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मानसून सत्र: विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक की राह आसान नहीं; चढ़ावा चोरी मामले पर मचेगा घमासान

Sun, 12 Jul 2026 03:45 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 12 Jul 2026 03:45 AM IST
सार

संसद के मानसून सत्र में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के संकेत हैं। विपक्ष और कुछ राज्यों ने विधेयक की कई धाराओं पर आपत्ति जताते हुए इसे राज्यों के अधिकारों और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़ा मुद्दा बताया है। दूसरी ओर, कांग्रेस अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले पर सरकार और प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की तैयारी में है।

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संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संसद के मानसून सत्र में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) 2025 विधयेक प्रस्ताव के पास होने की राह मुश्किल होगी। सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का जवाब देना होगा। इसमें, धारा 45, धारा 47, धारा 11 पर सबसे अधिक आपत्तियां हैं। विपक्ष समेत कई राज्यों का मानना है कि वीबीएसए में उनके अधिकार व शक्तियां कम हो जाएंगी। इसके अलावा, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को इस विधेयक में जोड़ने पर भी आपत्ति है।
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विपक्ष का आरोप है कि इससे, इन दिग्गज संस्थानों की स्वायत्तता का हनन होगा। वे अपनी मर्जी से फैसले नहीं ले पाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सांसद डी पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता में संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति की सात और आठ जुलाई को अहम बैठक हुई थी। विपक्ष समेत आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और मेघालय जैसे कई राज्यों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
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चढ़ावा चोरी में सरकार से जवाब मांगेगी कांग्रेस
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा के पैसों में हुई कथित हेराफेरी को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने संसद सत्र में उनसे जवाब मांगने का एलान किया। कांग्रेस नेताओं ने देश के 26 अलग-अलग स्थानों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चढ़ावे में हेराफेरी की जांच करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट बड़ी समस्या का बस एक छोटा सा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चढ़ावा चोरी के साथ ही नीट पेपर लीक जैसे मुद्दे पर भी संसद के मानसून सत्र में सियासी बवाल होने की आशंका है।
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