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MEA: 'हमारे लिए ही नहीं, दुनिया के लिए भी मुश्किल', विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान और होर्मुज पर भी जताई चिंता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Thu, 19 Mar 2026 04:07 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समय केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण है। भारत के नेता विभिन्न देशों से लगातार संपर्क में हैं।
रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह समय सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए परीक्षा का है। उन्होंने बताया कि भारत के नेता विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और शांति व स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत के शीर्ष नेता लगातार विभिन्न देशों के नेताओं के संपर्क में हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुवैत के क्राउन प्रिंस के बीच बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताई गई। भारत ने कूटनीति के जरिए हालात को संभालने और अपने हितों की रक्षा करने की दिशा में काम जारी रखा है।
परमाणु खतरे और पाकिस्तान पर कही ये बात
भारत ने पाकिस्तान और होर्मुज क्षेत्र को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु प्रसार का पुराना गुप्त रिकॉर्ड दुनिया के लिए खतरा है। हाल ही में अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में भी पाकिस्तान को बड़े परमाणु खतरों में शामिल किया गया है। भारत ने कहा कि ऐसे बयान पाकिस्तान की गतिविधियों को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और मजबूत करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है और इससे आम लोगों को भारी नुकसान हुआ है। भारत ने काबुल के अस्पताल पर हमले को कायराना बताते हुए इसकी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं।
एलपीजी की कमी पर क्या बोला मंत्रालय
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मौजूदा हालात में ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे एलपीजी की उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार सबसे पहले घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है और आम लोगों की आवश्यकताओं को हर हाल में पूरा किया जाएगा। हाल ही में आए दो एलपीजी टैंकरों से आपूर्ति में कुछ राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
जायसवाल ने कहा कि भारत ऊर्जा के लिए कई स्रोतों पर निर्भर है और इसी रणनीति को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदता है, जिसमें रूस भी शामिल है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ असामान्य नहीं है। उन्होंने एक रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों पर लगातार संपर्क बना हुआ है और दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं।
ये भी पढ़ें- ‘मजबूरी की शादी, फिर तलाक’: खरगे के तंज पर पूर्व पीएम देवेगौड़ा का पलटवार, जानें कैसे हुई इस मजाक की शुरुआत
क्या भारतीयों की सुरक्षा पर भी है फोकस?
सरकार ने कहा है कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारतीय दूतावास और सरकार लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर क्या रणनीति है?
भारत इस संकट के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को भी सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्थिति को सामान्य बनाए रखना भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि यही रास्ता तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा स्रोत है।
रूस से एलपीजी खरीदने के विकल्प खुले- मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने रूस से एलपीजी की खरीद वाले सवाल पर कहा कि देश हर संभव स्रोत से एलपीजी की खरीद पर विचार कर रहा है ताकि आपूर्ति बाधित न हो। जायसवाल ने आगे कहा कि भारत सभी विकल्प खुले रखकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि अगर रूस से एलपीजी उपलब्ध होता है, तो उस विकल्प पर भी विचार किया जाएगा।
मौजूदा हालात में सरकार का मुख्य लक्ष्य देश की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत आपूर्ति के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसलिए अलग-अलग देशों से गैस खरीद के विकल्प तलाशे जा रहे हैं, ताकि संकट के समय भी लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
क्या आगे भी जारी रहेगा संपर्क?
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत कई देशों और हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में रहेगा। सरकार का कहना है कि वह कूटनीति के जरिए समाधान निकालने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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परमाणु खतरे और पाकिस्तान पर कही ये बात
भारत ने पाकिस्तान और होर्मुज क्षेत्र को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का परमाणु प्रसार का पुराना गुप्त रिकॉर्ड दुनिया के लिए खतरा है। हाल ही में अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में भी पाकिस्तान को बड़े परमाणु खतरों में शामिल किया गया है। भारत ने कहा कि ऐसे बयान पाकिस्तान की गतिविधियों को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और मजबूत करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है और इससे आम लोगों को भारी नुकसान हुआ है। भारत ने काबुल के अस्पताल पर हमले को कायराना बताते हुए इसकी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं।
एलपीजी की कमी पर क्या बोला मंत्रालय
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मौजूदा हालात में ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे एलपीजी की उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार सबसे पहले घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है और आम लोगों की आवश्यकताओं को हर हाल में पूरा किया जाएगा। हाल ही में आए दो एलपीजी टैंकरों से आपूर्ति में कुछ राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
जायसवाल ने कहा कि भारत ऊर्जा के लिए कई स्रोतों पर निर्भर है और इसी रणनीति को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदता है, जिसमें रूस भी शामिल है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कुछ असामान्य नहीं है। उन्होंने एक रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों पर लगातार संपर्क बना हुआ है और दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं।
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क्या भारतीयों की सुरक्षा पर भी है फोकस?
सरकार ने कहा है कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारतीय दूतावास और सरकार लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर क्या रणनीति है?
भारत इस संकट के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को भी सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्थिति को सामान्य बनाए रखना भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि यही रास्ता तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा स्रोत है।
रूस से एलपीजी खरीदने के विकल्प खुले- मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने रूस से एलपीजी की खरीद वाले सवाल पर कहा कि देश हर संभव स्रोत से एलपीजी की खरीद पर विचार कर रहा है ताकि आपूर्ति बाधित न हो। जायसवाल ने आगे कहा कि भारत सभी विकल्प खुले रखकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि अगर रूस से एलपीजी उपलब्ध होता है, तो उस विकल्प पर भी विचार किया जाएगा।
मौजूदा हालात में सरकार का मुख्य लक्ष्य देश की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत आपूर्ति के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसलिए अलग-अलग देशों से गैस खरीद के विकल्प तलाशे जा रहे हैं, ताकि संकट के समय भी लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
क्या आगे भी जारी रहेगा संपर्क?
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत कई देशों और हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में रहेगा। सरकार का कहना है कि वह कूटनीति के जरिए समाधान निकालने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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