्किड पेंटिंग भेंट की गई। आइए विस्तार से जानते हैं।

PM Modi's special gift: Assamese muga silk stole presented to Italian PM Meloni
पीएम मोदी ने दिया उपहार - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की अपनी पांच देशों की यात्रा पूरी कर ली। इस दौरे के दौरान भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर विशेष पहचान मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं को भारत की विविध परंपराओं और हस्तशिल्प से जुड़े खास उपहार भेंट किए।


इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को प्रधानमंत्री मोदी ने असम की प्रसिद्ध मूगा सिल्क स्टोल भेंट की। गोल्डन सिल्क के नाम से मशहूर मूगा सिल्क पूर्वोत्तर भारत की ब्रह्मपुत्र घाटी की एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित पारंपरिक विरासत मानी जाती है। इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग और सादगीपूर्ण आकर्षण इसे बेहद खास बनाता है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार की जाती है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ परंपरा का प्रतीक बनाती है। मूगा सिल्क दुनिया के सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशों में गिनी जाती है और इसकी चमक समय के साथ और निखरती जाती है। इसकी नमी सोखने और UV-प्रतिरोधी क्षमता भी इसे बेहद उपयोगी बनाती है। इटली की लग्जरी टेक्सटाइल परंपरा और असम की गोल्डन सिल्क के बीच एक स्वाभाविक सांस्कृतिक जुड़ाव भी देखा जाता है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को शिरुई लिली सिल्क स्टोल भी भेंट की। यह स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी पहाड़ियों से प्रेरित है। इसका डिजाइन दुर्लभ शिरुई लिली फूल पर आधारित है, जो हल्के गुलाबी-सफेद रंग की घंटी के आकार वाली एक विशेष प्रजाति है और दुनिया में केवल मणिपुर में ही पाई जाती है। तंगखुल नागा समुदाय के लिए यह फूल पवित्रता, सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाता है। यह स्टोल हिमालयी हस्तकला की सुंदरता के साथ-साथ आदिवासी परंपरा और लोककथाओं की भावना को भी दर्शाता है। इटली में भी लिली फूल को पवित्रता, सौंदर्य और कलात्मक परिष्कार का प्रतीक माना जाता है तथा पुनर्जागरण कालीन कला में इसकी विशेष मौजूदगी रही है। इस साझा सांस्कृतिक प्रतीकवाद ने भारत और इटली के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया।
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इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को प्रधानमंत्री मोदी ने आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना मार्बल इनले वर्क बॉक्स और पंडित भीमसेन जोशी तथा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की सीडी भेंट की। मार्बल इनले बॉक्स भारत की हस्तशिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। पच्चीकारी या पिएत्रा ड्यूरा कला की शुरुआत इटली के फ्लोरेंस शहर से मानी जाती है, जो बाद में भारत में शाही संरक्षण के तहत विकसित हुई। इस तरह यह उपहार भारत और इटली के बीच ऐतिहासिक कलात्मक संबंधों का प्रतीक बनकर सामने आया।

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के GI टैग वाले केसर आम भेंट किए। क्वीन ऑफ मैंगोज कहलाने वाला यह आम गुजरात के जूनागढ़ क्षेत्र से जुड़ा है और अपने केसरिया रंग, बिना रेशों वाले गूदे और खास सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। गुजरात की पारंपरिक आमरस संस्कृति में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

यूएई के क्राउन प्रिंस को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान की पारंपरिक कोफ्तगिरी कला से सजी औपचारिक कटार भेंट की। यह विशेष कटार भारत की युद्धक और कलात्मक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। उदयपुर के सिकलीगर और पारंपरिक धातु शिल्पकार इस कला में स्टील पर सोने और चांदी की महीन तारों से फूलों और ज्यामितीय आकृतियों की नक्काशी करते हैं। राजपूत काल में यह कला शाही प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी। हस्तनिर्मित भारतीय कटार और अमीराती खंजर परंपरा के बीच समानता भी इस उपहार को खास बनाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंगयु को भारत के प्रसिद्ध चावल की विभिन्न किस्मों के नमूने भी भेंट किए। इनमें केरल का पलक्कड़ रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, इंडो-गंगेटिक क्षेत्र का बासमती चावल, असम का जोहा राइस और उत्तर प्रदेश का कालानमक चावल शामिल रहे। इन सभी किस्मों की अपनी विशेष सुगंध, स्वाद और पोषण संबंधी खूबियां हैं। कालानमक चावल को “बुद्धा राइस” भी कहा जाता है, जबकि बासमती को “क्वीन ऑफ फ्रेगरेंस” के नाम से जाना जाता है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने FAO महानिदेशक को हेल्दी मिलेट बार्स भी भेंट किए। महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर उगाए जाने वाले ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाज पोषण, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर माने जाते हैं। ये जलवायु के अनुकूल फसलें हैं और आधुनिक स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। मिलेट बार्स को भारत की पारंपरिक कृषि और आधुनिक स्वास्थ्य संस्कृति के संगम के रूप में देखा जा रहा है।

नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी भेंट की। जयपुर की GI-टैग्ड ब्लू पॉटरी अपनी चमकदार कोबाल्ट ब्लू, सफेद और पीले रंगों की डिजाइन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसे मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज पाउडर, कांच के चूरे और फुलर्स अर्थ के विशेष मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिससे इसमें कांच जैसी चमक दिखाई देती है। इसकी खास फायरिंग तकनीक इसे अनोखा पारदर्शी रूप और गहरा नीला रंग देती है। इस कला में फूलों और पक्षियों की बारीक आकृतियां बनाई जाती हैं।

वहीं नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा को पीएम मोदी ने मीनाकारी और कुंदन ईयररिंग्स उपहार में दिए। राजस्थान की शाही परंपरा से जुड़ी यह कला भारतीय आभूषण शिल्प की उत्कृष्ट मिसाल मानी जाती है। मीनाकारी में धातु पर रंगीन एनामेल का बारीक काम किया जाता है, जबकि कुंदन कला में बिना कटे रत्नों को सोने की परत में जड़ा जाता है। पारंपरिक शिल्प और आधुनिक सुंदरता का यह संगम भारतीय कारीगरी की खास पहचान माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन को मछली की आकृति वाली मधुबनी पेंटिंग भेंट की। मिथिला क्षेत्र की GI-टैग्ड मधुबनी कला अपनी ज्यामितीय आकृतियों और चमकीले रंगों के लिए प्रसिद्ध है। पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा बनाई जाने वाली यह कला त्योहारों, विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होती रही है। भारतीय लोककथाओं और पौराणिक कथाओं से प्रेरित इस कला में फूल, पेड़, पक्षी और मछली जैसे प्रतीकों का विशेष महत्व होता है।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट्स उपहार में दिए। सिक्किम की धुंध भरी घाटियों से लाए गए असली ऑर्किड और फर्न से तैयार ये कलाकृतियां पूर्वी हिमालय की जैव विविधता को दर्शाती हैं। स्थानीय कारीगरों ने इन्हें बेहद सावधानी से संरक्षित किया है। भारत के पहले ऑर्गेनिक राज्य सिक्किम से जुड़ी यह कला पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक हस्तशिल्प और सतत विकास की भावना को भी प्रदर्शित करती है। प्रकृति और स्थिरता के प्रति नॉर्वे की गहरी रुचि के साथ यह उपहार खास सांस्कृतिक जुड़ाव बनाता है।
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