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US-Iran Ceasefire: होर्मुज से भारतीय जहाजों को निकालेगी नौसेना, युद्धविराम के बाद भी युद्धस्तर पर तैयारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 08 Apr 2026 07:35 PM IST
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सार
अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच 40 दिन की जंग के बाद दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ है। भारतीय नौसेना ने होर्मुज में फंसे अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी एस्कॉर्ट सर्विस जारी रखी है। गुरुग्राम स्थित आईएफसी-आईओआर के जरिए नौसेना हर खतरे पर नजर रख रही है, जिससे भारत का ऊर्जा व्यापार प्रभावित न हो।
भारतीय जहाज
- फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब
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विस्तार
पश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण तनाव के बीच एक राहत भरी खबर आई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम यानी की सीजफायर लागू हो गया है। दुनिया भर की नजरें इस वक्त व्यापारिक रूप से सबसे संवेदनशील होर्मुज पर टिकी हैं। हालांकि, जंग रुकने के बावजूद भारतीय नौसेना ने अपनी चौकसी में कोई कमी नहीं की है।
सुरक्षा घेरे में निकलेंगे भारतीय जहाज
जानकारी के मुताबिक, सीजफायर की घोषणा के बाद भारतीय नौसेना अब फंसे हुए भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी में है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में पांच से छह भारतीय ध्वज वाले जहाजों का पहला जत्था होर्मुज पार करेगा। इसके लिए नौसेना के अधिकारी लगातार जहाजों के चालक दल और ईरान के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
खास बात यह है कि स्थिति भले ही सुधरी हो, लेकिन भारतीय नौसेना अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) में कोई ढील नहीं दे रही है। जिस तरह युद्ध के दौरान नौसेना भारतीय टैंकरों की सुरक्षा कर रही थी, वह प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी। बता दें कि तनाव की शुरुआत में इस इलाके के पश्चिम में कुल 25 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से नौ को पहले ही सुरक्षित निकाला जा चुका है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान के बीच कैसे हुआ दो हफ्ते का सीजफायर: कौन फायदे में, किसका नुकसान; क्या था प्रस्ताव, अब आगे क्या?
गुरुग्राम से हो रही है पल-पल की निगरानी
समुद्री व्यापार और जहाजों पर होने वाले हमलों पर नजर रखने के लिए गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह सेंटर भारतीय नौसेना की ओर से संचालित एक हाईटेक मैरिटाइम सुरक्षा केंद्र है। यहां की खासियत यह है कि यह दुनिया के 28 देशों के 76 लिंक्स से रीयल-टाइम डेटा हासिल करता है। वर्तमान में यहां 14 अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारी तैनात हैं, जो फारस की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी तक हर संदिग्ध गतिविधि का विश्लेषण करते हैं।
खौफनाक रहे हैं पिछले 40 दिन
हालिया रिपोर्ट बताती है कि छह अप्रैल तक इस समुद्री क्षेत्र में हालात कितने गंभीर थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 23 जहाजों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया, जिसमें अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है। नौसेना का मानना है कि भले ही अभी सीजफायर है, लेकिन समुद्र में छिपे खतरों से निपटने के लिए रीयल-टाइम निगरानी ही सबसे बड़ा हथियार है।
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सुरक्षा घेरे में निकलेंगे भारतीय जहाज
जानकारी के मुताबिक, सीजफायर की घोषणा के बाद भारतीय नौसेना अब फंसे हुए भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी में है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में पांच से छह भारतीय ध्वज वाले जहाजों का पहला जत्था होर्मुज पार करेगा। इसके लिए नौसेना के अधिकारी लगातार जहाजों के चालक दल और ईरान के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
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खास बात यह है कि स्थिति भले ही सुधरी हो, लेकिन भारतीय नौसेना अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) में कोई ढील नहीं दे रही है। जिस तरह युद्ध के दौरान नौसेना भारतीय टैंकरों की सुरक्षा कर रही थी, वह प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी। बता दें कि तनाव की शुरुआत में इस इलाके के पश्चिम में कुल 25 भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से नौ को पहले ही सुरक्षित निकाला जा चुका है।
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गुरुग्राम से हो रही है पल-पल की निगरानी
समुद्री व्यापार और जहाजों पर होने वाले हमलों पर नजर रखने के लिए गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह सेंटर भारतीय नौसेना की ओर से संचालित एक हाईटेक मैरिटाइम सुरक्षा केंद्र है। यहां की खासियत यह है कि यह दुनिया के 28 देशों के 76 लिंक्स से रीयल-टाइम डेटा हासिल करता है। वर्तमान में यहां 14 अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारी तैनात हैं, जो फारस की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी तक हर संदिग्ध गतिविधि का विश्लेषण करते हैं।
खौफनाक रहे हैं पिछले 40 दिन
हालिया रिपोर्ट बताती है कि छह अप्रैल तक इस समुद्री क्षेत्र में हालात कितने गंभीर थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 23 जहाजों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया, जिसमें अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है। नौसेना का मानना है कि भले ही अभी सीजफायर है, लेकिन समुद्र में छिपे खतरों से निपटने के लिए रीयल-टाइम निगरानी ही सबसे बड़ा हथियार है।