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India-UK CETA: गुणवत्ता बढ़ेगी तभी मिलेगा भारत-ब्रिटेन सीईटीए का लाभ, क्या है GTRI का आकलन?
Sun, 12 Jul 2026 03:29 AM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 12 Jul 2026 03:29 AM IST
सार
15 जुलाई से लागू होने वाला भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुल्क में छूट से निर्यात में स्वतः वृद्धि नहीं होगी। जीटीआरआई के अनुसार गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स, नियामकीय मंजूरी और खरीदारों के साथ मजबूत संपर्क सफलता की अहम शर्तें होंगी।
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सीईटीए का कैसे मिलेगा लाभ?
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू होगा। इससे भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। हालांकि, आर्थिक शोध संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) का कहना है कि केवल व्यापार समझौता लागू होने से निर्यात अपने आप नहीं बढ़ेगा। इसका पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स, नियामकीय मंजूरी और खरीदारों से संपर्क मजबूत करना होगा।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि समझौता भारतीय उत्पादों के लिए बाजार का दरवाजा खोलता है, लेकिन यदि समानांतर रूप से गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो अधिकांश अवसर कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक लाभ उन क्षेत्रों को मिलने की संभावना है।
पेट्रोलियम व शराब जैसे क्षेत्रों में सीमित लाभ
जीटीआरआई ने कहा कि कम बाजार हिस्सेदारी का मतलब हमेशा बड़ा अवसर नहीं होता। कई मामलों में गुणवत्ता मानक, खाद्य सुरक्षा नियम, प्रमाणन, व्यापार सुरक्षा उपाय और आपूर्ति शृंखला की मजबूती शुल्क में मिलने वाली छूट से भी अधिक महत्वपूर्ण होती है। वहीं इस्पात, पेट्रोलियम और शराब जैसे क्षेत्रों में सीईटीए से सीमित लाभ मिलने की संभावना है।
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2025 के आंकड़े बता रहे सुधार की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ब्रिटेन ने दुनिया से 928.9 अरब डॉलर का सामान आयात किया, लेकिन भारत से केवल 15.2 अरब डॉलर का। ब्रिटेन के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.6 प्रतिशत रही।
वाहन-कलपुर्जों के निर्यात को बढ़ावा
जहां भारत की उत्पादन क्षमता मजबूत है, ब्रिटेन में मांग अधिक है और सीईटीए के कारण आयात शुल्क में अच्छी कमी आएगी। इनमें परिधान, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं। वाहन, मोटरसाइकिल और उनके कलपुर्जों के निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इसके लिए तकनीकी मानकों और मूल देश संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
जीटीआरआई ने कहा कि खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को ब्रिटेन के खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा, जबकि मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और मजबूत खरीदार नेटवर्क विकसित करना होगा।
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जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि समझौता भारतीय उत्पादों के लिए बाजार का दरवाजा खोलता है, लेकिन यदि समानांतर रूप से गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो अधिकांश अवसर कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक लाभ उन क्षेत्रों को मिलने की संभावना है।
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पेट्रोलियम व शराब जैसे क्षेत्रों में सीमित लाभ
जीटीआरआई ने कहा कि कम बाजार हिस्सेदारी का मतलब हमेशा बड़ा अवसर नहीं होता। कई मामलों में गुणवत्ता मानक, खाद्य सुरक्षा नियम, प्रमाणन, व्यापार सुरक्षा उपाय और आपूर्ति शृंखला की मजबूती शुल्क में मिलने वाली छूट से भी अधिक महत्वपूर्ण होती है। वहीं इस्पात, पेट्रोलियम और शराब जैसे क्षेत्रों में सीईटीए से सीमित लाभ मिलने की संभावना है।
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2025 के आंकड़े बता रहे सुधार की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ब्रिटेन ने दुनिया से 928.9 अरब डॉलर का सामान आयात किया, लेकिन भारत से केवल 15.2 अरब डॉलर का। ब्रिटेन के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.6 प्रतिशत रही।
वाहन-कलपुर्जों के निर्यात को बढ़ावा
जहां भारत की उत्पादन क्षमता मजबूत है, ब्रिटेन में मांग अधिक है और सीईटीए के कारण आयात शुल्क में अच्छी कमी आएगी। इनमें परिधान, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं। वाहन, मोटरसाइकिल और उनके कलपुर्जों के निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इसके लिए तकनीकी मानकों और मूल देश संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
जीटीआरआई ने कहा कि खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को ब्रिटेन के खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा, जबकि मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और मजबूत खरीदार नेटवर्क विकसित करना होगा।